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Meerut News: मिट्टी की उर्वरता बचाने को प्राकृतिक खेती जरूरी
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कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों की प्राकृतिक खेती के संबंध में जागरूक करते वैज्ञानिक स्रोत स्वय
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- मृदा स्वास्थ्य सुधार के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कृषि विज्ञान केंद्र में शुक्रवार को राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत जागरूकता कार्यक्रम हुआ। इसमें क्षेत्र के किसानों को प्राकृतिक खेती के महत्व और लाभों की जानकारी दी गई।
प्रभारी अधिकारी डॉ. राकेश तिवारी ने मृदा स्वास्थ्य पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि जीवांश कार्बन की मात्रा घटकर 0.2 से 0.3 फीसदी रह गई है। रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने किसानों को गन्ने के साथ सहफसली खेती अपनाने की सलाह दी। कृषि वैज्ञानिक डॉ. जेके आर्य ने घनजीवामृत और जीवामृत बनाने की विधि बताई। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव स्पष्ट हैं, इसलिए पारंपरिक पद्धतियों की ओर लौटना जरूरी है। प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत कम होती है और किसानों की आय बढ़ती है।
शुभम आर्य ने बताया कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है। वैज्ञानिक नवीन चंद्रा ने फसलों में रोग व कीट प्रबंधन के प्राकृतिक उपाय बताए। उन्होंने कहा कि रासायनिक दवाओं के बिना भी प्रभावी नियंत्रण संभव है। कार्यक्रम में वैज्ञानिक वीना यादव, सोनिका ग्रेवाल, विभा साहू और कई किसान मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कृषि विज्ञान केंद्र में शुक्रवार को राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत जागरूकता कार्यक्रम हुआ। इसमें क्षेत्र के किसानों को प्राकृतिक खेती के महत्व और लाभों की जानकारी दी गई।
प्रभारी अधिकारी डॉ. राकेश तिवारी ने मृदा स्वास्थ्य पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि जीवांश कार्बन की मात्रा घटकर 0.2 से 0.3 फीसदी रह गई है। रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने किसानों को गन्ने के साथ सहफसली खेती अपनाने की सलाह दी। कृषि वैज्ञानिक डॉ. जेके आर्य ने घनजीवामृत और जीवामृत बनाने की विधि बताई। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव स्पष्ट हैं, इसलिए पारंपरिक पद्धतियों की ओर लौटना जरूरी है। प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत कम होती है और किसानों की आय बढ़ती है।
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शुभम आर्य ने बताया कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है। वैज्ञानिक नवीन चंद्रा ने फसलों में रोग व कीट प्रबंधन के प्राकृतिक उपाय बताए। उन्होंने कहा कि रासायनिक दवाओं के बिना भी प्रभावी नियंत्रण संभव है। कार्यक्रम में वैज्ञानिक वीना यादव, सोनिका ग्रेवाल, विभा साहू और कई किसान मौजूद रहे।