UP: सपा MLA और उनके चाचा का जाति प्रमाणपत्र पाया गया फर्जी, प्रशासन ने दो बेटियों के सर्टिफिकेट भी किए निरस्त
लवली यादव ने आरोप लगाया था कि बिलारी के गांव इब्राहिमपुर के मूल निवासी विधायक मो. फहीम, विधायक के चाचा उस्मान, उस्मान की बेटी कुमारी फरहीन जहां और समरीन जहां के जाति प्रमाणपत्र फर्जी हैं।
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यूपी के मुरादाबाद स्थित बिलारी के सपा विधायक मो. फहीम का जाति प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया है। फहीम ने अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत झोजा जाति का प्रमाणपत्र इस्तेमाल किया था। जनपद स्तरीय जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने सुनवाई के बाद विधायक फहीम का यह जाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया है। विधायक के चाचा उस्मान और उस्मान की दो बेटियों का प्रमाणपत्र भी निरस्त किया है। कहा है कि इनका झोजा जाति में वर्गीकृत होना स्पष्ट नहीं हो सका है।
विश्वास यादव ने दी थी चुनौती
बिलारी तहसील के ग्राम सिहाली निवासी विश्वास यादव उर्फ लवली यादव ने सपा विधायक फहीम के जाति प्रमाणपत्र को चुनौती दी थी। इसके लिए जनपद स्तरीय जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति के समक्ष 19 जुलाई 2024 को वाद दायर किया था। इस मामले में अधिकारियों की चार सदस्यीय समिति ने सुनवाई की। लवली यादव ने आरोप लगाया था कि बिलारी के गांव इब्राहिमपुर के मूल निवासी विधायक मो. फहीम, विधायक के चाचा उस्मान, उस्मान की बेटी कुमारी फरहीन जहां और समरीन जहां के जाति प्रमाणपत्र फर्जी हैं।
नहीं मिलेगा लाभ
इसके बाद जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने सभी पक्षकारों के तर्कों को सुना। दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत किए गए अभिलेखीय साक्ष्यों और तथ्यों का समिति ने अवलोकन किया। समिति ने मो. फहीम का अन्य पिछड़ा वर्ग में झोजा जाति में वर्गीकृत होना स्पष्ट न होने की बात कही। कहा कि इस वजह से मो. फहीम को अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत झोजा जाति का लाभ प्रदान किया जाना उचित नहीं है। इसके बाद विधायक, उनके चाचा, दो चचेरी बहनों के प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए।
समिति ने पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्णय का दिया उदाहरण
समिति ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की जनसुनवाई अक्तूबर 1997 के तहत शाहिद हुसैन पाशा निवासी ग्राम कनपुरा पोस्ट पलोला जनपद मुरादाबाद ने झोजा और तुर्क को समानार्थक शब्द के रूप में प्रयोग करने के लिए प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया था। इस मामले में आयोग ने 24 मार्च 1998 को विभिन्न तथ्यों के अवलोकन के बाद झोजा और तुर्क को समानार्थक नहीं माना था। इसी आधार पर प्रार्थनापत्र को निरस्त कर दिया गया था। तुर्क और झोजा को अन्य पिछड़ा वर्ग की केंद्रीय सूची में समानार्थक शब्द के रूप में न रखते हुए मात्र झोजा को ही केंद्रीय सूची में रखा गया। इससे स्पष्ट है कि तुर्क और झोजा भिन्न जाति हैं।
बोले जिम्मेदार
जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने सभी पक्षों के तर्कों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद निर्णय लिया है। इसी आधार पर विधायक मो. फहीम का जाति प्रमाणपत्र निरस्त किया गया है। - अनुज सिंह, डीएम
विधानसभा का सत्र चल रहा है। मैं लखनऊ में हूं। जाति प्रमाणपत्र निरस्त होने की सूचना मुझे नहीं मिली है। लखनऊ से लौटने पर जरूरत पड़ी तो डीएम से मुलाकात करूंगा। - मोहम्मद फहीम, सपा विधायक, बिलारी
हमारी जाति झोजा होने से संबंधित मेरे पास सन 1911 से लेकर 2018 तक के पुश्तैनी पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्य हैं। इन साक्ष्यों को जनपद स्तरीय समिति को उपलब्ध कराया गया था। ऐसे साक्ष्य नजरअंदाज करके यदि समिति द्वारा कोई आदेश दिया गया है तो उसकी प्रति लेकर पुन: मंडलीय अपीलीय फोरम के समक्ष कानूनी प्रावधान के तहत अपील की जाएगी। मंडलीय अपीलीय फोरम से न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है। - हाजी मोहम्मद उस्मान, पूर्व प्रधान एवं विधायक के चाचा
