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Moradabad: भाजपा का झंडा लगी गाड़ी में सवारी, खनन रोकने गए तहसीलदार पर भारी, डीएम ने रोका वेतन...जांच शुरू

अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: विमल शर्मा Updated Sun, 11 Jan 2026 11:27 AM IST
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सार

ठाकुरद्वारा के तहसीलदार प्रवीण कुमार के अवैध खनन रोकने के दौरान भाजपा का झंडा लगी गाड़ी के इस्तेमाल का वीडियो वायरल हो रहा है। इस पर डीएम अनुज सिंह ने तहसीलदार का वेतन रोकते हुए जांच एडीएम फाइनेंस को सौंपी है। तहसीलदार का दावा है कि उनकी सरकारी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उन्होंने लिफ्ट ली थी। 

Moradabad: Riding in car displaying BJP flag, Tehsildar who went stop illegal mining faced strong resistance
भाजपा का झंडा लगी गाड़ी में बैठे तहसीलदार प्रवीण कुमार - फोटो : संवाद
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विस्तार
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ठाकुरद्वारा के तहसीलदार प्रवीण कुमार द्वारा अवैध खनन की रोकथाम के सफर में भाजपा नेता की गाड़ी के इस्तेमाल को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। भाजपा का झंडा लगी गाड़ी से उतरते तहसीलदार का वीडियो वायरल होने पर डीएम अनुज सिंह ने प्रवीण कुमार का वेतन रोकते हुए एडीएम फाइनेंस को मामले की जांच सौंप दी।

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एडीएम फाइनेंस ममता मालवीय ने बताया कि जांच के क्रम में ठाकुरद्वारा के तहसीलदार को सोमवार को तलब किया है। बयान दर्ज किए जाएंगे। तहसीलदार के कारनामे का वीडियो दो दिन से वायरल है। तहसीलदार ने बताया कि नो एंट्री में काशीपुर (उत्तराखंड) से खनन के डंपर आने की सूचना पर वह चेकिंग के लिए निकले थे। चेकिंग में दो डंपर पकड़ लिए थे। 
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तहसीलदार के मुताबिक कार्रवाई के बाद लौटते समय उनकी सरकारी गाड़ी कोहरे में पेड़ से टकरा गई। इस दौरान वहां से गुजर रही एक गाड़ी से लिफ्ट ली थी। उसी गाड़ी पर भाजपा का झंडा लगा था। इस मामले में वह डीएम से मुलाकात करके अपनी सफाई पेश कर चुके हैं। दूसरी ओर भाजपा की झंडा लगी गाड़ी का खनन जैसे संवेदनशील मामले में इस्तेमाल इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।

प्रकरण संज्ञान में आने पर डीएम ने तहसीलदार प्रवीण कुमार का वेतन रोक दिया। डीएम के निर्देश पर एडीएम फाइनेंस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। सोमवार को मुरादाबाद में पेश होकर तहसीलदार को बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। जानकारों का मानना है कि इस मामले में तहसीलदार पर गाज गिरना लगभग तय है।

बड़ा सवाल, गाड़ी खराब होने पर पुलिस की क्यों नहीं मांगी मदद 
खनन जैसे संवेदनशील मामले में चेकिंग की प्रक्रिया के दौरान तहसीलदार द्वारा भाजपा का झंडा लगी गाड़ी के प्रयोग से कई सवाल खड़े हो गए हैं। बड़ा सवाल यह है कि चेकिंग से लौटते समय सरकारी गाड़ी खराब होने  की बात सच है तो तहसीलदार ने स्थानीय पुलिस या एसडीएम से मदद क्यों नहीं मांगीं। जबकि फोन नंबर 112 डायल करके आम लोग भी मुसीबत में पुलिस की मदद ले लेते हैं।

सवाल यह भी है कि अवैध खनन विरोधी छापे या चेकिंग के लिए निकलते समय तहसीलदार ने क्या संबंधित थाने की पुलिस को साथ नहीं लिया था। जबकि पूर्व में इस तरह की जांचों में खनन माफिया की तरफ से हमले की घटनाएं मंडल में हो चुकी हैं। ऐसे में बिना सुरक्षा अवैध खनन पकड़ने की बात कितनी व्यावहारिक है, इसका स्पष्ट जवाब फिलहाल तहसीलदार की तरफ से नहीं  आया है।

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