UP: 'मुझे मीठे का कोई शौक नहीं', टिकैत के हलवाई-ततैया वाले बयान पर जयंत चौधरी का पलटवार
रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने नरेश टिकट के बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि 'मुझे मीठे का कोई शौक नहीं' है। वहीं इस बयान से यूपी की राजनीति में हलचल मच गई है।
विस्तार
राष्ट्रीय लोक दल यानी रालोद के प्रमुख जयंत चौधरी ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, 'जो हलवाई और ततैये का किस्सा सुना रहे हैं, उन्हें मैं बता दूं कि मुझे मीठे का कोई शौक नहीं।' इस पोस्ट के सामने आते ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और राजनीतिक गलियारों में इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं।
बागपत में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने केंद्रीय राज्यमंत्री चौधरी जयंत सिंह पर कटाक्ष करते हुए हलवाई और ततैया का उदाहरण दिया था।
उन्होंने कहा था कि चौधरी जयंत सिंह सरकार में हैं, इसलिए उन्हें सरकार के पक्ष में ही बोलना पड़ता है। टिकैत ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे हलवाई की दुकान पर बैठा ततैया हलवाई को नहीं काटता, बल्कि मिठाई पर बैठा रहता है और हलवाई उसे हटाता रहता है, उसी तरह जयंत सिंह भी सरकार के खिलाफ कुछ नहीं कह सकते।
नरेश टिकैत का यह बयान वायरल होने के बाद जयंत सिंह ने फेसबुक और एक्स (ट्विटर) पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि हलवाई और ततैया का किस्सा सुनाने वालों को बता दूं कि उन्हें मीठे का शौक नहीं है।
जयंत सिंह के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच बहस शुरू हो गई। एक ओर जहां टिकैत समर्थक उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, वहीं जयंत सिंह के समर्थक इसे करारा जवाब बता रहे हैं।
पोस्ट के सियासी मायने तलाशे जा रहे
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जयंत चौधरी का यह बयान पलटवार है। 'हलवाई और ततैया' की कहानी को आमतौर पर सत्ता, लाभ और उसके आसपास मंडराने वाले लोगों के संदर्भ में देखा जाता है। ऐसे में उनके 'मीठ का शौक नहीं' वाले बयान को सत्ता या किसी राजनीतिक लाभ की चाहत से दूरी बनाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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गठबंधन और चुनावी रणनीति से जोड़कर भी देख रहे लोग
जयंत चौधरी के इस बयान को आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 और वर्तमान राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान उनकी राजनीतिक स्वतंत्रता और सिद्धांत आधारित राजनीति का संदेश देने की कोशिश भी हो सकता है।
जो हलवाई और ततैया का किस्सा सुना रहे हैं
— Jayant Singh (@jayantrld) February 18, 2026
उन्हें बता दूँ,
मुझे मीठे का कोई शौक नहीं!
समर्थकों और विरोधियों के बीच चर्चा तेज
इस पोस्ट के बाद जहां उनके समर्थक इसे मजबूत और स्पष्ट संदेश बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल और राजनीतिक पर्यवेक्षक इसके पीछे छिपे संकेतों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल जयंत चौधरी के इस बयान ने यूपी की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।