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किडनी कांड: एंबुलेंस चालक ने डाॅक्टर बन की थी विदेशी महिला की जांच, अल्फा अस्पताल पर भी सवाल, CMO ने लिखा पत्र

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 06 Apr 2026 03:22 PM IST
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सार

कानपुर किडनी रैकेट मामले में मेरठ कनेक्शन सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि मेरठ निवासी अंकित गिरोह के लिए गाड़ियां बुक करता था। वहीं सीएमओ ने अल्फा अस्पताल की भूमिका को लेकर कानपुर स्वास्थ्य विभाग और पुलिस से रिपोर्ट मांगी है।

Kidney Racket Probe: Meerut’s Ankit Booked Vehicles for Gang, Questions Raised on Alpha Hospital
कानपुर किडनी रैकेट का खुलासा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कानपुर में हुए किडनी कांड मामले में सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने सीएमओ कानपुर, मेरठ के एसपी क्राइम और एसओ मेडिकल थाना को पत्र लिखकर पूछा कि अल्फा अस्पताल की इस मामले में क्या भूमिका है...हमें बताएं। 

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दरअसल, इस मामले में किडनी के काले कारोबार के आरोपी डॉ. अफजाल, फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. अमित और डॉ. वैभव मुद्गल के तार अल्फा अस्पताल से जुड़े हुए बताए गए हैं।
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सीएमओ ने इस संबंध में मंगल पांडे नगर स्थित अल्फा अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा था। अल्फा अस्पताल प्रबंधन ने जवाब दिया था और लेकिन डॉ. अफजाल और डॉ. वैभव मुद्गल से जुड़े होने से इन्कार कर दिया था। डॉ. अमित इस अस्पताल को संचालित करते हैं लेकिन प्रबंधन का दावा है कि उनका डॉ. अफजाल और डॉ. वैभव से कोई जुड़ाव नहीं है।

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सीएमओ का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इस मामले में तभी कार्रवाई हो सकती है या तो अस्पताल पर कार्रवाई के लिए मेरठ पुलिस लिखकर दे या फिर कानपुर स्वास्थ्य विभाग या वहां की पुलिस यह बताए कि अल्फा अस्पताल पर कार्रवाई की जाए। अभी तक इनकी तरफ से ऐसा कुछ लिखित में नहीं आया है। 

लिहाजा अभी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। पिछले साल नवंबर माह में जब इस अस्पताल का लाइसेंस निलंबित किया था तब प्राथमिकी दर्ज हुई थी और अस्पताल में इलाज में लापरवाही का आरोप लगा था, इस आधार पर कार्रवाई की गई थी। पुलिस ने उस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी इसके बाद लाइसेंस बहाल किया गया था। अब भी अगर पुलिस या कानपुर सीएमओ की तरफ से कुछ लिखित में आएगा तो कार्रवाई की जाएगी।

गिरोह के लिए गाड़ियां बुक करता था मेरठ का अंकित
कानपुर पुलिस की पड़ताल में पता चला है कि गाजियाबाद के शातिर परवेज सैफी से भी आरोपियों के तार जुड़े हैं। वह आरोपियों को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए आने-जाने के लिए गाड़ियां उपलब्ध कराता था। परवेज ही आरोपियों को ट्रांसप्लांट के लिए 31 मार्च को आहूजा हॉस्पिटल लाया था।  

पुलिस के अनुसार परवेज सैफी गाजियाबाद से लूट और डकैती में जेल जा चुका है। वहीं, जांच में सामने आया कि मेरठ निवासी अंकित इस पूरे नेटवर्क के लिए गाड़ियां उपलब्ध कराता था। वह डॉ. रोहित, वैभव मुद्गल, डॉ. अफजल, डॉ. मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली और डॉ. अनुराग समेत अन्य सदस्यों के लिए अलग-अलग नामों से वाहन बुक करता था। इससे टीम की गतिविधियां गुप्त बनी रहती थीं। ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था। जांच में परवेज सैफी का नाम सामने आया है।  वह डॉ. रोहित की टीम को तीन बार मेरठ से कानपुर लेकर आया था।  

एंबुलेंस चालक ने डाॅक्टर बनकर की थी विदेशी महिला की जांच
आठवीं पास एंबुलेंस चालक शिवम ने खुद को डॉक्टर बताकर दक्षिण अफ्रीका की महिला मरीज की स्वास्थ्य जांच की थी। जांच करते समय की उसकी एक फोटो पुलिस को मिली है। यह फोटो शिवम के मोबाइल में थी। पुलिस इस मामले में आहूजा हॉस्पिटल के मालिक सुरजीत सिंह आहूजा और उसकी पत्नी प्रीति आहूजा, दलाल एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल और तीन अन्य हॉस्पिटल के संचालकों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।  
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