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पुरुषार्थ करने से ही बनते हैं महान : विमर्श सागर
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- महावीर जयंती भवन में हुआ प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। शारदा रोड स्थित महावीर जयंती भवन में हुए प्रवचन कार्यक्रम में आचार्य विमर्श सागर ने कहा कि लोक में तीन ही सच्चे कहे गए हैं। सच्चे देव, सच्ची जिनवाणी और सच्चे निर्गुण गुरु। उन्होंने कहा कि हम अपने पुरुषार्थ से ही महान बनते हैं। तीर्थंकर चक्रवर्ती देव सभी जिनेंद्र प्रभु के चरणों में बैठकर ही बनते हैं। गुरु, देव और शास्त्र की भक्ति से हम अपने विकारी कर्मो का क्षय करके जो चाहे बन सकते हैं।
आचार्य ने कहा कि हमें अपने पर गर्व होना चाहिए कि हमें पूर्व पुण्य से अच्छा कुल और धर्म गुरुओं का सानिध्य मिल रहा है। जीवन है पानी की बूंद कब मिट जाए रे...गीत गाकर उन्होंने संसार की नश्वरता का दिग्दर्शन कराया। महाराज ने बच्चों ने कहा कि धोती दुपट्टा साधारण पोशाक नहीं है। इसे पहनकर हम तीन लोक के नाथ की पूजा अर्चना और अभिषेक करते हैं। अपने नाथ को प्रतिमा के माध्यम से स्पर्श करते हैं। जिनेंद्र प्रभु के चरणों में बैठकर कितने भी कठोर कर्म हो सब चूर चूर हो जाते हैं। जैन समाज के अध्यक्ष सुरेश जैन ऋतुराज ने कहा कि 28 मार्च की रात्रि में जैन मिलन का महामासिक मिलन होगा। 30 मार्च को महाराज के सानिध्य में महावीर जयंती भवन में महावीर जयंती मनाई जाएगी।
संस्कार शिविर में पूजन विधि सिखाई
- महावीर जयंती भवन में आयोजित बच्चों के संस्कार शिविर का संयोजन सौरभ जैन ने किया। देवेंद्र जैन, विनोद और अतुल ने प्रक्षाल क्रियाएं कराईं। गौरव जैन, राहुल जैन, वैभव जैन, सम्यक जैन ने पूजन विधि संपन्न कराई। प्रथम अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य अतुल जैन, अर्णव जैन, अर्जव जैन को मिला। लकी ड्रा में विजेता रहे आदविक जैन को पुरस्कार सरिता जैन ने दिया।
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मेरठ। शारदा रोड स्थित महावीर जयंती भवन में हुए प्रवचन कार्यक्रम में आचार्य विमर्श सागर ने कहा कि लोक में तीन ही सच्चे कहे गए हैं। सच्चे देव, सच्ची जिनवाणी और सच्चे निर्गुण गुरु। उन्होंने कहा कि हम अपने पुरुषार्थ से ही महान बनते हैं। तीर्थंकर चक्रवर्ती देव सभी जिनेंद्र प्रभु के चरणों में बैठकर ही बनते हैं। गुरु, देव और शास्त्र की भक्ति से हम अपने विकारी कर्मो का क्षय करके जो चाहे बन सकते हैं।
आचार्य ने कहा कि हमें अपने पर गर्व होना चाहिए कि हमें पूर्व पुण्य से अच्छा कुल और धर्म गुरुओं का सानिध्य मिल रहा है। जीवन है पानी की बूंद कब मिट जाए रे...गीत गाकर उन्होंने संसार की नश्वरता का दिग्दर्शन कराया। महाराज ने बच्चों ने कहा कि धोती दुपट्टा साधारण पोशाक नहीं है। इसे पहनकर हम तीन लोक के नाथ की पूजा अर्चना और अभिषेक करते हैं। अपने नाथ को प्रतिमा के माध्यम से स्पर्श करते हैं। जिनेंद्र प्रभु के चरणों में बैठकर कितने भी कठोर कर्म हो सब चूर चूर हो जाते हैं। जैन समाज के अध्यक्ष सुरेश जैन ऋतुराज ने कहा कि 28 मार्च की रात्रि में जैन मिलन का महामासिक मिलन होगा। 30 मार्च को महाराज के सानिध्य में महावीर जयंती भवन में महावीर जयंती मनाई जाएगी।
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संस्कार शिविर में पूजन विधि सिखाई
- महावीर जयंती भवन में आयोजित बच्चों के संस्कार शिविर का संयोजन सौरभ जैन ने किया। देवेंद्र जैन, विनोद और अतुल ने प्रक्षाल क्रियाएं कराईं। गौरव जैन, राहुल जैन, वैभव जैन, सम्यक जैन ने पूजन विधि संपन्न कराई। प्रथम अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य अतुल जैन, अर्णव जैन, अर्जव जैन को मिला। लकी ड्रा में विजेता रहे आदविक जैन को पुरस्कार सरिता जैन ने दिया।