नशीली लस्सी पिलाई, बेहोश होते ही बांधे हाथ-पांव, फिर चहेते भाई ने चाकू से काट डाला बहन का गला
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लिसाड़ीगेट थानाक्षेत्र के श्यामनगर निवासी राहिला जहां पुत्री मरहूम शाहिद का निकाह सात साल पहले खुर्शीद निवासी नूरपुरा अलीगढ़ के साथ हुआ था। दोनों के बेटा आकिब है। पांच साल पहले दंपती का तलाक हो गया। इसके बाद राहिला मेरठ आ गई।
उसने लिसाड़ीगेट में न्यू चाइल्ड मदर जच्चा-बच्चा केंद्र खोल लिया। चार साल पहले राहिला के संबंध सपा के पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री (शिल्पकारी हथकरघा विभाग के सलाहकार) शादीशुदा फारूक हसन से हो गए। चार महीने पहले फारूक ने राहिला से कोर्ट मैरिज कर ली। दोनों कंकरखेड़ा क्षेत्र में किराये के मकान में रहने लगे।
चार दिन पहले छोटा भाई राहत बहन राहिला को श्यामनगर ले आया। घर पर दूसरी बड़ी बहन बुशरा भी आई हुई थी। बुधवार को देर रात राहत दो कुल्हड़ लस्सी लेकर आया और दोनों बहनों को पिला दी। लस्सी पीते ही दोनों बेहोश हो गईं। इसके बाद राहत ने राहिला के हाथ-पैर रस्सी से बांधे और चाकू से गर्दन काट दी।
पुलिस बोली, ये अकेले राहत का काम नहीं, गिरफ्तारी के बाद करेंगे खुलासा
राहिला की हत्या पूरी प्लानिंग करके की गई। राहिला और फारूक की शादी से दोनों के परिजन नाराज थे। शादी से पहले दोनों को कंकरखेड़ा में फारूक के ससुराल वालों ने पकड़ा था। फारूक को पीटकर कंकरखेड़ा थाना पुलिस को दिया था। तब राहिला ने बयान दिया था कि वह बालिग है, अपनी मर्जी से फारूक के साथ है। इससे राहिला के घरवाले और भड़क गए थे।
सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला ने बताया कि इस हत्याकांड में दोनों पक्षों की भूमिका की जांच की जा रही है। पूछताछ चल रही है। आशंका है कि राहत अकेला यह वारदात नहीं कर सकता। राहिला को पहले तलाक देने के लिए मनाया गया। जब वह नहीं मानी तो हत्या कर दी गई। हत्या में कौन-कौन लोग शामिल हैं, यह राहत के पकड़े जाने के बाद साफ होगा।
राहिला का चहेता था भाई राहत
राहत बहन राहिला का चहेता छोटा भाई था। वह उस पर बहुत भरोसा करती थी। इसीलिए राहत को ही राहिला को बुलाने के लिए कंकरखेड़ा भेजा गया था। उसकी बातों में आकर ही वह मायके आ गई थी।
राहिला का गला काटने के बाद राहत ने अपनी सोती हुई मां को उठाया और फरार हो गया। वहीं पोस्टमार्टम के बाद शव को राहिला के मामा अपने गांव बड़ला किठौर ले गए, जहां सुपुर्द ए खाक किया गया। राहिला के पांच साल के बेटे का रो-रोकर बुरा हाल था।
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