सेंट्रल मार्केट विवाद: सेट बैक मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होगी महिलाओं की याचिका
मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में सेट बैक विवाद को लेकर सेक्टर-2 की आठ महिलाएं सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेंगी। महिलाओं का कहना है कि छोटे मकानों में सेट बैक छोड़ना खतरनाक हो सकता है।
विस्तार
मेरठ शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में सेक्टर-2 की महिलाओं की ओर से सोमवार को अदालत में याचिका दाखिल की जाएगी। क्षेत्र की आठ महिलाएं शनिवार को दिल्ली गई थीं। उन्होंने अधिवक्ता विवेक नारायण शर्मा से मिलकर पूरा मामला बताया।
महिलाओं ने अधिवक्ता को अपने पक्ष में आधार कार्ड, संपत्ति की रजिस्ट्री और बिजली के बिल जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंपे। रविवार को सार्वजनिक अवकाश के कारण धरनास्थल पर कुछ महिलाएं ही थोड़े समय के लिए बैठीं। इसी बीच, पूरे बाजार में दुकानदार खुद सेट बैक छोड़ने और अवैध निर्माण तोड़ने के लिए लगातार हथौड़े चलवा रहे हैं। पूर्व पार्षद एवं पार्षद पति संजीव पुंडीर के साथ महिलाएं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता से मिलीं।
उन्होंने अधिवक्ता को अपनी समस्याओं से अवगत कराया। व्यापारियों का कहना है कि सांसद अरुण गोविल की ओर से पूरी व्यवस्था की जा रही है। संजीव पुंडीर ने बताया कि लोकेश जैन, जगरोशनी, रिम्पी, प्रवेश रानी, यश देवी मनोचा, सुषमा, सुमन गोयल और प्रतिभा शर्मा याचिका दाखिल करेंगी। इसी याचिका के आधार पर अन्य अल्प और दुर्बल आय वर्ग के लोगों का पक्ष भी अदालत में रखा जाएगा।
यह भी पढ़ें: मेरठ अग्निकांड: पिता और पुत्री की मौत, 10 की हालत गंभीर, समय पर नहीं पहुंच सकी एंबुलेंस
याचिका के मुख्य बिंदु
इन महिलाओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में यह तथ्य रखा जाएगा कि छोटे मकानों में सेट बैक छोड़ने से उनके गिरने का गंभीर खतरा है। परिषद ने 1986 में कई मकान बनाकर दिए थे, जिनमें शुरू से सेट बैक का प्रावधान नहीं था। इसके अतिरिक्त, अल्प और दुर्बल आय वर्ग के मकानों में जीवन-यापन के लिए व्यापार करने का भी प्रावधान था। यह याचिका इन ऐतिहासिक तथ्यों को भी अदालत के सामने प्रस्तुत करेगी।
विभाग की कार्रवाई और समाधान
विभाग के अनुसार, 35 संपत्तियों के सेट बैक छोड़ने की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। वहीं, 90 संपत्तियों में अवैध निर्माणों में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया लगातार चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि सेट बैक छोड़ने में किसी को तकनीकी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, तो विभाग उसका समाधान कराएगा। विभाग इस मामले में लोगों की समस्याओं को सुनने के लिए भी तैयार है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आवास एवं विकास परिषद ने स्कीम नंबर -सात के तहत आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों पर अबतक 815 संपत्तियों पर नोटिस जारी किया है। पूरी स्कीम में 42 ऐसे अल्प और कमजोर आय वर्ग के लोगों भी मकान हैं, जिनमें सेट बैक का प्रावधान आवंटन के समय नहीं था। ऐसे में अब इन भवनों में सेट बैक छोड़ने की अनिवार्यता नहीं होगी।
आवास विकास विभाग के अफसरों के मुताबिक सेक्टर-एक से 13 तक स्कीम नंबर सात में कुल 860 आवासीय संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियां चिह्नित की गई थीं। इनमें से 815 संपत्तियों पर कार्रवाई चल रही है। इनमें से 710 पर नोटिस चस्पा किया जा चुका है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार इन दुकानदारों को दो सप्ताह का समय दिया गया है। यदि निर्धारित समय में निर्माण नहीं हटाया गया तो जिला प्रशासन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा और उसका खर्च भी दुकानदारों से ही वसूला जाएगा। बृहस्पतिवार को जब आवास विकास की टीम नोटिस चस्पा करने पहुंची थी तो महिलाओं ने कड़ा विरोध किया था।
महिलाओं ने न केवल नोटिस फाड़े थे बल्कि अधिकारियों को लौटने पर मजबूर भी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि सभी को नोटिस भेजा जाए। ऐसे में जिन भवनों पर नोटिस चस्पा नहीं हो सके हैं, उन्हें सोमवार से डाक के जरिए भेजा जाएगा।
उप आयुक्त आवास अनिल कुमार सिंह ने बताया कि स्कीम नंबर सात में 42 ऐसे मकान हैं, जिनमें सेट बैक छोड़ने का प्रावधान योजना के विकसित होने के दौरान नहीं किया गया। इनमें अधिकांश भवन कोने के हैं, जिनका फ्रंट बहुत कम है और चारों ओर से घिरे हैं।
