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Mirzapur News: त्याग, मर्यादा और संस्कारों का अनुपम संगम है रामायण

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jan 2026 12:52 AM IST
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Ramayana is a unique confluence of sacrifice, dignity and values.
लालगंज में रामकथा का श्रवण करती श्रद्धालु महिलाएं, स्रोत संवाद
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लालगंज। तेंदुई स्थित जानकी कुंज मंदिर परिसर में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिन सीता विदाई और भरत चरित्र के मार्मिक प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। अंतरराष्ट्रीय संत बाल योगी संजय महाराज ने जब इन प्रसंगों की व्याख्या की तो पंडाल में मौजूद जनसमूह की आंखें नम हो गईं। संत संजय महाराज ने कहा कि जब जनकनंदिनी सीता पिता जनक के चरणों में झुकीं तो पूरी मिथिला मौन हो गई। महलों से लेकर गलियों तक केवल करुण विलाप और आंसू ही दिखाई दे रहे थे। उन्होंने बताया कि सीता की विदाई महज एक पारिवारिक घटना नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति में त्याग, मर्यादा और कर्तव्य का सर्वोच्च उदाहरण है। इसी के साथ उन्होंने भरत चरित्र के बारे में बताते हुए कहा कि भरत का भ्रातृ प्रेम और राजसी सुखों का त्याग विश्व के इतिहास में बेमिसाल है। आयोजन के दौरान पूरा वातावरण जय सियाराम के जयकारों से गुंजायमान रहा। मुख्य यजमान अमरनाथ तिवारी व जानकी देवी ने विधि-विधान से आरती की। इस अवसर पर आयोजन समिति के अशोक तिवारी, नवीन तिवारी, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष बालेंदुमणि तिवारी सहित उत्तर प्रदेश पिछड़ा आयोग के उपाध्यक्ष और मध्य प्रदेश व उत्तराखंड के मंत्रियों ने भी कथा श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
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