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Mirzapur News: 72 घंटे में चार डिग्री कम हुआ तापमान, फिर भी गर्मी से नहीं मिली राहत

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 28 Apr 2026 01:37 AM IST
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Temperature drops by four degrees in 72 hours, yet no relief from the heat.
तेज धूप के बीच दोपहर सिविल लाइन फतहां मार्ग चेहरा छिपाए गुजर रहे बाइक सवार।-संवाद। - फोटो : 1
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-प्रतिकूल मौसम से जनजीवन बेहाल, दोपहर में छुट्टी के समय छोटे बच्चों के चेहरे गर्मी और धूप से हो जा रहे हैं लाल
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मिर्जापुर। जिले के तापमान में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। 72 घंटे में चार डिग्री सेल्सियस के अधिकतम तापमान में गिरावट के बाद भी तेज धूप और भीषण गर्मी से लोगों को कोई राहत नहीं मिल रहा है। बावजूद गर्मी का असर बरकरार है। भीषण गर्मी के बीच सड़कों पर राहगीरों के साथ-साथ दोपहर की छुट्टी के समय स्कूली बच्चों की हालत भी खराब हो जा रही है। घर पहुंचते उनका मासूमों का चेहरा गर्मी से लाल हो जा रहा है। सोमवार को अधिकतम 40 और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि रविवार को अधिकतम 42 और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। 24 को अप्रैल माह का सर्वाधिक तापमान 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। वहीं 23 अप्रैल को अधिकतम 43 और न्यूनतम 23 और 26 अप्रैल को अधिकतम 42 और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।
तेज धूप और गर्म हवाओं से दोपहर के समय प्रमुख सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है, जबकि सुबह और शाम बाजारों में चहल-पहल बनी रहती है। जरूरी कार्य से ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। भीषण गर्मी के कारण आम का पना, गन्ने का रस और अन्य ठंडे पेय पदार्थों की मांग बढ़ गई है। बाजारों में जिला अस्पताल रोड, कचहरी, वासलीगंज सहित अन्य बाजारों में सजे ऐसी दुकानों पर लोगों की भीड़ देखी जा रही है।
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स्कूलों का समय घटाने की मांग तेज, बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा
मिर्जापुर। तापमान में उतार चढ़ाव के बीच भीषण गर्मी का असर अब विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर भी साफ दिखने लगा है। ऐसे में अभिभावकों ने स्कूलों के समय में बदलाव की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि कक्षाएं सुबह 7:00 से 10:30 बजे तक संचालित कराई जाएं या फिर वैकल्पिक रूप से ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की जाए। चिकित्सकों ने बताया कि मौसम में बच्चों को हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त, चक्कर, बुखार और अत्यधिक थकान जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। छोटे बच्चों में यह जोखिम और अधिक होता है, क्योंकि उनका शरीर तापमान को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं होता। अभिभावकों ने कुछ निजी विद्यालयों पर आरोप लगाया है कि वे गर्मी की छुट्टियों का समय इस तरह निर्धारित करते हैं, जिससे मई और जून दोनों महीनों की फीस वसूली जारी रह सकें। इससे बच्चों के स्वास्थ्य के बजाय मुनाफे को महत्व देते हैं।
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