वेस्ट यूपी मौसम: तेज हवा से प्रदूषण में गिरावट, एक्यूआई 343 से घटकर 111 पर आया; निमोनिया के मरीज बढ़े
मेरठ में तेज हवा चलने से एक्यूआई 343 से घटकर 172 पर पहुंच गया। ब्रह्मपुरी में एक्यूआई 111 दर्ज हुआ, लेकिन अस्पतालों में निमोनिया के मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई।
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मेरठ में रात के समय तेज हवा चलने से प्रदूषण के स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 24 घंटे में 343 से घटकर 172 पर आ गया, जबकि सोमवार सुबह ब्रह्मपुरी क्षेत्र में एक्यूआई 111 दर्ज किया गया। हालांकि, प्रदूषण से कुछ राहत के बीच सांस संबंधी परेशानियां बनी हुई हैं। अस्पतालों में निमोनिया के मरीजों की संख्या बढ़ने की बात सामने आई है।
तेज हवा से मेरठ की हवा में सुधार
मोदीपुरम। रात में तेज हवा के झोंकों से मौसम में बदलाव आया है। हवा की गति बढ़ने से मेरठ समेत एनसीआर के कई शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक में गिरावट दर्ज की गई। मेरठ में एक्यूआई 24 घंटे के भीतर 343 से घटकर 172 पर पहुंच गया। सोमवार सुबह ब्रह्मपुरी क्षेत्र में एक्यूआई 111 दर्ज किया गया।
पिछले कुछ दिनों से हवा की गुणवत्ता खराब होने के कारण लोगों को प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा था। तेज हवा चलने से वातावरण में मौजूद प्रदूषक कणों के फैलाव में मदद मिली, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया। हालांकि, प्रदूषण का स्तर अलग-अलग इलाकों में अलग हो सकता है।
रविवार को जयभीमनगर में एक्यूआई 145, एमआईईटी कॉलेज में 172, पल्लवपुरम में 150 और गंगानगर में 178 दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के स्तर में अंतर भी सामने आता है।
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मौसम और हवा की गति से प्रभावित होगा प्रदूषण
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की मौसम वेधशाला में अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री और रात का न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही के अनुसार, हवा की गति बढ़ने से प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई है। उन्होंने आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव की संभावना जताते हुए फिलहाल प्रदूषण का स्तर कम रहने की बात कही।
मौसम में बदलाव, हवा की गति और दिशा वायु गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। हवा चलने से प्रदूषक कणों का स्थानीय स्तर पर जमाव कम हो सकता है। हालांकि, प्रदूषण का स्तर आगे कैसा रहेगा, यह मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
प्रदूषण से राहत, लेकिन सांस के मरीजों की परेशानी बरकरार
मेरठ में प्रदूषण के स्तर में गिरावट के बावजूद सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों की परेशानी बनी हुई है। खांसी, सांस लेते समय खरखराहट और निमोनिया के मामलों में बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है। अस्पतालों में निमोनिया के मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी होने की बात कही गई है।
जानकारी के अनुसार, महीने की शुरुआत में मेडिकल कॉलेज में रोजाना निमोनिया के 30 से 35 मरीज पहुंच रहे थे। अब यह संख्या बढ़कर प्रतिदिन 70 से 80 तक पहुंच गई है। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के अलावा निजी अस्पतालों तथा चिकित्सकों के क्लीनिकों में भी मरीजों की संख्या बढ़ने की बात कही गई है।
बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. अजीत चौधरी के अनुसार, निमोनिया का असर बच्चों और बुजुर्गों में अधिक देखा जा रहा है। प्रदूषण के स्तर में सुधार के बावजूद सांस संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।