मंदी की मार, छोटे व्यापारियों को कर्ज से इनकार, उपभोक्ताओं पर लगाए जा रहे कई चार्ज
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आर्थिक मंदी की मार और बैंकों की बढ़ती मोनोपॉली के चलते छोटे व्यापारी लोन के लिए बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। बिजनेस लोन के नाम पर कोलेट्रल (गारंटी के लिए मकान, दुकान आदि के दस्तावेज) दस्तावेज मांगे जाते हैं। व्यापार संघों के अनुसार, शीर्ष बैंक अब छोटे व्यापारियों को लोन नहीं दे रहे हैं। लोन को लेकर बैंक बड़े औद्योगिक घरानों और विश्वसनीय खाताधारकों तक ही सीमित हो गए हैं।
अंदरूनी और बाहरी वजह डाल रही प्रभाव
वित्तीय वर्ष 2019 की शुरुआत से ही जीएसटी के बाद व्यापारी की सेल लगातार प्रभावित हो रही है। छोटे व्यापारी अगर किसी माह अपनी किश्त नहीं दे पाते तो उन्हें तुरंत डिफाल्टर सूची में डाल दिया जाता है। हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक अतिरिक्त चार्ज लगाया जाता है।
लोन के लिए परेशान हैं व्यापारी
कंकरखेड़ा रामनगर निवासी देवेंद्र कुमार ने बताया कि सर्विस संबंधी उनकी प्रोपराइटर फर्म 2017 में रजिस्टर्ड हुई थी। फर्म को 2019 से पैसा आना शुरू हो गया। हालांकि एसबीआई और पीएनबी ने बिजनेस लोन देने से इंकार कर दिया है।
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एसबीआई बैंक मैनेजर कंकरखेड़ा ने कहा कि बैंक उन्हें लोेन कोलेट्रल के आधार पर देगा। जिसमें संपत्ति एमडीए अप्रूव्ड क्षेत्र में होनी चाहिए। उधर, कंकरखेड़ा पंजाब नेशनल बैंक में लोन विभाग के अधिकारी ने फाइल देखकर सीधा इंकार कर दिया। वहीं, इसी क्रम में मेरठ के मोहित चौहान निवासी कासमपुर, शैलेंद्र कुमार निवासी श्रद्धापुरी आदि लोगों ने बिजनेस लोन के भी अप्लाई किया, लेकिन उन्हें लोन उपलब्ध नहीं हुआ।
कारपोरेट को फायदा पहुंचा रहे बैंक
बैंड बड़े उद्योगपति, कारपोरेट घरानों के लिए कार्य कर है। आर्थिक मंदी एक सोची समझी साजिश के तहत तैयार की गई रणनीति है। छोटे व्यापारियों का उत्पीड़न चरम पर शुरू हो गया है। कैश ट्रांजेक्शन चार्ज और अन्य चार्ज बैंक वसूल रहे है। ओवरड्राफ्ट आदि में समस्या सामने आ रही है। - लोकेश अग्रवाल, प्रांतीय वरिष्ठ महामंत्री, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल।
बैंक नहीं दे रहे सुविधा
व्यापारी लोन के लिए बैंकों के पास जा रहे है लेकिन बैंक द्वारा उन्हें लोन नहीं दिया जा रहा है। इसके पीछे बैंक की पॉलिसी है। व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए मुख्य रुप से बैंक लोन की आवश्यकता होती है। - नवीन गुप्ता, अध्यक्ष, संयुक्त व्यापार संघ।
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लोन को लेकर नहीं कोई परेशानी
बैंक आगे आकर सक्रिय रुप से लोन उपलब्ध करा रहे हैं। व्यापारी बैंक की शर्त पूरी करता है तो उसे लोन उपलब्ध कराया जाता है। अगर कोई शिकायत आएगी तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -संजय कुमार, लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर।
शेयर मार्केट में गिरावट से निवेशकों का मोहभंग
शेयर मार्केट में लगातार गिरावट से निवेश और औद्योगिक उत्पादन घट रह है। ऐसे में नुकसान के डर से शहर के छोटे बड़े सभी निवेशकों का शेयर मार्केट से मोेहभंग हो गया है। शेयर एवं म्यूचुअल फंड विशेषज्ञों के अनुसार यह मंदी की आहट है। जीडीपी भी गिर गई है।
बैंक व्यापारियों को फाइनेंस करने से पीछे हट रहे हैं। मेरठ में करीब 50 हजार लोग प्रतिदिन शेयर ट्रेडिंग करते हैं। हालांकि लाखों लोग बैंक या अन्य वित्तीय संगठन के माध्यम से म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। फिलहाल लोग सोने में निवेश को कम जोखिम वाला सौदा मान रहे हैं।
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ब्लैक मनी रोटेशन से बाहर
म्यूचुअल फंड विशेषज्ञ मुकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि यूएस-चीन ट्रेड वार के कारण खरीद और बिक्री की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। ब्लैक मनी का प्रयोग अब रोटेशन से बाहर हो गया है। ऐसे में शेयर मार्केट क्लीन है। इसका प्रभाव कुछ समय के लिए है। हालांकि आगामी वित्तीय वर्ष में यह सामान्य हो जाएगा।
सूक्ष्म व लघु उद्योग को दें संजीवनी
आर्थिक विशेषज्ञ यूसी अग्रवाल के मुताबिक सरकार के साथ आगे आकर बैंक एवं वित्तीय संगठनों को लघु एवं सूक्ष्म लघु उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए। कुछ समय के लिए ट्रेड बैरियर लगाकर हम अपने लघु उद्योगों को जीवंत कर सकते हैं। साथ ही सरकार को पॉलिसी में परिवर्तन करना होगा।