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Meerut News: कृषि विश्वविद्यालय बनेगा प्लास्टिक मुक्त, कुलपति ने जारी किए निर्देश
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मोदीपुरम - कृषि विवि में आयोजित बैठक में बोलते कुलपति।
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विश्वविद्यालय ने निगरानी के लिए टीम बनाई, प्रयोग करने पर होगी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
मोदीपुरम। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को प्लास्टिक मुक्त शिक्षण संस्थान बनाने की दिशा में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बुधवार को आयोजित बैठक में विश्वविद्यालय को पूर्ण रूप से प्लास्टिक फ्री बनाने की घोषणा की। इस दौरान पोस्टर जारी कर शिक्षकों, निदेशकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं से अभियान में सहयोग करने की अपील की गई।
कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि कैंपस और कैंटीन में प्लास्टिक या पॉलीथिन का उपयोग पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। निगरानी के लिए एक विशेष टीम भी गठित की गई है, जो समय-समय पर अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंपेगी। कुलपति ने कहा कि प्लास्टिक खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग और परिवहन में उपयोगी जरूर है, लेकिन इसका अत्यधिक प्रयोग पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गया है। उन्होंने बताया कि देश हर वर्ष करीब 9.46 मिलियन मैट्रिक टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न करता है। बैठक में प्रो. आरएस सेंगर ने माइक्रोप्लास्टिक के दुष्प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि माइक्रोप्लास्टिक मानव शरीर के विभिन्न अंगों में पाए जा रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने निर्णय लिया कि शिक्षक, कर्मचारी और छात्र गांवों में जाकर किसानों और ग्रामीणों को भी प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगे।
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मोदीपुरम। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को प्लास्टिक मुक्त शिक्षण संस्थान बनाने की दिशा में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बुधवार को आयोजित बैठक में विश्वविद्यालय को पूर्ण रूप से प्लास्टिक फ्री बनाने की घोषणा की। इस दौरान पोस्टर जारी कर शिक्षकों, निदेशकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं से अभियान में सहयोग करने की अपील की गई।
कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि कैंपस और कैंटीन में प्लास्टिक या पॉलीथिन का उपयोग पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। निगरानी के लिए एक विशेष टीम भी गठित की गई है, जो समय-समय पर अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंपेगी। कुलपति ने कहा कि प्लास्टिक खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग और परिवहन में उपयोगी जरूर है, लेकिन इसका अत्यधिक प्रयोग पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गया है। उन्होंने बताया कि देश हर वर्ष करीब 9.46 मिलियन मैट्रिक टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न करता है। बैठक में प्रो. आरएस सेंगर ने माइक्रोप्लास्टिक के दुष्प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि माइक्रोप्लास्टिक मानव शरीर के विभिन्न अंगों में पाए जा रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने निर्णय लिया कि शिक्षक, कर्मचारी और छात्र गांवों में जाकर किसानों और ग्रामीणों को भी प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगे।
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