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Mau News: नशे में स्टीयरिंग संभाल रहे युवा, जिंदगी की गाड़ी हो रही बेकाबू

Wed, 29 Jul 2026 11:59 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jul 2026 11:59 PM IST
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Youngsters behind the wheel under the influence the vehicle of life is spiraling out of control.
आठ दिनों में जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सड़क हादसे के 26 मामले आए। इनमें 16 मामले बीते चार दिन में आए हैं। यह आंकड़ा केवल एक सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी का है।
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अगर इसमें नगर के तीन बड़े निजी अस्पतालों की इमरजेंसी के आंकड़े शामिल किए जाएं तो यह संख्या 60 से अधिक पहुंच जाएगी। इनमें 30 फीसदी हादसों के समय वाहन चालक नशे की हालत में मिले।
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डॉक्टरों की पूछताछ में घायलों ने बताया कि वे किसी पार्टी, समारोह या फिर दोस्तों संग जाम लड़ाने के बाद गाड़ी की स्टीयरिंग संभाल रहे थे। उनकी इस लापरवाही से न केवल उनकी जान को खतरा हुआ, बल्कि सवार 20 से अधिक लोग घायल हो गए।
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इन घायलों में 70 फीसदी की उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच रही है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बीते एक जनवरी से अब तक सड़क हादसे के 582 मामले पहुंचे हैं।
वहीं, बीते 20 जुलाई से बुधवार दोपहर 12 बजे तक 26 मामले आ चुके थे। उन्होंने बताया कि सड़क हादसों के आंकड़े और केस की जांच में सामने आने वाली हिस्ट्री में कई घायल शराब के नशे में वाहन चलाने के कारण हादसे का शिकार हुए हैं।
बताया कि इस स्थिति में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों को भी उनके इलाज में दिक्कत होती है। कारण, कोई नशे में होने के कारण बेहोश है, जिसकी वजह से वह यह नहीं बता पा रहा है कि कहां चोट लगी है तो कोई होश में होते हुए भी अजीब हरकत कर हाथ-पैर पटक रहा है।
इसे संभालने में जहां स्वास्थ्यकर्मी परेशान होते हैं, वहीं परिवार को जानकारी देने में भी दिक्कत बढ़ जाती है। गर्मी में शराब का सेवन करना और वाहन चलाना खतरा बढ़ाने जैसा है। लोगों को सजग और सतर्क रहने की जरूरत है। इमरजेंसी में पहुंचने वाले केस में इसी बात का सामने आना है।

नशे की हालत में आने वाले मरीजों का उपचार करना अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। कई मरीज अपनी जानकारी नहीं दे पाते और उपचार के दौरान सहयोग भी नहीं करते। सड़क सुरक्षा नियमों का पालन और नशे में वाहन चलाने से बचना बेहद जरूरी है।
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