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सीसीएसयू का बड़ा फैसला: 2026-27 से प्राइवेट यूजी-पीजी कोर्स बंद, एआई से होगी कॉपियों की जांच
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Wed, 18 Mar 2026 10:53 PM IST
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सार
सीसीएसयू ने सत्र 2026-27 से प्राइवेट यूजी-पीजी कोर्स बंद करने का फैसला लिया है। 6 लाख कॉपियों का मूल्यांकन एआई से किया जाएगा।
CCSU, सीसीएसयू
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) ने सत्र 2026-27 से यूजी-पीजी प्राइवेट मोड में कराने को नए पंजीकरण पूरी तरह बंद करने का फैसला लिया है। विश्वविद्यालय अब केवल पहले से पंजीकृत छात्र-छात्राओं (द्वितीय एवं अंतिम वर्ष, एक्स/बैक) की डिग्री पूरी कराएगा। प्रथम वर्ष में नए सत्र से कोई पंजीकरण नहीं होगा। यह फैसला बुधवार को कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला की अध्यक्षता में हुई विद्वत परिषद की बैठक में लिया गया।
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एनईपी-2020 लागू होने के बाद प्राइवेट पाठ्यक्रमों को बंद करने का प्रावधान था, लेकिन ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के हित में विवि पिछले कुछ वर्षों से पंजीकरण जारी रखे हुए था। हाल ही में सेल्फ फाइनेंस कॉलेज फेडरेशन ने प्राइवेट की वैधता को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था, हालांकि अभी कोई फैसला नहीं आया।
विवि ने अब विवादों पर विराम लगाते हुए आगामी सत्र से प्राइवेट बंद करने का स्पष्ट निर्णय लिया। प्राइवेट के स्थान पर विश्वविद्यालय छात्रों को ओपन डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) और ऑनलाइन मोड में घर बैठे या नौकरी करते हुए वैध यूजी-पीजी डिग्री हासिल करने का विकल्प देगा।
इसके लिए विवि ने नए पाठ्यक्रमों को मंजूरी दे दी है। विश्वविद्यालय आधिकारिक घोषणा कार्यपरिषद की बैठक के बाद कर सकता है। इस फैसले से छात्र संगठनों का विरोध संभव है, क्योंकि लाखों ग्रामीण छात्र प्राइवेट मोड पर निर्भर हैं।
विवि ने अब विवादों पर विराम लगाते हुए आगामी सत्र से प्राइवेट बंद करने का स्पष्ट निर्णय लिया। प्राइवेट के स्थान पर विश्वविद्यालय छात्रों को ओपन डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) और ऑनलाइन मोड में घर बैठे या नौकरी करते हुए वैध यूजी-पीजी डिग्री हासिल करने का विकल्प देगा।
इसके लिए विवि ने नए पाठ्यक्रमों को मंजूरी दे दी है। विश्वविद्यालय आधिकारिक घोषणा कार्यपरिषद की बैठक के बाद कर सकता है। इस फैसले से छात्र संगठनों का विरोध संभव है, क्योंकि लाखों ग्रामीण छात्र प्राइवेट मोड पर निर्भर हैं।
एआई से मूल्यांकन का ऐतिहासिक प्रयोग
विवि ने एक और अहम कदम उठाते हुए यूजी-पीजी प्राइवेट परीक्षाओं (बीए, बीकॉम, एमए, एमकॉम) के साथ एलएलएम की छह लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से कराने का फैसला किया है। यह पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होगा और प्रदेश का पहला ऐसा राज्य विश्वविद्यालय होगा जहां इतनी बड़ी संख्या में कॉपियां पूरी तरह एआई से चेक होंगी। डीएसडब्ल्यू प्रो. भूपेंद्र सिंह को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विवि नियम तय करेगा और एआई के माध्यम से निष्पक्ष, तेज मूल्यांकन सुनिश्चित करेगा। यह फैसला डिजिटल शिक्षा और तकनीकी नवाचार की दिशा में सीसीएसयू के प्रयासों को मजबूत करेगा, जबकि प्राइवेट मोड की समाप्ति से नियमित और ओडीएल मोड पर फोकस बढ़ेगा।
विवि ने एक और अहम कदम उठाते हुए यूजी-पीजी प्राइवेट परीक्षाओं (बीए, बीकॉम, एमए, एमकॉम) के साथ एलएलएम की छह लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से कराने का फैसला किया है। यह पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होगा और प्रदेश का पहला ऐसा राज्य विश्वविद्यालय होगा जहां इतनी बड़ी संख्या में कॉपियां पूरी तरह एआई से चेक होंगी। डीएसडब्ल्यू प्रो. भूपेंद्र सिंह को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विवि नियम तय करेगा और एआई के माध्यम से निष्पक्ष, तेज मूल्यांकन सुनिश्चित करेगा। यह फैसला डिजिटल शिक्षा और तकनीकी नवाचार की दिशा में सीसीएसयू के प्रयासों को मजबूत करेगा, जबकि प्राइवेट मोड की समाप्ति से नियमित और ओडीएल मोड पर फोकस बढ़ेगा।