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Meerut: कपसाड़ में हत्या और अपहरण, नेताओं की गांव में एंट्री पर रोक, पढ़ें मामले में अब तक क्या हुआ?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: डिंपल सिरोही Updated Sat, 10 Jan 2026 11:33 AM IST
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सार

मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित महिला सुनीता की हत्या और बेटी के अपहरण से तनाव। गांव छावनी में तब्दील, नेताओं की एंट्री पर रोक, परिजनों की चेतावनी और राजनीतिक हलचल का पूरा अपडेट।

Kapsad Murder- Abduction Case: Village Turned into Police Cantonment, Political Leaders Stopped, Girl Still M
कपसाड़ में दलित महिला की हत्या - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ के सरधना थानाक्षेत्र के कपसाड़ गांव में अनुसूचित जाति की महिला सुनीता की निर्मम हत्या और उसकी बेटी रूबी के अपहरण की घटना ने उत्तर प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है। इस जघन्य अपराध ने सूबे की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके चलते सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता आमने-सामने आ गए हैं।

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घटना की गंभीरता को देखते हुए गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया है, जहां भारी पुलिस बल तैनात है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और सामाजिक संगठनों ने आवाज उठाई है, जबकि पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।
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यह भी पढ़ें: UP: जिस आंगन में कन्यादान होना था, वहीं टूटकर बिखरे सपने, तय हो चुका था रुबी का रिश्ता; जानें कब होनी थी शादी?

तनावपूर्ण माहौल और पुलिस की कड़ी घेराबंदी
शुक्रवार को कपसाड़ गांव में तनाव का माहौल चरम पर था। मां सुनीता की हत्या और बेटी रूबी के अपहरण के बाद से ही परिवार सदमे और गम में डूबा हुआ था। वहीं, राजनीतिक दलों के नेताओं के जमावड़े को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुबह से ही गांव की घेराबंदी कर दी थी। गांव की सीमा से लगभग ढाई किलोमीटर पहले ही बैरिकेडिंग लगा दी गई थी। एसएसपी, एसपी देहात, एसपी ट्रैफिक, चार सीओ, 20 इंस्पेक्टर, 150 दरोगा और 500 से अधिक पुलिसकर्मी, साथ ही आरआरएफ की टीम भी तैनात रही। इस अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और नेताओं के जमावड़े से उत्पन्न होने वाली स्थिति को नियंत्रित करना था।

 

Kapsad Murder- Abduction Case: Village Turned into Police Cantonment, Political Leaders Stopped, Girl Still M
कपसाड़ मामला - फोटो : अमर उजाला

विपक्ष का धरना और सत्ता पर आरोप-प्रत्यारोप
सुबह 7:30 बजे से ही गांव के बॉर्डर पर तनाव साफ दिखाई दे रहा था। पुलिस ने गांव को पूरी तरह से सील कर दिया था। परिजनों ने मांग की थी कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक सुनीता का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। इस बीच, सपा विधायक अतुल प्रधान, भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष चरण सिंह और अन्य कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कांग्रेस नेता भी पीड़ित परिवार से मिलने गांव की ओर बढ़े। हालांकि, पुलिस ने उन्हें सीमा पर ही रोक लिया।

इसके विरोध में विधायक सहित सभी नेता गांव के बाहर सड़क पर धरने पर बैठ गए। सपा विधायक ने आरोप लगाया कि यदि यह मामला दूसरे समुदाय का होता तो अब तक बुलडोजर कार्रवाई हो चुकी होती। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाना चाहती है और इसके लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए उनकी लड़ाई लड़ते रहेंगे। करीब डेढ़ घंटे तक चले हंगामे और नारेबाजी के बाद, मृतका सुनीता के पति सतेंद्र और बेटे भी धरना स्थल पर पहुंचे, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। आखिरकार, पुलिस को नेताओं को गांव में जाने की अनुमति देनी पड़ी।

महिलाओं का रोष और पुलिस पर लापरवाही के आरोप
इस बीच, कपसाड़ गांव में महिलाओं का गुस्सा भी देखने को मिला। समाजसेवी नेहा गौड़ और मृतका सुनीता के घर की महिलाओं ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन्हें चूड़ियां दिखाईं।

महिला पुलिसकर्मियों ने मुश्किल से उन्हें समझाकर शांत कराया। गांव में तनाव के कारण ज्यादातर गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। शाम तक सड़कें सुनसान रहीं और ग्रामीण छतों से ही बाहर झांकते नजर आए। बच्चों को घरों में ही बंद रखा गया। सीमाओं के सील होने के कारण नौकरीपेशा लोग भी गांव से बाहर नहीं जा सके।

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मेरठ के सरधना में मां की हत्या व बेटी का अपहरण - फोटो : अमर उजाला

परिजनों की चेतावनी और बेटे का भावुक बयान
गांव में तनाव अभी भी बरकरार है और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है। पुलिस की टीमें फरार आरोपियों और लापता युवती की तलाश में जुटी हुई हैं। परिजनों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर उनकी बेटी वापस नहीं लौटती है, तो वे आंदोलन फिर से शुरू करेंगे। इस बीच, सुनीता के छोटे बेटे शिवम ने एसपी देहात अभिजीत कुमार के सामने रोते हुए अपनी बहन की शीघ्र बरामदगी की मांग की।

उसने कहा कि जब तक उसकी बहन सुरक्षित वापस नहीं आ जाती, तब तक वे मां के शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। एसपी देहात ने जल्द बरामदगी का आश्वासन दिया। इसी बातचीत के दौरान शिवम ने आक्रोशित होकर सवाल किया कि यदि तय समय में बहन की बरामदगी नहीं हुई तो क्या जिम्मेदार अधिकारी अपनी वर्दी उतार देंगे। इस पर एसपी देहात और अन्य पुलिस अधिकारी नाराज हो गए और उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस मामले में पूरी गंभीरता से कार्रवाई कर रही है।

राष्ट्रीय स्तर पर गूंजी घटना, नेताओं का लगा तांता
इस घटना ने लखनऊ से दिल्ली तक हलचल मचा दी। बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। इसके बाद, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का गांव में तांता लग गया। सपा विधायक अतुल प्रधान और गुलाम मोहम्मद ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की।

सपा जिलाध्यक्ष कर्मवीर गुमी, पूर्व विधायक योगेश वर्मा, पूर्व विधायक विनोद हरित, भीम आर्मी जिलाध्यक्ष बिजेंद्र सूद, बाबर चौहान, आसपा जिलाध्यक्ष चरण सिंह भी पहुंचे। वहीं, भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा, रालोद के जिला पंचायत सदस्य प्रताप लोईया ने भी पीड़ित परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त की।

सपा विधायक अतुल प्रधान ने निजी कोष से दो लाख रुपये की आर्थिक मदद दी, जबकि अखिलेश यादव ने फोन पर बात कर तीन लाख रुपये देने की घोषणा की। सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी वीडियो कॉल के माध्यम से पीड़ित परिवार से वार्ता की।

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कपसाड़ मामला - फोटो : अमर उजाला

टूटे सपने और मां का बलिदान
कपसाड़ गांव की इस हृदय विदारक घटना ने सिर्फ एक महिला की जान नहीं ली, बल्कि एक पिता के अरमानों और एक मां की ममता को भी तार-तार कर दिया। मृतका सुनीता के घर का माहौल गमगीन था। परिवार की आंखों में हत्यारों के लिए आक्रोश था, तो वहीं बेटी रूबी के लिए बेबसी और गहरा गम साफ झलक रहा था।

सुनीता और सतेंद्र की दुनिया उनके तीन बेटों नरसी, मनदीप, शिवम और इकलौती बेटी रूबी के इर्द-गिर्द घूमती थी। रूबी का रिश्ता तय हो चुका था और अप्रैल में उसकी शादी होनी थी। मां सुनीता बेटी के कन्यादान के सपने संजो रही थी, लेकिन शायद उसे अंदाजा नहीं था कि दबंग उसे जबरन उठाकर ले जाएंगे।

बृहस्पतिवार का वह काला दिन परिवार कभी नहीं भूलेगा, जब हमलावरों ने रूबी पर हाथ डाला तो मां सुनीता अपनी जान की परवाह किए बिना ढाल बनकर खड़ी हो गई। उसने अपनी जान देकर भी बेटी को बचाने की कोशिश की। अस्पताल में दो घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद सुनीता ने दम तोड़ दिया।

उसकी मौत के साथ ही बेटी की शादी के सारे अरमान हमेशा के लिए दफन हो गए। शुक्रवार को जब सुनीता का शव घर के आंगन में रखा था, तो तीनों भाई नरसी, मनदीप और शिवम फफक-फफक कर रो पड़े। उनकी सिसकियां कलेजा चीर रही थीं। वे बार-बार कह रहे थे कि उनकी लाड़ली बहन अपनी मां के अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाएगी।

राजनीतिक बयानबाजी और कानून-व्यवस्था पर सवाल
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना को भाजपा सरकार की कानून-व्यवस्था की विफलता करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराध और भ्रष्टाचार चरम पर है और महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने भाजपा सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' के वादे को खोखला बताया। उन्होंने कहा कि मेरठ में मां पर हमला और बेटी का अपहरण बेहद गंभीर मामला है और उत्तर प्रदेश महिला अपराध में सबसे ऊपर पहुंच गया है।

वहीं, पूर्व विधायक संगीत सोम ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की और कहा कि जब तक दोषी गिरफ्तार नहीं होंगे, वे गांव नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने राजनीतिक दलों से इस मामले को जातिगत झगड़ा न बनाने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समय में गिरफ्तारी नहीं हुई तो बुलडोजर की कार्रवाई भी होगी। उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी सरकार में भी लूट, दुष्कर्म और हत्याएं होती थीं।

कांग्रेसियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात की और पुलिस द्वारा रोके जाने के प्रयासों का विरोध किया। कांग्रेस ने शनिवार को एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की घोषणा की है।

भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष बिजेंद्र सूद ने सलावा गांव की घटना का जिक्र करते हुए भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कपसाड़ की घटना को 24 घंटे बीत जाने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है और न ही उनके घरों पर बुलडोजर चला है, जबकि सलावा में त्वरित कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के उत्पीड़न के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

Kapsad Murder- Abduction Case: Village Turned into Police Cantonment, Political Leaders Stopped, Girl Still M
शवयात्रा में खूब भीड़ रही। - फोटो : अमर उजाला

प्रशासन की कार्रवाई और परिवार को मदद
जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री राहत कोष से पीड़ित परिवार को दस लाख रुपये का चेक दिया गया है और एक शस्त्र लाइसेंस दिलाया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रशासन पीड़ित परिवार की मदद के लिए खड़ा है और आरोपियों की गिरफ्तारी व युवती की बरामदगी के लिए पुलिस टीमें जुटी हुई हैं।

एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि आरोपी पारस और उसके परिवार की तलाश के लिए 10 टीमें काम कर रही हैं। आरोपियों के रिश्तेदारों से पूछताछ की जा रही है और कुछ करीबियों को हिरासत में लिया गया है। मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर ट्रेस किया जा रहा है और जल्द गिरफ्तारी का भरोसा दिलाया है। आरोपी के घर पर पुलिस की निगरानी बनी हुई है।

आजाद अधिकार सेना की राष्ट्रपति से गुहार
इस घटना के विरोध में आजाद अधिकार सेना ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है। यह ज्ञापन 10 जनवरी 2026 को जिलाधिकारी मेरठ के माध्यम से सौंपा जाएगा। संगठन इस घटना को राज्य में दलितों और महिलाओं की सुरक्षा की भयावह स्थिति का प्रतीक मान रहा है। ज्ञापन में उच्चस्तरीय जांच, दोषियों को कड़ी सजा, पीड़ित परिवार को मुआवजा व सुरक्षा और उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की जाएगी। संगठन के मेरठ मंडल अध्यक्ष मास्टर अब्दुल अजीज ने कहा कि राज्य में दलितों और महिलाओं का जीवन असुरक्षित हो गया है।

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