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Mirzapur Ground Report: मेडिकल कॉलेज से लेकर कालीन उद्योग तक क्या बदला? कॉरिडोर और रोजगार पर सामने आई सच्चाई
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Sat, 11 Apr 2026 06:16 PM IST
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सार
Mirzapur Ground Report: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अमर उजाला की टीम ने मिर्जापुर में ग्राउंड रिपोर्ट की। स्वास्थ्य, कालीन उद्योग और विंध्यवासिनी कॉरिडोर को लेकर जिले के लोगों से बातचीत में जमीनी स्तर पर हुए बदलाव की हकीकत सामने आई।
मिर्जापुर ग्राउंड रिपोर्ट
- फोटो : अमर उजाला GFX
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विस्तार
Mirzapur Ground Report: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर जहां सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां गिनाने में जुटा है, वहीं विपक्ष भी रणनीति बनाने में तेजी दिखा रहा है। ऐसे में प्रदेश की वास्तविक स्थिति और क्षमता को परखने के लिए अमर उजाला की टीम लगातार अलग-अलग जिलों से ग्राउंड रिपोर्ट दिखा रही है। इसी कड़ी में टीम मिर्जापुर पहुंची, जहां स्वास्थ्य व्यवस्था, मां विंध्यवासिनी कॉरिडोर और उद्योग समेत कई अहम मुद्दों पर स्थानीय लोगों से बातचीत की गई और जमीनी हकीकत को सामने लाने की कोशिश की गई।
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मेडिकल कॉलेज से स्वास्थ्य सेवाओं को मिली रफ्तार
यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी मजबूत हुई है, इसका आकलन करने के लिए अमर उजाला की टीम मिर्जापुर पहुंची। यहां वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज योजना के तहत मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई है। इस मेडिकल कॉलेज से जिले को कितना लाभ मिल रहा है, इसे लेकर टीम ने ग्राउंड पड़ताल की। मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल प्रो. संजीव कुमार सिंह ने बताया कि जिस शहर में मेडिकल कॉलेज खुलता है, वहां कई क्षेत्रों में तेजी से विकास होता है। इससे स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो पाती हैं और लोगों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में इस दिशा में क्रांतिकारी काम हुआ है। अगर यह पहल दस साल पहले शुरू हो जाती, तो आज लोगों को और अधिक सुविधाएं मिल रही होतीं। वहीं, मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. सचिन किशोर ने बताया कि अस्पताल में मरीजों के लिए कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यहां सभी प्रकार के इलाज और जांच की सुविधा एक ही छत के नीचे मिल रही है, जिससे मरीजों को काफी राहत मिल रही है।
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मिर्जापुर के कालीन उद्योग को नई पहचान
अमर उजाला की टीम ने मिर्जापुर में ओडीओपी योजना के तहत उद्योगों की भी जमीनी पड़ताल की और स्थानीय लोगों से बदलाव को लेकर बातचीत की। इस दौरान सामने आया कि पारंपरिक उद्योगों को नई गति मिली है और रोजगार के अवसर बढ़े हैं। ओबीईटीई प्रा. लि. के डायरेक्टर राजेश कुमार ने बताया कि मिर्जापुर में कालीन उद्योग मुगलकाल से चला आ रहा है। यह उद्योग भारत की परिस्थितियों के अनुसार काफी अनुकूल है, क्योंकि इसमें कम पूंजी में अधिक उत्पादन संभव है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार से मिल रही सहायता के कारण अब नए लोग भी इस क्षेत्र से जुड़ रहे हैं, जिससे उद्योग को बढ़ावा मिल रहा है। पहले यहां से गुजरात, सूरत और अन्य बड़े शहरों की ओर पलायन होता था, लेकिन अब इस पर काफी हद तक रोक लगी है और लोगों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिल रहा है। वहीं, कालीन व्यापारी मो. परवेज खान ने बताया कि एक समय था जब मिर्जापुर दरियों के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन अब यहां कालीन का कारोबार अधिक तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अमेरिका इस उद्योग का प्रमुख बाजार बन गया है, जबकि पहले यूरोप मुख्य बाजार हुआ करता था।
कॉरिडोर बनने से बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
मिर्जापुर में मां विंध्यवासिनी कॉरिडोर को लेकर अमर उजाला की टीम ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से बातचीत की। बातचीत में सामने आया कि कॉरिडोर बनने के बाद क्षेत्र में सुविधाएं बढ़ी हैं और श्रद्धालुओं की संख्या में भी इजाफा हुआ है। एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि यह स्थान बेहद सुंदर हो गया है और मिर्जापुर में तेजी से विकास देखने को मिल रहा है। उन्होंने इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार का आभार जताया। विंध्यवासिनी मंदिर के पुजारी पं. अजय दुबे ने कहा कि कॉरिडोर बनने के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी है। अब व्यवस्थाएं बेहतर हो गई हैं और श्रद्धालुओं को दर्शन में सुविधा मिल रही है। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार का धन्यवाद भी किया। डीआईजी आर.पी. सिंह ने बताया कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और सभी को सुगमता से दर्शन कराए जा रहे हैं। कॉरिडोर बनने से भीड़ प्रबंधन में काफी आसानी हुई है। वहीं, दुकानदार सतीश मिश्रा ने बताया कि पहले की तुलना में अब श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है, जिससे व्यापार में भी बढ़ोतरी हुई है। नगर विधायक रत्नाकर सिंह ने कहा कि पहले जहां अन्य स्थानों पर धन खर्च होता था, वहीं अब मंदिरों के विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब बेहतर सुविधाओं के चलते श्रद्धालु आसानी से दर्शन कर पा रहे हैं।