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Mirzapur News: 12 साल में बना पुल, आठ साल बाद भी हाईवे से नहीं जुड़ा<bha>;</bha> जर्जर रास्ते से गुजर रहे वाहन
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भटौली से जौसरा होते हुए मुख्यालय जाने वाला क्षतिग्रस्त व सकरा मार्ग। स्रोत- संवाद
- फोटो : Samvad
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भटौली पुल से दूरी घटती है, लेकिन खराब मार्ग से लोगों को परेशानी
मिर्जापुर। भटौली और चुनार पुल का निर्माण मिर्जापुर से वाराणसी की दूरी कम करने और शास्त्री पुल पर यातायात का दबाव घटाने के लिए किया गया था। पुल पर बड़े वाहनों के संचालन के लिए इसे हाईवे से जोड़ने की योजना भी बनाई गई थी। हालांकि, 12 वर्षों में पुल बनने के बाद और आठ वर्ष पहले इसके शुरू होने के बावजूद अब तक इसे हाईवे से नहीं जोड़ा जा सका है। चुनार पुल को एक महीने पहले स्टेशन रोड-गंगा घाट चौड़ीकरण मार्ग से जोड़ दिया गया है, लेकिन भटौली पुल तक जाने वाले लोग अभी भी संकरे मार्ग से होकर गुजर रहे हैं।
मिर्जापुर से वाराणसी की दूरी कम करने के लिए भटौली घाट और चुनार में पक्के पुल की नींव वर्ष 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने रखी थी। दोनों पुलों के निर्माण में 12 वर्ष लगे। वर्ष 2018 में निर्माण पूरा होने के बाद इसे जनता के लिए खोल दिया गया और आवागमन शुरू हो गया। इसके बावजूद पुल तक पहुंचने वाले मार्ग का न तो चौड़ीकरण किया गया और न ही इसे हाईवे से जोड़ा गया। जबकि निर्माण के समय ही इसे हाईवे से जोड़ने की योजना बनाई गई थी। भटौली पुल को आमघाट हाईवे से जोड़ने के लिए कई बार सर्वे किए गए, लेकिन मार्ग का निर्माण नहीं हो सका। इस कारण लोग गांव के संकरे और जर्जर रास्तों से होकर वाराणसी आते-जाते हैं। मार्ग की खराब स्थिति के चलते वाहनों के फंसने की समस्या भी बनी रहती है, जिससे यात्रा में देरी होती है। पुल को हाईवे से जोड़ना तो दूर, उस ओर जाने वाले मार्ग का चौड़ीकरण भी नहीं किया जा रहा है।
वन-वे व्यवस्था के बावजूद लग रहा जाम
कछवां। भटौली पुल तक पहुंचने के लिए दो मार्ग हैं—एक भटौली गांव से होकर और दूसरा जौसरा गांव से होकर। भटौली गांव का मार्ग संकरा है, जिससे दोनों ओर से वाहन आने पर रास्ता बंद हो जाता है। इस स्थिति को देखते हुए वहां पुलिस की ड्यूटी लगाई गई है, ताकि वन-वे व्यवस्था लागू की जा सके। इसके बावजूद लोग नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे जाम की स्थिति बन रही है।
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी
लोक निर्माण विभाग, प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार ने बताया कि भटौली पुल के दोनों ओर मार्ग का चौड़ीकरण 16 करोड़ 35 लाख रुपये की लागत से किया जाना है। उन्होंने बताया कि एक ओर बरैनी की दिशा में मार्ग सात मीटर चौड़ा किया जा चुका है, जबकि दूसरी ओर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। अब तक 60 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। शेष भूमि के लिए एक सप्ताह में सहमति मिलने के बाद रजिस्ट्री कराई जाएगी, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
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मिर्जापुर। भटौली और चुनार पुल का निर्माण मिर्जापुर से वाराणसी की दूरी कम करने और शास्त्री पुल पर यातायात का दबाव घटाने के लिए किया गया था। पुल पर बड़े वाहनों के संचालन के लिए इसे हाईवे से जोड़ने की योजना भी बनाई गई थी। हालांकि, 12 वर्षों में पुल बनने के बाद और आठ वर्ष पहले इसके शुरू होने के बावजूद अब तक इसे हाईवे से नहीं जोड़ा जा सका है। चुनार पुल को एक महीने पहले स्टेशन रोड-गंगा घाट चौड़ीकरण मार्ग से जोड़ दिया गया है, लेकिन भटौली पुल तक जाने वाले लोग अभी भी संकरे मार्ग से होकर गुजर रहे हैं।
मिर्जापुर से वाराणसी की दूरी कम करने के लिए भटौली घाट और चुनार में पक्के पुल की नींव वर्ष 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने रखी थी। दोनों पुलों के निर्माण में 12 वर्ष लगे। वर्ष 2018 में निर्माण पूरा होने के बाद इसे जनता के लिए खोल दिया गया और आवागमन शुरू हो गया। इसके बावजूद पुल तक पहुंचने वाले मार्ग का न तो चौड़ीकरण किया गया और न ही इसे हाईवे से जोड़ा गया। जबकि निर्माण के समय ही इसे हाईवे से जोड़ने की योजना बनाई गई थी। भटौली पुल को आमघाट हाईवे से जोड़ने के लिए कई बार सर्वे किए गए, लेकिन मार्ग का निर्माण नहीं हो सका। इस कारण लोग गांव के संकरे और जर्जर रास्तों से होकर वाराणसी आते-जाते हैं। मार्ग की खराब स्थिति के चलते वाहनों के फंसने की समस्या भी बनी रहती है, जिससे यात्रा में देरी होती है। पुल को हाईवे से जोड़ना तो दूर, उस ओर जाने वाले मार्ग का चौड़ीकरण भी नहीं किया जा रहा है।
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वन-वे व्यवस्था के बावजूद लग रहा जाम
कछवां। भटौली पुल तक पहुंचने के लिए दो मार्ग हैं—एक भटौली गांव से होकर और दूसरा जौसरा गांव से होकर। भटौली गांव का मार्ग संकरा है, जिससे दोनों ओर से वाहन आने पर रास्ता बंद हो जाता है। इस स्थिति को देखते हुए वहां पुलिस की ड्यूटी लगाई गई है, ताकि वन-वे व्यवस्था लागू की जा सके। इसके बावजूद लोग नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे जाम की स्थिति बन रही है।
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी
लोक निर्माण विभाग, प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार ने बताया कि भटौली पुल के दोनों ओर मार्ग का चौड़ीकरण 16 करोड़ 35 लाख रुपये की लागत से किया जाना है। उन्होंने बताया कि एक ओर बरैनी की दिशा में मार्ग सात मीटर चौड़ा किया जा चुका है, जबकि दूसरी ओर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। अब तक 60 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। शेष भूमि के लिए एक सप्ताह में सहमति मिलने के बाद रजिस्ट्री कराई जाएगी, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

भटौली से जौसरा होते हुए मुख्यालय जाने वाला क्षतिग्रस्त व सकरा मार्ग। स्रोत- संवाद- फोटो : Samvad

भटौली से जौसरा होते हुए मुख्यालय जाने वाला क्षतिग्रस्त व सकरा मार्ग। स्रोत- संवाद- फोटो : Samvad