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जौहर विवि पर शिकंजा: जवाब में फंसा यूनिवर्सिटी प्रशासन, 2,500 छात्रों की पढ़ाई, परीक्षा व डिग्री को लेकर चिंता
Thu, 16 Jul 2026 01:53 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
Published by: Sharukh Khan
Updated Thu, 16 Jul 2026 01:53 PM IST
सार
रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय पर शिकंजा कस गया है। जौहर विश्वविद्यालय प्रशासन अपने ही जवाब में फंस गया है। दो भवनों की अनुमति बड़ा आधार बन गया है। जिला पंचायत से केवल दो निर्माणों की मंजूरी मिली थी। इसके बावजूद शेष 38 भवन बिना किसी स्वीकृति के निर्मित कर दिए गए।
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Jauhar University
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय में बिना विधिक स्वीकृति के निर्मित भवनों के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन अपने ही तर्कों में उलझ गया। रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के आदेश में कहा गया है कि विश्वविद्यालय ने स्वयं स्वीकार किया है कि दो भवनों के निर्माण के लिए जिला पंचायत से अनुमति ली गई थी। इससे स्पष्ट होता है कि प्रबंधन निर्माण कार्य के लिए सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति लेने की अनिवार्यता से पूरी तरह परिचित था। इसके बावजूद शेष 38 भवन बिना किसी स्वीकृति के निर्मित कर दिए गए।
डीएम अजय कुमार द्विवेदी के अनुसार आदेश में उल्लेख किया गया है कि जब दो भवनों के लिए अनुमति प्राप्त की जा सकती थी तो अन्य निर्माण बिना मंजूरी के करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। प्राधिकरण ने कहा कि निर्माण की वैधता का निर्धारण उस समय लागू कानून और सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त स्वीकृति के आधार पर होता है, न कि बाद में दिए गए कानूनी तर्कों से।
आदेश में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अपने पक्ष में मास्टर प्लान, जोनल प्लान तथा उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की विभिन्न धाराओं का हवाला दिया, लेकिन विस्तृत परीक्षण के बाद इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया गया। प्राधिकरण का निष्कर्ष है कि संबंधित प्रावधानों की गलत व्याख्या कर निर्माण को वैध साबित करने का प्रयास किया गया, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है।
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डीएम अजय कुमार द्विवेदी के अनुसार आदेश में उल्लेख किया गया है कि जब दो भवनों के लिए अनुमति प्राप्त की जा सकती थी तो अन्य निर्माण बिना मंजूरी के करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। प्राधिकरण ने कहा कि निर्माण की वैधता का निर्धारण उस समय लागू कानून और सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त स्वीकृति के आधार पर होता है, न कि बाद में दिए गए कानूनी तर्कों से।
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आदेश में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अपने पक्ष में मास्टर प्लान, जोनल प्लान तथा उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की विभिन्न धाराओं का हवाला दिया, लेकिन विस्तृत परीक्षण के बाद इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया गया। प्राधिकरण का निष्कर्ष है कि संबंधित प्रावधानों की गलत व्याख्या कर निर्माण को वैध साबित करने का प्रयास किया गया, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है।
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आरडीए ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की धारा-59 के तहत ऐसे अवैध निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है, चाहे बाद में संबंधित क्षेत्र विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल हुआ हो। इसलिए बिना स्वीकृति बने भवनों पर नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता पूरी तरह खुला है।
जौहर विश्वविद्यालय परिसर में बिना अनुमोदन निर्मित 38 भवनों के संबंध में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कभी भी की जा सकती है। प्राधिकरण का मानना है कि निर्माण संबंधी नियमों की अनदेखी किसी भी संस्था को विशेष अधिकार नहीं देती और सभी को समान रूप से कानून का पालन करना होगा।
प्रदेश सरकार की सख्त नीति का भी आदेश में उल्लेख
आदेश में प्रदेश सरकार की अवैध निर्माणों के विरुद्ध अपनाई गई सख्त नीति का भी उल्लेख किया गया है। कहा गया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भू-माफिया, अवैध निर्माणों और नियमों के विपरीत विकसित परिसरों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में विकास प्राधिकरणों को स्पष्ट किया गया है कि कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ बिना भेदभाव कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसी नीति के तहत जौहर विश्वविद्यालय के निर्माणों की भी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।
आदेश में प्रदेश सरकार की अवैध निर्माणों के विरुद्ध अपनाई गई सख्त नीति का भी उल्लेख किया गया है। कहा गया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भू-माफिया, अवैध निर्माणों और नियमों के विपरीत विकसित परिसरों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में विकास प्राधिकरणों को स्पष्ट किया गया है कि कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ बिना भेदभाव कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसी नीति के तहत जौहर विश्वविद्यालय के निर्माणों की भी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।
आसान नहीं हाईकोर्ट की राह... ट्रस्ट की याचिका पर पहले सुना जाएगा आरडीए का पक्ष
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की ओर से संचालित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद ट्रस्ट के लिए कानूनी राह आसान नहीं होगी। यदि ट्रस्ट हाईकोर्ट की शरण लेता है तो उससे पहले रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) का पक्ष भी सुना जाएगा। आरडीए इस मामले में पहले ही हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल कर चुका है।
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की ओर से संचालित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद ट्रस्ट के लिए कानूनी राह आसान नहीं होगी। यदि ट्रस्ट हाईकोर्ट की शरण लेता है तो उससे पहले रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) का पक्ष भी सुना जाएगा। आरडीए इस मामले में पहले ही हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल कर चुका है।
38 भवनों के नोटिस के बाद ही प्राधिकरण ने दाखिल कर दी थी कैविएट
आरडीए ने 28 जून को बिना मानचित्र स्वीकृति निर्मित 38 भवनों के संबंध में नोटिस जारी कर प्रबंधन से 15 दिन में जवाब मांगा था। समयावधि पूरी होने के बाद व्यक्तिगत सुनवाई में विश्वविद्यालय का पक्ष सुना गया। इसके बाद आरडीए के उपाध्यक्ष एवं डीएम ने 38 भवनों को अवैध मानते हुए उनके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया।
आरडीए ने 28 जून को बिना मानचित्र स्वीकृति निर्मित 38 भवनों के संबंध में नोटिस जारी कर प्रबंधन से 15 दिन में जवाब मांगा था। समयावधि पूरी होने के बाद व्यक्तिगत सुनवाई में विश्वविद्यालय का पक्ष सुना गया। इसके बाद आरडीए के उपाध्यक्ष एवं डीएम ने 38 भवनों को अवैध मानते हुए उनके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया।
अब विश्वविद्यालय के पास हाईकोर्ट में याचिका दायर करने या रामपुर विकास प्राधिकरण में नियमानुसार कंपाउंडिंग समेत निर्धारित शुल्क जमा कर निर्माण को वैध कराने का विकल्प है। जानकारों के अनुसार, आरडीए की ओर से पहले ही कैविएट दाखिल किए जाने के कारण हाईकोर्ट में किसी भी याचिका पर प्रशासन का पक्ष भी सुना जाएगा।
जौहर यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण आदेश से छात्रों में भविष्य को लेकर चिंता
जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद यहां अध्ययनरत छात्रों और उनके अभिभावकों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। यूनिवर्सिटी में करीब 2,500 से अधिक छात्र विभिन्न स्नातक, स्नातकोत्तर और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत हैं, जिनमें दूसरे जिलों और राज्यों के विद्यार्थी भी शामिल हैं।
जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद यहां अध्ययनरत छात्रों और उनके अभिभावकों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। यूनिवर्सिटी में करीब 2,500 से अधिक छात्र विभिन्न स्नातक, स्नातकोत्तर और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत हैं, जिनमें दूसरे जिलों और राज्यों के विद्यार्थी भी शामिल हैं।
ढाई हजार से अधिक विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षाओं और डिग्री को लेकर बढ़ी चिंता
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि यदि शैक्षणिक भवन प्रभावित होते हैं तो कक्षाएं, प्रयोगशालाएं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां बाधित हो सकती हैं। इससे परीक्षाओं, डिग्री और आगामी शैक्षणिक सत्र पर भी असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि यदि शैक्षणिक भवन प्रभावित होते हैं तो कक्षाएं, प्रयोगशालाएं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां बाधित हो सकती हैं। इससे परीक्षाओं, डिग्री और आगामी शैक्षणिक सत्र पर भी असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
जौहर यूनिवर्सिटी एक नजर में
- जौहर विवि एक निजी विश्वविद्यालय है जो रामपुर में मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की ओर से संचालित होता है। इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मान्यता प्राप्त है।
-2006 में विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। इसके चांसलर सपा नेता आजम खां हैं।
-कुल तीन सौ हेक्टेयर में है विश्वविद्यालय
- जौहर विवि एक निजी विश्वविद्यालय है जो रामपुर में मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की ओर से संचालित होता है। इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मान्यता प्राप्त है।
-2006 में विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। इसके चांसलर सपा नेता आजम खां हैं।
-कुल तीन सौ हेक्टेयर में है विश्वविद्यालय
इन कोर्स का होता है संचालन
बीटेक, एमटेक, इंजीनियरिंग डिप्लोमा, पाॅलीटेक्निक, बीसीए, एमबीए, बीबीए, एमकॉम, एमए, मास्टर ऑफ टूरिज्म एवं ट्रेवल, बीए, विधि संकाय, बीएएलएलबी, एमएससी, बीएससी, एम फार्मा, बी फार्मा, डीफार्मा, बीएड, डिप्लोमा इन नर्सिंग।
बीटेक, एमटेक, इंजीनियरिंग डिप्लोमा, पाॅलीटेक्निक, बीसीए, एमबीए, बीबीए, एमकॉम, एमए, मास्टर ऑफ टूरिज्म एवं ट्रेवल, बीए, विधि संकाय, बीएएलएलबी, एमएससी, बीएससी, एम फार्मा, बी फार्मा, डीफार्मा, बीएड, डिप्लोमा इन नर्सिंग।
जौहर विश्वविद्यालय पर लटकी तलवार, ध्वस्त होंगे 38 भवन
सपा के कद्दावर नेता आजम खां के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर बुलडोजर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के उपाध्यक्ष/डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने विश्वविद्यालय परिसर में बने 40 में से 38 भवनों को बिना नक्शा पास कराए बनाने पर अवैध मानते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन को 20 दिन में खुद हटा लेने और अन्यथा की स्थिति में प्राधिकरण द्वारा ध्वस्त कराने के आदेश दिए हैं।
सपा के कद्दावर नेता आजम खां के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर बुलडोजर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के उपाध्यक्ष/डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने विश्वविद्यालय परिसर में बने 40 में से 38 भवनों को बिना नक्शा पास कराए बनाने पर अवैध मानते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन को 20 दिन में खुद हटा लेने और अन्यथा की स्थिति में प्राधिकरण द्वारा ध्वस्त कराने के आदेश दिए हैं।
यह आदेश प्राधिकरण द्वारा कुछ दिन पूर्व आरडीए द्वारा जौहर विश्वविद्यालय को जारी नोटिस के सापेक्ष बुधवार को निर्धारित व्यक्तिगत सुनवाई के बाद दिया गया। इस सुनवाई के लिए विश्वविद्यालय के डिप्टी रजिस्ट्रार, अधिवक्ता तथा कुछ प्रतिनिधि आरडीए के वीसी की भूमिका निभा रहे डीएम के समक्ष पेश हुए थे। इनके जवाब और तर्कों को संतोषजनक न मानते हुए वीसी/डीएम ने 38 भवनों को अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्त करने का आदेश पारित कर दिया। इस कार्रवाई के बाद कुल 40 भवनों वाले विश्वविद्यालय में सिर्फ मेडिकल भवन और अकादमिक ब्लॉक ही बचेंगे।
डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि रामपुर के मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण की जांच आरडीए के क्षेत्रीय अवर अभियंता की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई थी। इसमें विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आठ जुलाई को अपना जवाब दाखिल किया था। इसमें 15 जुलाई को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिया गया था। इसी क्रम में विश्वविद्यालय और रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारी और अधिवक्ता बुधवार को उपस्थित हुए।
डीएम के मुताबिक सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से तर्क दिया गया कि विश्वविद्यालय सींगनखेड़ा गांव की भूमि पर बना है। 27 सितंबर-2024 से पहले आरडीए के विकास क्षेत्र में सींगनखेड़ा गांव शामिल नहीं था। इसलिए आरडीए से नक्शा स्वीकृत कराने की आवश्यकता नहीं थी। यह क्षेत्र नगर पालिका में भी नहीं था। निर्माण काफी पहले का है, जिसे वर्तमान नियमों के आधार पर अवैध नहीं माना जा सकता।
विश्वविद्यालय पक्ष की इन दलीलों को आरडीए ने स्वीकार नहीं किया। यह माना गया कि भले ही यह स्थान आरडीए या नगर पालिका क्षेत्र में शामिल नहीं था लेकिन मेडिकल भवन और अकादमिक ब्लॉक के भवन का मानचित्र जिला पंचायत से पास कराया गया है, तो शेष 38 भवनों का मानचित्र स्वीकृत क्यों नहीं कराया गया। दो भवनों का मानचित्र स्वीकृत कराने से यह भी साबित होता है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन को नियमों की जानकारी थी।
इसी आधार पर बिना मानचित्र स्वीकृत कराए बने 38 भवनों को अवैध निर्माण मानते हुए उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा-27(1) के तहत प्रदत्त अधिकारों व प्रावधानों के अंतर्गत इनके ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया जा रहा है।
आदेश में कहा गया है कि प्रतिवादीगण इस अवैध निर्माण को 20 दिनों के अंदर स्वयं हटाकर इस कार्यालय को सूचित करें, अन्यथा आरडीए द्वारा निर्धारित अवधि के बाद ध्वस्त कराया जाएगा। इस स्थिति में ध्वस्तीकरण पर होने वाला समस्त व्यय उक्त अधिनियम की धारा 40 के तहत भू-राजस्व बकाया की तरह वसूल किया जाएगा।