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Mirzapur News: नवरात्र के पांचवें दिन घंटा, शंख, नगाड़े से गूंजा पहाड़ावाली का दरबार
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मां भगवती चंडिका देवी।- सोशल मीडिया।
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-गंगा स्नान के बाद नर नारियों और बच्चों ने धाम पहुंचकर शीश नवाया, बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
विंध्याचल। चैत्र नवरात्र की पंचमी पर सोमवार को मां भगवती के दरबार में दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। घंटा, शंख, नगाड़े से पहाड़ावाली का दरबार गूंज उठा। गंगा स्नान के बाद नर नारियों और बच्चों ने बड़े श्रद्धा भाव से धाम पहुंचकर शीश नवाया। मां का तरह-तरह के पुष्पों से दिव्य शृंगार किया गया।
भोर से ही मां के भव्य शृंगार और मंगला आरती के उपरांत कपाट दर्शनार्थियों के दर्शन पूजन के लिए खोला गया। तो लंबी कतार में खड़े देवी भक्त जयकारा लगाते हुए एक झलक पाने के लिए बेताब हो उठे। किसी ने गर्भगृह तो किसी ने झांकी से ही मां के दर्शन पूजन के बाद मंदिर के गुंबद की परिक्रमा करके मत्था टेका। वहीं दूसरी ओर गंगा घाटों पर एवं परिक्रमा पथ में शहनाई की धुन पर लोगों ने अपने-अपने नौनिहालों का मुंडन संस्कार कराया। मंदिर छत पर जगह-जगह आसन जमाए साधक मंत्र जाप के साथ साधना करते रहे।
त्रिकोण यात्रा करने से जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं
मां के दर्शनोपरांत त्रिकोण यात्रा करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। विंध्य धाम को सिद्धपीठ भी कहा जाता है। माता की असीम कृपा शक्ति अल्प समय में भक्तों को सिद्धियों को देनें वाला है। विंध्य पर्वत का ईशान कोण विंध्य क्षेत्र में ही माना जाता है। मान्यता है कि नवरात्र के दिनों में आज भी मां विंध्यवासिनी भक्तों को दर्शन देने के लिए पताका पर विराजती हैं। विंध्याचल ही एकमात्र ऐसा शक्तिपीठ है, जहां देवी के संपूर्ण विग्रह के दर्शन होते है। मां विंध्यवासिनी का यह मंदिर देश के 108 सिद्धपीठों में से एक है।
सप्तऋषियों को विंध्यधाम से ही ज्ञान प्राप्त हुआ था
अध्यात्मिक धर्मगुरु त्रियोगी नारायण उर्फ मिठ्ठू मिश्र ने बताया कि हजारों वर्षों से विंध्य क्षेत्र ज्ञान प्राप्त करने की तपोस्थली रहा है। यहीं से मुनि अगत्स्य ने सभ्यता और संस्कृति के प्रचार-प्रसार की ज्ञान यात्रा आरंभ की। उन्होंने बताया यही वह क्षेत्र है, जहां सप्तऋषियों को ज्ञान प्राप्त हुआ।आदि गुरु शंकराचार्य ने भी यहीं पर मां की महान शक्ति का अनुभव प्राप्त किया। किसी भी साधक की साधना तब तक अधूरी मानी जाएगी जब तक वह विंध्य धाम में आकर मां के चरण रज को प्राप्त नहीं कर लेता। आदिगुरू शंकराचार्य , स्वामी करपात्री महाराज, तैलंग स्वामी, अवधूत भगवान राम, माता आनंदमयी मां महागुरु गोरखनाथ बाबा, योगीराज देवरहा बाबा जैसे संतों ने इस भूमि पर साधना की है।
सामाजिक संगठनों ने भक्तों में प्रसाद वितरण किए
श्रद्धालुओं को भंडारे का आयोजन कर श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरण कर रहे हैं। विंध्य विद्यापीठ इंटर कॉलेज परिसर, रेलवे स्टेशन के पास, रोडवेज परिसर, सुंगधी देवी मंदिर, जयपुरिया गली, पुरानी वीआईपी मार्ग गेट नंबर एक काली खोह, गेरुआ तालाब, अष्टभुजा देवी, सहित कई अन्य स्थानों पर विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा भंडारा का आयोजन किया गया। इसमें फलाहार एवं अन्न ग्रहण करने वाले भक्तों के लिए अलग से काउंटर लगाया गया है।
महाकाली के दरबार में उमड़े श्रद्धालु
चैत्र नवरात्र मेले की पंचमी तिथि पर काली खोह पहाड़ पर विराजमान महाकाली के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी तरह-तरह के पुष्पों से मां का किया गया भव्य श्रृंगार का दर्शन पाकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। माता काली का दर्शन पूजन करने के बाद भक्तजनों ने मंदिर परिसर में रक्षा बांध मन्नते मांगी। श्रद्धालुओं ने पहाड़ पर लंगूरों को चना गुड़ आदि ग्रहण करा कर पुण्य कमाया।
मां अष्टभुजी देवी का दर्शन पाकर श्रद्धालु निहाल
अष्टभुजा पहाड़ पर पहुंचे दर्शनार्थी मां अष्टभुजी देवी के भव्य स्वरूप का दर्शन करके अभिभूत हो उठे मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन पूजन करने के बाद किसी ने रोपवे के माध्यम से तो किसी ने सीढ़ियां चढ़कर देवी मां का दर्शन पूजन किया।
निकास द्वार से प्रवेश पर हुई नोंकझोक
शनिवार, रविवार दो दिनो में लगभग दस लाख से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ के अनुपात में सोमवार को भीड़ का दबाव थोड़ा कम रहा। नवरात्र की पंचमी पर अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालुओं ने स्कंदमाता के स्वरूप का पूजन किया। मध्याह्न आरती के पश्चात निकास दरवाजे पर दो बार हल्की फुल्की नोंकझोंक का मामला सामने आया। एक बार एक दारोगा से तथा एक बार जनपद प्रशासन के एक जिम्मेदार अधिकारी से पंडों के बीच मामूली विवाद हुआ। श्री विंध्य पंडा समाज अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने बताया कि विभिन्न कारणों से गर्भगृह के अंदर पहले से ही तीर्थ पुरोहितों का आना जाना है। सोमवार दोपहर में एक अधिकारी की तरफ से उन लोगों को रोका जाने पर मामूली विवाद हुई।
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विदेशी महिला श्रद्धालु ने की मां विंध्यवासिनी की आराधना
पोलैंड से आई एक विदेशी श्रद्धालु ईशा बेला ने चैत्र नवरात्र मेले के पंचमी तिथि पर मां विंध्यवासिनी मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। दर्शन के विदेश महिला ने मां विंध्यवासिनी को पूरे विश्व की मां बताते हुए कहा कि यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा का वातावरण अत्यंत अद्भुत है। ईशा बेला ने दिवाकर मिश्र से भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और देवी शक्ति के महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की, जिससे वह काफी प्रभावित हुईं।
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मां चंडिका धाम: अव्यवस्थाओं के बीच हो रहा दर्शन पूजन
पड़री। पांचवें दिन सोमवार को भगवती चंडिका धाम में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। गंगा स्नान के बाद मंदिर पहुंचकर मत्था टेका श्रद्धालुओं ने माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर के पुजारी मंगला पूरी गोस्वामी और संगला पूरी गोस्वामी ने बताया कि मां के दरबार में आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। भगवती चंडिका धाम तक जाने वाला पड़री चंडिका मार्ग जर्जर होने से श्रद्धालुओं को धाम तक पहुंचने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। गंगाघाट अव्यवस्थाओं के चलते दर्शनार्थियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
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विंध्याचल। चैत्र नवरात्र की पंचमी पर सोमवार को मां भगवती के दरबार में दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। घंटा, शंख, नगाड़े से पहाड़ावाली का दरबार गूंज उठा। गंगा स्नान के बाद नर नारियों और बच्चों ने बड़े श्रद्धा भाव से धाम पहुंचकर शीश नवाया। मां का तरह-तरह के पुष्पों से दिव्य शृंगार किया गया।
भोर से ही मां के भव्य शृंगार और मंगला आरती के उपरांत कपाट दर्शनार्थियों के दर्शन पूजन के लिए खोला गया। तो लंबी कतार में खड़े देवी भक्त जयकारा लगाते हुए एक झलक पाने के लिए बेताब हो उठे। किसी ने गर्भगृह तो किसी ने झांकी से ही मां के दर्शन पूजन के बाद मंदिर के गुंबद की परिक्रमा करके मत्था टेका। वहीं दूसरी ओर गंगा घाटों पर एवं परिक्रमा पथ में शहनाई की धुन पर लोगों ने अपने-अपने नौनिहालों का मुंडन संस्कार कराया। मंदिर छत पर जगह-जगह आसन जमाए साधक मंत्र जाप के साथ साधना करते रहे।
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मां के दर्शनोपरांत त्रिकोण यात्रा करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। विंध्य धाम को सिद्धपीठ भी कहा जाता है। माता की असीम कृपा शक्ति अल्प समय में भक्तों को सिद्धियों को देनें वाला है। विंध्य पर्वत का ईशान कोण विंध्य क्षेत्र में ही माना जाता है। मान्यता है कि नवरात्र के दिनों में आज भी मां विंध्यवासिनी भक्तों को दर्शन देने के लिए पताका पर विराजती हैं। विंध्याचल ही एकमात्र ऐसा शक्तिपीठ है, जहां देवी के संपूर्ण विग्रह के दर्शन होते है। मां विंध्यवासिनी का यह मंदिर देश के 108 सिद्धपीठों में से एक है।
सप्तऋषियों को विंध्यधाम से ही ज्ञान प्राप्त हुआ था
अध्यात्मिक धर्मगुरु त्रियोगी नारायण उर्फ मिठ्ठू मिश्र ने बताया कि हजारों वर्षों से विंध्य क्षेत्र ज्ञान प्राप्त करने की तपोस्थली रहा है। यहीं से मुनि अगत्स्य ने सभ्यता और संस्कृति के प्रचार-प्रसार की ज्ञान यात्रा आरंभ की। उन्होंने बताया यही वह क्षेत्र है, जहां सप्तऋषियों को ज्ञान प्राप्त हुआ।आदि गुरु शंकराचार्य ने भी यहीं पर मां की महान शक्ति का अनुभव प्राप्त किया। किसी भी साधक की साधना तब तक अधूरी मानी जाएगी जब तक वह विंध्य धाम में आकर मां के चरण रज को प्राप्त नहीं कर लेता। आदिगुरू शंकराचार्य , स्वामी करपात्री महाराज, तैलंग स्वामी, अवधूत भगवान राम, माता आनंदमयी मां महागुरु गोरखनाथ बाबा, योगीराज देवरहा बाबा जैसे संतों ने इस भूमि पर साधना की है।
सामाजिक संगठनों ने भक्तों में प्रसाद वितरण किए
श्रद्धालुओं को भंडारे का आयोजन कर श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरण कर रहे हैं। विंध्य विद्यापीठ इंटर कॉलेज परिसर, रेलवे स्टेशन के पास, रोडवेज परिसर, सुंगधी देवी मंदिर, जयपुरिया गली, पुरानी वीआईपी मार्ग गेट नंबर एक काली खोह, गेरुआ तालाब, अष्टभुजा देवी, सहित कई अन्य स्थानों पर विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा भंडारा का आयोजन किया गया। इसमें फलाहार एवं अन्न ग्रहण करने वाले भक्तों के लिए अलग से काउंटर लगाया गया है।
महाकाली के दरबार में उमड़े श्रद्धालु
चैत्र नवरात्र मेले की पंचमी तिथि पर काली खोह पहाड़ पर विराजमान महाकाली के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी तरह-तरह के पुष्पों से मां का किया गया भव्य श्रृंगार का दर्शन पाकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। माता काली का दर्शन पूजन करने के बाद भक्तजनों ने मंदिर परिसर में रक्षा बांध मन्नते मांगी। श्रद्धालुओं ने पहाड़ पर लंगूरों को चना गुड़ आदि ग्रहण करा कर पुण्य कमाया।
मां अष्टभुजी देवी का दर्शन पाकर श्रद्धालु निहाल
अष्टभुजा पहाड़ पर पहुंचे दर्शनार्थी मां अष्टभुजी देवी के भव्य स्वरूप का दर्शन करके अभिभूत हो उठे मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन पूजन करने के बाद किसी ने रोपवे के माध्यम से तो किसी ने सीढ़ियां चढ़कर देवी मां का दर्शन पूजन किया।
निकास द्वार से प्रवेश पर हुई नोंकझोक
शनिवार, रविवार दो दिनो में लगभग दस लाख से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ के अनुपात में सोमवार को भीड़ का दबाव थोड़ा कम रहा। नवरात्र की पंचमी पर अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालुओं ने स्कंदमाता के स्वरूप का पूजन किया। मध्याह्न आरती के पश्चात निकास दरवाजे पर दो बार हल्की फुल्की नोंकझोंक का मामला सामने आया। एक बार एक दारोगा से तथा एक बार जनपद प्रशासन के एक जिम्मेदार अधिकारी से पंडों के बीच मामूली विवाद हुआ। श्री विंध्य पंडा समाज अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने बताया कि विभिन्न कारणों से गर्भगृह के अंदर पहले से ही तीर्थ पुरोहितों का आना जाना है। सोमवार दोपहर में एक अधिकारी की तरफ से उन लोगों को रोका जाने पर मामूली विवाद हुई।
000000000000000000000000000000000000
विदेशी महिला श्रद्धालु ने की मां विंध्यवासिनी की आराधना
पोलैंड से आई एक विदेशी श्रद्धालु ईशा बेला ने चैत्र नवरात्र मेले के पंचमी तिथि पर मां विंध्यवासिनी मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। दर्शन के विदेश महिला ने मां विंध्यवासिनी को पूरे विश्व की मां बताते हुए कहा कि यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा का वातावरण अत्यंत अद्भुत है। ईशा बेला ने दिवाकर मिश्र से भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और देवी शक्ति के महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की, जिससे वह काफी प्रभावित हुईं।
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मां चंडिका धाम: अव्यवस्थाओं के बीच हो रहा दर्शन पूजन
पड़री। पांचवें दिन सोमवार को भगवती चंडिका धाम में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। गंगा स्नान के बाद मंदिर पहुंचकर मत्था टेका श्रद्धालुओं ने माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर के पुजारी मंगला पूरी गोस्वामी और संगला पूरी गोस्वामी ने बताया कि मां के दरबार में आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। भगवती चंडिका धाम तक जाने वाला पड़री चंडिका मार्ग जर्जर होने से श्रद्धालुओं को धाम तक पहुंचने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। गंगाघाट अव्यवस्थाओं के चलते दर्शनार्थियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

मां भगवती चंडिका देवी।- सोशल मीडिया।

मां भगवती चंडिका देवी।- सोशल मीडिया।