-फाल्गुन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मंदिर छत पर दिनभर चलता रहा बच्चों के जनेऊ और मुंडन संस्कार का कार्यक्रम
विंध्याचल। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर बृहस्पतिवार को विंध्य दरबार में मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर पहुंचे आस्थावानों ने बड़े ही श्रद्धाभाव से जगत जननी मां विंध्यवासिनी के पावन धाम में पहुुंचकर घर परिवार के कुशल मंगल की मां से कामना की।
विशेष मुहूर्त पर मंदिर छत पर दिनभर बच्चों के मुंडन और जनेऊ संस्कार का दौर चलता रहा। आदिशक्ति जगत जननी मां विंध्यवासिनी के दरबार में भोर से ही दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हो गया, यह देर रात तक चलता रहा। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु हाथों में नारियल-चुनरी, माला-फूल, रोरी-रक्षा, लचीदाना-कपूर एवं प्रसाद लिए माता के दरबार में पहुंचे। घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा और मां के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर देवीमय हो गया। मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन के बाद भक्तों ने मंदिर परिसर में विराजमान समस्त देवी-देवताओं के मंदिरों में जाकर मत्था टेक कर सुख समृद्धि की कामना की। माता के दर्शन के बाद बड़ी संख्या में भक्त अष्टभुजा पहाड़ पर विराजमान मां काली और मां अष्टभुजी देवी के पावन दरबार में जाकर माता काली और अष्टभुजा देवी का दर्शन-पूजन किया।

मां विंध्यवासिनी की एक झलक पाने के लिए कतार में खड़े श्रद्धालु।-संवाद।- फोटो : 1