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बेटियों को कुत्तों ने नोचकर मार डाला: बिलख रहे नुरसद व रिया के परिवार, मुरादाबाद के अफसरों को नहीं आ रही लाज

अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: विमल शर्मा Updated Thu, 22 Jan 2026 08:13 PM IST
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सार

मुरादाबाद और संभल में खूंखार कुत्तों ने दो बच्चियों की जान ले ली। मासूमों को याद कर परिवार बिलख रहे हैं लेकिन सिस्टम को फिर भी लाज नहीं आ रही।

Moradabad: Daughters mauled death by dogs; families of Nursad and Riya are heartbroken
कुत्तों के हमले नुरसद और रिया ने गंवाई जान - फोटो : संवाद
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विस्तार
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मुरादाबाद के डिलारी के गांव काजीपुरा में मासूम नुरसद (4) की मां के आंसू थम नहीं रहे हैं। जिस फूल सी बेटी से उसके घर का आंगन महकता था वहां मातम पसरा है। बेटी को याद करके परिवार बिलख रहा है लेकिन सिस्टम को फिर भी लाज नहीं आ रही।

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खूंखार हो चुके कुत्तों को पकड़ने के लिए केवल बातें ही हो रही हैं। संभल के पौटा गांव में नौ साल की रिया (9) को कुत्तों ने मार डाला था लेकिन वहां दोबारा कोई घटना न हो इसके लिए कुत्तों की धरपकड़ शुरू नहीं कराई गई। पौटा गांव में बंटी के घर भी 11 जनवरी से मातम पसरा है।
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बंटी की नौ साल की बेटी रिया को कुत्तों ने नोचकर मार डाला था। वह खेत से अपने घर लौट रही थी। उस दिन जरूर अफसरों ने तेजी दिखाई लेकिन उसके बाद कुत्तों को पकड़ने के लिए कहीं कोई अभियान नहीं चला। दो बेटियों की मौत के बाद भी सिस्टम की नींद नहीं टूटी है।

हर रोज कुत्ते लोगों पर हमला कर रहे हैं। मोहल्लों से लेकर काॅलोनियों तक खौफ फैला है मगर सिस्टम है कि केवल बातें कर रहा है। श्वान समिति गठित करके झाड़ा पल्ला : संभल में एक श्वान समिति का गठन किया गया है। लेकिन इस समिति ने अभी तक कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया है। जबकि संभल में बुधवार को भी 15 लोगों पर कुत्तों ने हमला किया।

इन मोहल्लों में कुत्तों का ज्यादा आतंक
आवारा कुत्तों का आतंक पुराने शहर की सड़कों से लेकर शहर की पॉश कॉलोनियों तक है। मुगलपुरा, असालतपुरा, अंडे वालान, बारादरी, इंद्रा चौक, कटघर, जामा मस्जिद, रामगंगा विहार, आशियाना, जिगर कॉलोनी, दीनदयाल नगर, हरथला, हिमगिरी, नवीन नगर, लाइनपार, बुद्धि विहार, करुला, डबल फाटक समेत कुछ स्थानों पर कुत्तों का ज्यादा आतंक है।

166 लोगों को कुत्तों ने काटा चार को लगे गहरे दांत
मुरादाबाद जिले में आवारा कुत्तों का आतंक नहीं थम रहा है। बुधवार को जिलेभर में 166 लोगों को कुत्तों ने काट लिया। जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रोजाना ऐसे ही आंकड़े नजर आते हैं। अकेले जिला अस्पताल में हर दिन 110-120 नए मरीज एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचते हैं।

इसके बावजूद कुत्तों पर नियंत्रण की जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग खामोश हैं। जिले में कई स्थानों पर कुत्तों ने बच्चों को निशाना बनाया है लेकिन सिस्टम की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अलग-अलग विभागों के अपने दावे हैं लेकिन कुत्तों का आतंक उन पर भारी है।

जिला अस्पताल में बुधवार को 112 लोगों को एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई गई। डॉक्टरों के मुताबिक चार लोगों को गहरे दांत लगने के कारण इमरजेंसी में भेजा गया। वहां से उपचार के बाद लोग घर चले गए। कांठ, ठाकुरद्वारा, मूंढापांडे, अगवानपुर आदि स्थानों से भी वैक्सीन लगवाने लोग जिला अस्पताल में आ रहे हैं।

हालांकि सीएचसी पर भी वैक्सीन उपलब्ध हैं। अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संगीता गुप्ता का कहना है कि दो बजे तक ओपीडी में वैक्सीन लगाई जाती है। इसके बाद लोग इमरजेंसी में आकर उपचार ले सकते हैं।

अस्पताल में रोजाना आ रहे 100-120 केस 
कुत्तों के काटने के मामलों का असर जिला अस्पताल में भी साफ दिख रहा है। अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक हर दिन करीब सौ से 100 मरीज रेबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन के लिए लंबी कतारें लग रही हैं।

अस्पताल में रोजाना आ रहे 100-120 केस 
मुरादाबाद में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक को काबू में करने के लिए नगर निगम की ओर से चलाया जा रहा नसबंदी अभियान जमीनी स्तर पर नाकाम साबित होता दिख रहा है। निगम की ओर से करीब साढ़े तीन महीने में 40 लाख रुपये खर्च किए जाने के बाद भी शहरवासियों को रोजाना कुत्तों के डर के साये में जीना पड़ रहा है।

आए दिन किसी न किसी मोहल्ले से कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं जिससे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में दहशत है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार पांच अक्तूबर से अब तक मैनाठेर स्थित एबीसी सेंटर में 3992 कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है।

कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन पर प्रति कुत्ता 1020 रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस हिसाब से अब तक करीब 40 लाख रुपये की राशि इस अभियान पर खर्च हो चुकी है। नसबंदी के बाद कुत्तों को चार से पांच दिनों तक निगरानी में रखा जाता है ताकि उनकी स्थिति सामान्य होने के बाद ही उन्हें छोड़ा जा सके।

निगम का यह भी कहना है कि प्रतिदिन औसतन 50 कुत्तों की नसबंदी की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। निगम के इस दावे के बावजूद हालात में कोई खास सुधार नजर नहीं आ रहा है। शहर में आवारा कुत्तों की अनुमानित संख्या करीब 60 हजार मानी जा रही है।

ऐसे में अब तक की गई नसबंदी कुल आबादी के मुकाबले बेहद कम है। यही वजह है कि गलियों, चौराहों और रिहायशी इलाकों में कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं और इनकी संख्या में कोई कमी नहीं नजर आ रही है।

कुत्तों को पकड़ने के लिए शासन स्तर से एसओपी जारी की गई है। शहरी और ग्रामीण स्तर पर कार्ययोजना बनाई गई है। सभी खंड विकास अधिकारियों को एसओपी के तहत कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है। - अनुज सिंह, डीएम

हर दिन 50 कुत्तों की नसबंदी की जा रही है। कंट्रोल रूम से मिली शिकायत के आधार पर हमारी टीम संबंधित इलाके में पहुंचती है। नसबंदी का अभियान तेज गति से चल रहा है। - अजीत कुमार, अपर नगर आयुक्त

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