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Meerut: 14 साल में सबसे सर्द रही रात, इतने डिग्री पहुंचा पारा, कांप उठा शहर; कोहरे ने थामी वाहनों की रफ्तार

अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Fri, 09 Jan 2026 09:14 PM IST
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सार

पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर मैदानी क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। लगातार ठंड और शीतलहर के चलते लोग परेशान हैं। आने वाले दिनों में भी ठंड से राहत मिलने के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं। 

Meerut: The night was the coldest in 14 years, mercury reached so many degrees, the city shivered
बिजली बंबा बाईपास पर शुक्रवार को छाया कोहरा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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8 जनवरी की रात ने बीते 14 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। दिन ढलते ही ठंड ने ऐसा शिकंजा कसा कि लोग अलाव और रजाइयों में सिमटने को मजबूर हो गए। सांसों से धुआं सा निकलता रहा और सुबह हुई तो शहर कोहरे की चादर में लिपटा नजर आया। मौसम के तेवर बता रहे हैं कि फिलहाल राहत की कोई गुंजाइश नहीं है।
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इस सीजन की सबसे ठंडी रात बृहस्पतिवार को दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान 4.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जिससे ठिठुरन और गलन ने लोगों को बेहाल कर दिया। शुक्रवार सुबह घना कोहरा छाया रहा और दृश्यता बेहद कम हो गई। हाईवे पर वाहनों की रफ्तार थम सी गई, हालांकि करीब 10 बजे के बाद कोहरा धीरे-धीरे छंटना शुरू हुआ। 
 
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मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, दिन में धूप निकलने और रात में तापमान गिरने से वातावरण में नमी बढ़ गई, जिससे कोहरे की स्थिति बनी। दिन के समय धूप निकलने से अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया लेकिन ठंडी हवाओं के चलते ठिठुरन बनी रही। मैदानी इलाकों में शीतलहर और गलन का असर साफ दिखाई दे रहा है। लोग सुबह-शाम घरों से निकलने से बचते नजर आए।
 

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की मौसम वेधशाला के अनुसार, शुक्रवार को अधिकतम तापमान 18.3 डिग्री और न्यूनतम 4.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, ठंड के साथ-साथ प्रदूषण भी चिंता बढ़ा रहा है। शुक्रवार को शहर का औसत एक्यूआई 256 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में है। जयभीम नगर सबसे प्रदूषित इलाका रहा, जहां एक्यूआई 313 तक पहुंच गया। गंगानगर में 197, पल्लवपुरम में 258, बेगमपुल में 260 और दिल्ली रोड पर 275 एक्यूआई दर्ज किया गया।
 

पांच दिन मौसम रहेगा शुष्क
भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एम. शमीम के अनुसार, आने वाले पांच दिनों तक मौसम शुष्क रहेगा, लेकिन ठंड का असर कम नहीं होगा। सुबह के समय घना कोहरा लोगों को परेशान करता रहेगा। शीतलहर के चलते विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
 

ठंड अभी और सताएगी
बीते वर्षों के आंकड़े देखें तो 2016 में न्यूनतम तापमान 4.9 और 2025 में 4.7 डिग्री रहा था, लेकिन 2026 में 4.3 डिग्री के साथ ठंड ने नया रिकॉर्ड बना दिया। मौसम के संकेत साफ हैं। ठंड अभी और सताएगी।
 

पुराने जख्मों को हरा कर रहीं ये बैरन हवाएं
कड़ाके की ठंड और शीत लहर ने शहरवासियों की दिनचर्या के साथ-साथ सेहत को भी बुरी तरह झकझोर दिया है। ठिठुरन भरी सुबह, सिहराती रातें और बर्फीली हवाएं अब सिर्फ अलाव तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि लोगों के शरीर में छिपे पुराने दर्द को भी बाहर ले आई हैं। खासकर गठिया, बाय (साइटिका) और पुरानी चोटों से जूझ रहे मरीजों के लिए यह मौसम किसी परीक्षा से कम नहीं है।
 

शहर के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों की ओपीडी में इन दिनों जोड़ों के दर्द, सूजन और अकड़न की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के कारण रक्त संचार धीमा पड़ जाता है और मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं, जिससे पहले से मौजूद दर्द और ज्यादा गंभीर हो जाता है। कई मरीजों को पुरानी चोट वाली जगहों पर अचानक तेज टीस और असहनीय दर्द महसूस हो रहा है। सड़क दुर्घटनाओं में पहले घायल रह चुके लोगों को भी ठंड के चलते दोबारा तकलीफ बढ़ गई है।
 

वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एमके बंसल बताते हैं कि शीतलहर के दौरान पुरानी चोटें अक्सर उभरकर सामने आती हैं। कई मरीजों को रात में दर्द के कारण नींद तक नहीं आ पाती। ऐसे मरीजों को नियमित रूप से गर्म पानी की थैली या हॉट पैक का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे जोड़ों के आसपास रक्त प्रवाह बेहतर होता है और दर्द में राहत मिलती है। साथ ही शरीर को पूरी तरह गर्म कपड़ों से ढककर रखना बेहद जरूरी है।
 

ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. तनुराज सिरोही का कहना है कि ठंड में जोड़ों की प्राकृतिक चिकनाई कम हो जाती है, जिससे अकड़न और सूजन बढ़ती है। गठिया और बाय के मरीजों को इस मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाइयों में बदलाव या घरेलू प्रयोग नुकसानदायक हो सकते हैं।
 

जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. योगेश अग्रवाल के अनुसार, शीतलहर का असर केवल जोड़ों तक सीमित नहीं रहता। इससे हृदय रोग, सांस की परेशानी और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को खास सतर्कता बरतने की जरूरत है। गर्म पेय पदार्थों का सेवन, घर के अंदर रहना, हल्की धूप में टहलना और नियमित हल्का व्यायाम इस मौसम में लाभदायक साबित हो सकता है।

 
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