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जौहर विवि पर शिकंजा: यूनिवर्सिटी पर मेहरबान थी सरकार, आजम के इशारे पर बरसता था खजाना, चर्चा में ये परियोजनाएं

Sat, 18 Jul 2026 03:11 PM IST
Sharukh Khan मोहित सक्सेना, अमर उजाला, रामपुर
मोहित सक्सेना, अमर उजाला, रामपुर Published by: Sharukh Khan Updated Sat, 18 Jul 2026 03:11 PM IST
सार

जौहर विवि पर शिकंजा कसा गया है। सपा शासन में जिस समय जौहर यूनिवर्सिटी को न सिर्फ स्वीकृति मिली थी उस वक्त विश्वविद्यालय पर सरकार मेहरबान थी। आजम के इशारे पर खजाना बरसता था। पुल, सड़क, पेयजल, भवन और भूमि आवंटन से जुड़ी परियोजनाएं चर्चा में वर्षों रही थीं।

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Johar University Row Government-Funded Projects Back in Focus as Crackdown on Azam Khan University Intensifies
आजम खां की जौहर यूनिवर्सिटी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सपा नेता आजम खां के सपनों पर तामीर हुई जौहर यूनिवर्सिटी को सपा शासन में न सिर्फ स्वीकृति मिली थी बल्कि इस पर जमकर सरकारी धन भी बरसा था। तब के नगर विकास मंत्री आजम खां के इशारे पर अलग-अलग विभागों से जुड़ी कई परियोजनाओं को सरकारी मंजूरी मिली। लोक निर्माण विभाग, जल निगम समेत विभिन्न विभागों के माध्यम से करोड़ों रुपये की योजनाएं स्वीकृत की गईं। 
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सरकार बदलने के बाद इन परियोजनाओं और उनसे जुड़े मामलों की समीक्षा शुरू हुई। हाल में जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर कार्रवाई के बाद यह विषय फिर चर्चा में है। रामपुर में 146 करोड़ रुपये की लागत से यूपी का सबसे बड़ा पुल जौहर विश्वविद्यालय के लिए बनाया गया था, जबकि दूसरा पुल करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से तहसील से आजम खां के घर तक बनाया गया था। इसकी शिकायत शासन से की गई थी, जिस पर जांच भी हुई। 
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इसके अलावा जौहर विश्वविद्यालय के सामने बनी दीवार और जौहर शोध संस्थान को लीज पर देने की भी शिकायत की गई थी, जिस पर कार्रवाई हुई। सपा सरकार में सरकारी धन का व्यापक स्तर पर दुरुपयोग किया गया। - आकाश सक्सेना, शहर विधायक, रामपुर
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परियोजना-1
दीवार, जमीन और निर्माण आज भी विवादों में

 जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े सरकारी भूमि, शत्रु संपत्ति, कोसी नदी की जमीन, सड़क, पुल और निर्माण कार्यों से संबंधित मामले आज भी अदालतों और प्रशासनिक जांच का हिस्सा हैं। विवि के सामने गांव की ओर बनाई गई दीवार का ग्रामीणों ने विरोध किया था। हाल में 38 भवनों पर कार्रवाई के बाद इन मामलों पर फिर चर्चा शुरू हुई है।
 

विवि परिसर के भीतर बनी 3.5 किमी सड़क
लोक निर्माण विभाग ने विवि के मुख्य गेट से दूसरे गेट तक करीब 3.5 किलोमीटर सड़क का निर्माण कराया, जिस पर करीब 13 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई। बाद में मामला उठने पर विभाग ने गेट के बाहर इसे आम रास्ता दर्शाने वाला बोर्ड लगा दिया।

 

विश्वविद्यालय तक पहुंच के लिए बनाया गया लंबा फ्लाईओवर 
समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान एकता तिराहे से जौहर विश्वविद्यालय तक करीब पांच किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर बनाया गया। पुल के निर्माण पर करीब 146 करोड़ रुपये खर्च हुए। पुल के निर्माण, औचित्य, भूमि आवंटन और नियमों के पालन को लेकर उस समय विवाद और शिकायतें भी हुईं। मामला न्यायालय तक भी पहुंचा था।

पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस का बदला गया प्रवेश मार्ग 
जौहर विश्वविद्यालय परिसर में स्थित लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस का मुख्य प्रवेश द्वार पहले विश्वविद्यालय की ओर था। सरकार बदलने के बाद शिकायतों के आधार पर इसका मुख्य गेट सड़क की ओर खोल दिया गया। बाद में इसका नाम एपीजे अब्दुल कलाम गेस्ट हाउस रखा गया। वर्तमान में इसका संचालन लोक निर्माण विभाग कर रहा है।
 

पानी की टंकियों और सड़कों पर हुआ सरकारी खर्च
 विश्वविद्यालय और आसपास के क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था के लिए पानी की टंकियां बनाई गईं। संपर्क मार्गों के चौड़ीकरण और सड़क निर्माण पर भी सरकारी धन खर्च किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में निर्मित पानी की टंकी का उपयोग परिसर में ही किया जाता है।

 

आवास तक बने पुल को लेकर भी उठे सवाल
तहसील सदर से आजम खां के आवास तक पुल का निर्माण कराया गया था। इसके औचित्य और आवश्यकता को लेकर भी उस समय सवाल उठे और यह परियोजना चर्चा में रही।
 

विश्वविद्यालय परिसर के भीतर बनी 3.5 किलोमीटर सड़क
लोक निर्माण विभाग ने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट से दूसरे गेट तक करीब 3.5 किलोमीटर सड़क का निर्माण कराया, जिस पर करीब 13 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई। बाद में मामला उठने पर विभाग ने गेट के बाहर इसे आम रास्ता दर्शाने वाला बोर्ड लगा दिया।

 

100 रुपये वार्षिक लीज पर दिए गए भवन और भूमि
अल्पसंख्यक विभाग की ओर से जौहर शोध संस्थान के लिए करोड़ों रुपये की लागत से भवन बनाया गया था, जिसमें बाद में रामपुर पब्लिक स्कूल संचालित हुआ। सरकार बदलने के बाद इसकी लीज निरस्त कर भवन वापस सरकारी नियंत्रण में ले लिया गया। इसी प्रकार शिक्षा विभाग की भूमि भी 100 रुपये वार्षिक लीज पर दी गई थी, जहां आरपीएस गर्ल्स स्कूल और सपा कार्यालय संचालित हुआ। वर्ष 2022 में इन संपत्तियों की लीज निरस्त कर दी गई।
 
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