Meerut: दवा विक्रेताओं का बंद का एलान, दुकानदार असमंजस में, मरीजों को हुई दिक्कत तो कार्रवाई तय
ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में दवा विक्रेताओं ने देशव्यापी बंद का एलान किया है। हालांकि कई संगठनों ने बंदी से असहमति जताई है, जिससे मेरठ में दवा व्यापारी असमंजस में हैं कि दुकानें खोलें या बंद रखें।
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ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) ने बुधवार को देशव्यापी एक दिवसीय बंद की घोषणा की है। हालांकि इस फैसले को लेकर दवा व्यापारियों में मतभेद हो गए हैं। कई एसोसिएशनों ने इस बंदी पर अहसमति जताई है। ऐसे में दवा व्यापारी असमंजस में है।
होलसेलर एंड रिटेलर केमिस्ट एसोसिएशन अध्यक्ष इंद्रपाल सिंह ने कहा कि ऑनलाइन फार्मेसी की अनियंत्रित कार्यप्रणाली, अवैध ई-फार्मेसी संचालन और बड़ी कंपनियों द्वारा दिए जा रहे भारी डिस्काउंट से छोटे दवा विक्रेताओं का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। बंद में देशभर के 12.40 लाख से अधिक केमिस्ट एवं दवा वितरक इस आंदोलन में भाग लेंगे।
बिना सत्यापन दवाओं की बिक्री का आरोप
मेरठ संगठन होलसेलर एंड रिटेलर केमिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री घनश्याम मित्तल ने कहा कि इस क्षेत्र से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग चार से पांच करोड़ लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है।
मेरठ संगठन के कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने आरोप लगाया कि ई-फार्मेसी प्लेट फॉर्म्स नियमों की कमजोरियों का फायदा उठाकर बिना सत्यापन के दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। संगठन के अनुसार एक ही प्रिस्क्रिप्शन का बार-बार उपयोग, फर्जी या एआई आधारित प्रिस्क्रिप्शन, एंटीबायोटिक्स एवं नशीली दवाओं की अनियंत्रित उपलब्धता जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन रही है।
मेरठ संगठन के अध्यक्ष इंद्रपाल ने कहा कि बड़े कॉर्पोरेट समूह डीप डिस्काउंट से बाजार में प्रतिस्पर्धा पैदा कर रहे हैं। छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों के केमिस्टों को बाजार से बाहर करने की कोशिश है। इससे दवा वितरण व्यवस्था कुछ बड़ी कंपनियों के नियंत्रण में जा सकती है।
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-कोविड काल में जारी अधिसूचना जीएसआर 220 ई को तत्काल वापस लिया जाए।
-ई-फार्मेसी से संबंधित अधिसूचना जीएसआर 817 ई को भी निरस्त किया जाए।
-अवैध ई-फार्मेसी पर तत्काल रोक लगाई जाए
-प्रीडेटरी प्राइसिंग के खिलाफ सख्त नीति बनाने के साथ ही छोटे केमिस्ट्स की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
पहले ऑनलाइन कंपनियों को दवा सप्लाई बंद करें : गोपाल अग्रवाल
मेरठ। रिटेल केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (आरसीडीए) ने प्रस्तावित बंदी का विरोध करते हुए व्यापारियों से दुकानें खुली रखने की अपील की है। मंगलवार को एसोसिएशन पदाधिकारियों ने खैरनगर बाजार में जनसंपर्क अभियान चलाया और बाद में कुंज बिहारी मार्केट में बैठक आयोजित की।
प्रदेश अध्यक्ष गोपाल अग्रवाल ने कहा कि बंद का आह्वान करने वाली संस्था एआईओसीडी के अधिकांश पदाधिकारी स्वयं दवा कंपनियों के डिपो संचालित करते हैं और उनके डिपो खुले रहेंगे। जिन ऑनलाइन दवा कंपनियों का विरोध किया जा रहा है उन्हें दवाइयों की आपूर्ति भी इन्हीं डिपो से होती है। यदि विरोध करना है तो पहले ऑनलाइन कंपनियों को दवा सप्लाई बंद करनी चाहिए।
जिलाध्यक्ष अतुल मोहन गुप्ता ने आरोप लगाया कि कई डिपो नर्सिंग होम और डॉक्टरों के क्लीनिकों को बाजार से कम दरों पर दवाइयां उपलब्ध करा रहे है, जिससे छोटे और मध्यम दवा विक्रेताओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है। महामंत्री अरुण शर्मा ने कहा कि बंदी तर्कहीन और अव्यवहारिक है। बैठक में अध्यक्ष रविंद्र दुग्गल, कोषाध्यक्ष राम अवतार तोमर सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
मरीजों को हुई दिक्कत तो कार्रवाई तय
औषधि अनुज्ञापन एवं नियंत्रण प्राधिकारी शशि मोहन गुप्ता ने कहा कि दवा व्यापार आवश्यक वस्तु अधिनियम में आता है। हड़ताल से औषधि आपूर्ति रुकेगी और लोगों को दिक्कत हो सकती है। दवा की दुकानें नियमित रूप से चलनी चाहिए। चेतावनी दी गई कि अगर मरीजों को दिक्कत हुई तो दुकानदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। संयुक्त व्यापार संघ के दोनों गुटों ने दवा व्यापारियों के समर्थन किया। अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने कहा दवा व्यापारी अपने व्यापार को बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। इसमें गुटबाजी, मतभेद भुलाकर सबको एकजुट होना चाहिए। अध्यक्ष अजय गुप्ता ने कहा कि हम दवा व्यापारियों के साथ हैं।