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Moradabad News: महदूद कलमी में लगे पिंजरे में फंसा तेंदुआ है उम्रदराज, घिस चुके हैं दांत
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Fri, 03 Apr 2026 01:57 AM IST
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कांठ। बच्ची सिदरा पर हमला करने के बाद महदूद कलमी में लगे पिंजरे में बुधवार की रात फंसा तेंदुआ पूर्ण व्यस्क और उम्रदराज है। जिसकी उम्र करीब 12 साल आंकी गई है। वहीं मेडिकल परीक्षण में उसके कीले व दांत घिसे हुए पाए गए हैं। तेंदुए को कहां छोड़ा जाएगा, इस पर अभी वन विभाग के अधिकारी मंथन कर रहे हैं।
बृहस्पतिवार को डिप्टी वन रेंजर पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि महदूद कलमी में पकड़े गए तेंदुए को फिलहाल डियर पार्क मुरादाबाद में ही रखा गया है। उन्होंने बताया कि यह तेंदुआ नर और उम्रदराज है। वैसे तो वह पूरी तरह से स्वस्थ है लेकिन मेडिकल परीक्षण के दौरान उसके कीले और दांत घिसे होने की बात सामने आई है। उसे कहां छोड़ा जाए, फिलहाल वन विभाग के अधिकारी इस पर मंथन कर रहे हैं।
कांठ क्षेत्र में एक साल में पकड़े गए नौ तेंदुए, मिल चुके हैं कई शावक
कांठ। वन विभाग ने कांठ और छजलैट क्षेत्र को पहले से ही तेंदुआ बाहुल्य घोषित किया हुआ है। एक साल में अब तक तहसील कांठ क्षेत्र में नौ तेंदुए पकड़े भी जा चुके हैं। जिसमें गांव खूंटखेड़ा, नक्संदाबाद, कासमपुर, अकबरपुर चैदरी, साहूपुर स्कूल, पचोकरा, संदलीपुर, महदूद कलमी सहित क्षेत्र में नौ तेंदुए जीवित पकड़े भी जा चुके हैं। वहीं 17 फरवरी को कांठ के गांव नसीरपुर में एक तेंदुए खेत में मृत अवस्था में मिला था। वहीं क्षेत्र के जेबड़ा, दयानाथपुर, फजलाबाद, शेरपुर आदि में तेंदुए के शावक भी मिल चुके हैं, जिन्हें उनके प्राकृतिक आवास तक भी पहुंचाया जा चुका है, लेकिन इसके बाद भी क्षेत्र में लगातार तेंदुए दिखाई दे रहे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि एक-दो नहीं कई तेंदुए होने की संभावना है। संवाद
तेंदुओं के छिपने के लिए गन्ने के खेत सुरक्षित स्थान
कांठ। क्षेत्र में तेंदुओं के छिपने के लिए गन्ने के खेत एक सुरक्षित स्थान माने जाते हैं। तेंदुओं का ज्यादा दिखाई देना और हमला किए जाने के पीछे गन्ने की कटाई से खाली हुए खेत और बढ़ी रही गर्मी को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। जानकारी बताते हैं कि तेंदुए के लिए तराई का छायादार क्षेत्र अनुकूल माना जाता है। संवाद
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कांठ क्षेत्र में एक साल में पकड़े गए नौ तेंदुए, मिल चुके हैं कई शावक
कांठ। वन विभाग ने कांठ और छजलैट क्षेत्र को पहले से ही तेंदुआ बाहुल्य घोषित किया हुआ है। एक साल में अब तक तहसील कांठ क्षेत्र में नौ तेंदुए पकड़े भी जा चुके हैं। जिसमें गांव खूंटखेड़ा, नक्संदाबाद, कासमपुर, अकबरपुर चैदरी, साहूपुर स्कूल, पचोकरा, संदलीपुर, महदूद कलमी सहित क्षेत्र में नौ तेंदुए जीवित पकड़े भी जा चुके हैं। वहीं 17 फरवरी को कांठ के गांव नसीरपुर में एक तेंदुए खेत में मृत अवस्था में मिला था। वहीं क्षेत्र के जेबड़ा, दयानाथपुर, फजलाबाद, शेरपुर आदि में तेंदुए के शावक भी मिल चुके हैं, जिन्हें उनके प्राकृतिक आवास तक भी पहुंचाया जा चुका है, लेकिन इसके बाद भी क्षेत्र में लगातार तेंदुए दिखाई दे रहे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि एक-दो नहीं कई तेंदुए होने की संभावना है। संवाद
तेंदुओं के छिपने के लिए गन्ने के खेत सुरक्षित स्थान
कांठ। क्षेत्र में तेंदुओं के छिपने के लिए गन्ने के खेत एक सुरक्षित स्थान माने जाते हैं। तेंदुओं का ज्यादा दिखाई देना और हमला किए जाने के पीछे गन्ने की कटाई से खाली हुए खेत और बढ़ी रही गर्मी को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। जानकारी बताते हैं कि तेंदुए के लिए तराई का छायादार क्षेत्र अनुकूल माना जाता है। संवाद