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Mau News: 78 हजार क्विटंल क्षमता वाले दो आलू शीतगृह 25 साल से बंद
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घोसी तहसील के सेमरी जमालपुर में पीसीएफ संचालित शीतगृह सेमरी जमालपुर व टड़ियांव पिछले 25 वर्षों से बंद हैं। उनकी मशीनें जंग खा रही हैं और किसान आलू व सब्जी भंडारण के लिए प्रतिवर्ष परेशान होते हैं।
करीब तीस साल पहले पीसीएफ सेमरी जमालपुर शीतगृह की क्षमता 40 हजार क्विंटल व टड़ियांव में शीतगृह की क्षमता 38 हजार क्विंटल वाली आलू भंडारण स्थापित हुआ। कई सालों तक इसका लाभ भी किसानों ने उठाया, लेकिन धीरे-धीरे ये शीतगृह बंद हो गया।
शीतगृह में लगी लाखों की लागत से लगी मशीनें जंग खा रहीं हैं और भवन जर्जर हो गए हैं। किसान नेता शिवमुनि ने बताया कि किसानों के हित में इन शीतगृह को चालू नहीं किया जा सका हैं।
किसानों की हितैषी होने का दावा करने वाली मौजूदा प्रदेश सरकार से किसानों को काफी आशा थी लेकिन प्रदेश सरकार इन शीतगृह की तरफ ध्यान नहीं दे रही हैं। किसान सुबास प्रजापति ने कहा कि क्षेत्र में शीतगृह के बंद होने से अधिकांश किसान अब आलू का उत्पादन नहीं करते हैं।
किसान उत्तम यादव ने बताया कि आलू की खेती करने वाले किसानों की समस्याओं के प्रति किसी को ध्यान नहीं हैं। किसान हरेंदर सिंह ने कहा कि आलू की खेती पूर्व में अधिक हुआ करती थी।
अभिषेक चौधरी ने कहा कि आलू की फसल तैयार होने के बाद हम लोग कोल्ड स्टोरेज की तलाश में भटकने लगते हैं। संतोष कुमार पांडेय ने कहा कि क्षेत्र में मात्र एक अलीनगर कोल्ड स्टोरेज ही चालू हालत में हैं। इसकी क्षमता 900 मीट्रिक टन हैं।
जो क्षेत्र में आलू पैदावार के लिहाजा से काफी कम हैं। दीपक यादव ने कहा कि भंडारण की समस्या से जूझते हुए हम किसान लोग मजबूरन अपना आलू बाजार में औने-पौने दाम में बेचना पड़ता हैं।
कमलेश राय ने बताया कि शीतगृह के चालू नहीं होने से सीजन में रखरखाव के करण ज्यादा आलू सड़कर खराब हो जाते हैं। जो लागत लगाई जाती उसका मूल्य भी नही मिल पा रहा हैं। अब आलू की खेती से मोहभंग होने लगा हैं।
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करीब तीस साल पहले पीसीएफ सेमरी जमालपुर शीतगृह की क्षमता 40 हजार क्विंटल व टड़ियांव में शीतगृह की क्षमता 38 हजार क्विंटल वाली आलू भंडारण स्थापित हुआ। कई सालों तक इसका लाभ भी किसानों ने उठाया, लेकिन धीरे-धीरे ये शीतगृह बंद हो गया।
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शीतगृह में लगी लाखों की लागत से लगी मशीनें जंग खा रहीं हैं और भवन जर्जर हो गए हैं। किसान नेता शिवमुनि ने बताया कि किसानों के हित में इन शीतगृह को चालू नहीं किया जा सका हैं।
किसानों की हितैषी होने का दावा करने वाली मौजूदा प्रदेश सरकार से किसानों को काफी आशा थी लेकिन प्रदेश सरकार इन शीतगृह की तरफ ध्यान नहीं दे रही हैं। किसान सुबास प्रजापति ने कहा कि क्षेत्र में शीतगृह के बंद होने से अधिकांश किसान अब आलू का उत्पादन नहीं करते हैं।
किसान उत्तम यादव ने बताया कि आलू की खेती करने वाले किसानों की समस्याओं के प्रति किसी को ध्यान नहीं हैं। किसान हरेंदर सिंह ने कहा कि आलू की खेती पूर्व में अधिक हुआ करती थी।
अभिषेक चौधरी ने कहा कि आलू की फसल तैयार होने के बाद हम लोग कोल्ड स्टोरेज की तलाश में भटकने लगते हैं। संतोष कुमार पांडेय ने कहा कि क्षेत्र में मात्र एक अलीनगर कोल्ड स्टोरेज ही चालू हालत में हैं। इसकी क्षमता 900 मीट्रिक टन हैं।
जो क्षेत्र में आलू पैदावार के लिहाजा से काफी कम हैं। दीपक यादव ने कहा कि भंडारण की समस्या से जूझते हुए हम किसान लोग मजबूरन अपना आलू बाजार में औने-पौने दाम में बेचना पड़ता हैं।
कमलेश राय ने बताया कि शीतगृह के चालू नहीं होने से सीजन में रखरखाव के करण ज्यादा आलू सड़कर खराब हो जाते हैं। जो लागत लगाई जाती उसका मूल्य भी नही मिल पा रहा हैं। अब आलू की खेती से मोहभंग होने लगा हैं।
