{"_id":"6a6ba61bd598982eea0ad6c9","slug":"young-people-falling-prey-to-osteomalacia-bones-becoming-weak-mau-news-c-295-1-mau1001-149488-2026-07-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: ऑस्टियोमैलेसिया की चपेट में आ रहे युवा, कमजोर हो रहीं हड्डियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: ऑस्टियोमैलेसिया की चपेट में आ रहे युवा, कमजोर हो रहीं हड्डियां
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अनियमित दिनचर्या, ज्यादातर समय एयर कंडीशनिंग (एसी) में रहने और शारीरिक श्रम कम करने से युवा ऑस्टियोमैलेसिया (अस्थिमृदुता) की चपेट में आ रहे हैं। इस बीमारी में कम उम्र में ही युवाओं की हड्डियां कमजोर हो रही हैं और उनके टूटने का खतरा बढ़ता जा रहा है।
वहीं, इस बीमारी से ग्रस्त युवाओं को चलने-फिरने और उठने-बैठने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसके प्रति समय रहते सचेत नहीं हुआ गया तो 40 वर्ष की उम्र के बाद हड्डियां टूटने की आशंका 80 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
कल्पनाथ मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपम श्रीवास्तव ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले 15 से 20 प्रतिशत मरीजों में ऑस्टियोमैलेसिया की शिकायत मिल रही है।
विज्ञापन
युवाओं में यह बीमारी लगातार बढ़ती जा रही है। इस बीमारी की वजह अनियमित दिनचर्या, लगातार एसी का प्रयोग और किसी प्रकार का शारीरिक श्रम न करना है।
उन्होंने बताया कि इस बीमारी में युवाओं की हड्डियां मुलायम होती जा रही हैं। सप्ताह में एक-दो मामले बच्चों के भी आ रहे हैं। बच्चों में इस रोग को रिकेट्स कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि यदि समय रहते अनियमित खान-पान और लगातार एसी का प्रयोग कम नहीं किया गया तो 40 वर्ष की उम्र के बाद बोन फ्रैक्चर का खतरा 70 से 80 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों में ऑस्टियोमैलेसिया की समस्या केवल 5 प्रतिशत तक ही मिल रही है। इसकी वजह यह है कि ग्रामीण इलाकों में लोगों की दिनचर्या और खानपान काफी हद तक सही है। इसके साथ ही इन इलाकों में लोग शारीरिक श्रम भी खूब करते हैं। यह उन्हें स्वस्थ रखने में काफी सहायक सिद्ध होता है।
-- -- -- -- -- -
यह होते हैं लक्षण
मांसपेशियों में कमजोरी, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी के कारण चलने में समस्या, कूल्हों के पास दर्द होना, दर्द का धीरे-धीरे कूल्हों से पीठ के निचले हिस्से, पैरों और पसलियों तक पहुंच जाना, खून में कैल्शियम का स्तर बहुत कम होना, दिल की अनियमित धड़कन, मुंह के आसपास का हिस्सा सुन्न होना, हाथ और पैर सुन्न होना तथा हाथों-पैरों में ऐंठन।
-- -- -- -- -- --
जंक फूड से बचें, रोज करें व्यायाम
मऊ। जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी नारायण ने बताया कि युवाओं को अपने शरीर, खासकर हड्डियों के प्रति अधिक सचेत रहने की जरूरत है। ऑस्टियोमैलेसिया से बचने के लिए पौष्टिक आहार का सेवन करें। रोजाना कम से कम एक घंटे व्यायाम करें। फास्ट फूड और जंक फूड से बचें। कैल्शियम से भरपूर आहार लें। पनीर, पत्तेदार सब्जियां, बादाम, दूध, टमाटर, अंजीर, ब्रोकली, तिल, दही, संतरा, आंवला और सोयाबीन आदि का सेवन करें। खाने में मैग्नीशियम की मात्रा का भी ध्यान रखें। इसके लिए सोयाबीन, कद्दू, दही, मछली, केला, बादाम, स्ट्रॉबेरी, पालक और काजू आदि का सेवन करें। विटामिन-डी के लिए मछली, डेयरी उत्पाद, गाजर और दलिया आदि खाएं। लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें। जितना जल्दी उपचार शुरू होगा, उतना ही मरीज के लिए बेहतर होगा। संवाद
विज्ञापन
वहीं, इस बीमारी से ग्रस्त युवाओं को चलने-फिरने और उठने-बैठने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसके प्रति समय रहते सचेत नहीं हुआ गया तो 40 वर्ष की उम्र के बाद हड्डियां टूटने की आशंका 80 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
विज्ञापन
कल्पनाथ मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपम श्रीवास्तव ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले 15 से 20 प्रतिशत मरीजों में ऑस्टियोमैलेसिया की शिकायत मिल रही है।
विज्ञापन
युवाओं में यह बीमारी लगातार बढ़ती जा रही है। इस बीमारी की वजह अनियमित दिनचर्या, लगातार एसी का प्रयोग और किसी प्रकार का शारीरिक श्रम न करना है।
उन्होंने बताया कि इस बीमारी में युवाओं की हड्डियां मुलायम होती जा रही हैं। सप्ताह में एक-दो मामले बच्चों के भी आ रहे हैं। बच्चों में इस रोग को रिकेट्स कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि यदि समय रहते अनियमित खान-पान और लगातार एसी का प्रयोग कम नहीं किया गया तो 40 वर्ष की उम्र के बाद बोन फ्रैक्चर का खतरा 70 से 80 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों में ऑस्टियोमैलेसिया की समस्या केवल 5 प्रतिशत तक ही मिल रही है। इसकी वजह यह है कि ग्रामीण इलाकों में लोगों की दिनचर्या और खानपान काफी हद तक सही है। इसके साथ ही इन इलाकों में लोग शारीरिक श्रम भी खूब करते हैं। यह उन्हें स्वस्थ रखने में काफी सहायक सिद्ध होता है।
यह होते हैं लक्षण
मांसपेशियों में कमजोरी, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी के कारण चलने में समस्या, कूल्हों के पास दर्द होना, दर्द का धीरे-धीरे कूल्हों से पीठ के निचले हिस्से, पैरों और पसलियों तक पहुंच जाना, खून में कैल्शियम का स्तर बहुत कम होना, दिल की अनियमित धड़कन, मुंह के आसपास का हिस्सा सुन्न होना, हाथ और पैर सुन्न होना तथा हाथों-पैरों में ऐंठन।
जंक फूड से बचें, रोज करें व्यायाम
मऊ। जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी नारायण ने बताया कि युवाओं को अपने शरीर, खासकर हड्डियों के प्रति अधिक सचेत रहने की जरूरत है। ऑस्टियोमैलेसिया से बचने के लिए पौष्टिक आहार का सेवन करें। रोजाना कम से कम एक घंटे व्यायाम करें। फास्ट फूड और जंक फूड से बचें। कैल्शियम से भरपूर आहार लें। पनीर, पत्तेदार सब्जियां, बादाम, दूध, टमाटर, अंजीर, ब्रोकली, तिल, दही, संतरा, आंवला और सोयाबीन आदि का सेवन करें। खाने में मैग्नीशियम की मात्रा का भी ध्यान रखें। इसके लिए सोयाबीन, कद्दू, दही, मछली, केला, बादाम, स्ट्रॉबेरी, पालक और काजू आदि का सेवन करें। विटामिन-डी के लिए मछली, डेयरी उत्पाद, गाजर और दलिया आदि खाएं। लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें। जितना जल्दी उपचार शुरू होगा, उतना ही मरीज के लिए बेहतर होगा। संवाद