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UP: पूर्वांचल के जिलों में खोले गए फर्जी खाते, जीएसटी चोरी के 989 रुपये करोड़ डाले, उत्तराखंड में रची गई साजिश

अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: विमल शर्मा Updated Sat, 07 Feb 2026 01:02 PM IST
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सार

जीएसटी चोरी के मामले में एसआईटी जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। पता चला है कि उत्तराखंड में सबसे ज्यादा फर्जी फर्में बनाई गईं। इसके बाद फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों का लेनदेन दिखाकर आईटीसी क्लेम लिया गया। करीब 989 करोड़ रुपये पूर्वांचल के कई जिलों के खातों में ट्रांसफर हुए। 

UP: Fake accounts opened in Purvanchal districts, Rs 989 crore deposited to evade GST
जीएसटी चोरी का मामला - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

उत्तराखंड के जसपुर में जीएसटी चोरी के लिए सबसे ज्यादा फर्जी फर्म बनाई गई थीं। एसआईटी की जांच में इसका खुलासा हो रहा है। वहीं जीएसटी चोरी के 989 करोड़ रुपये पूर्वांचल के जिलों में खोले गए खातों में पहुंच गए हैं। एसआईटी इन लोगों की तलाश में जुट गई है अब तक छह लोग गिरफ्तार भी किए जा चुके हैं।

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मुरादाबाद में जीएसटी चोरी और आईटीसी क्लेम लेने के मामले में अलग अलग थानों में राज्य कर विभाग के अधिकारियों की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है। अब तक छह लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। इसमें एक आरोपी जसपुर का रहने वाला है।
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उसने दिल्ली में सीए के पास रहकर नौकरी की थी। जसपुर में लकड़ी का बड़ा कारोबार है। यहां से देश के अलग अलग हिस्सों में लकड़ी की सप्लाई की जाती है। इसकी आड़ में आकर फर्जी फर्म बनाकर फर्जी बिल तैयार कर करोड़ों का लेनदेन दिखाकर आईटीसी क्लेम भी ले लिया गया है। 

जसपुर के छह आरोपी बिजनौर पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है जबकि मुरादाबाद की एसआईटी भी एक आरोपी को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा पांच और आरोपी एसआईटी ने गिरफ्तार किए हैं। जांच में सामने आया है कि जीएसटी चोरी के 989 करोड़ रुपये वाराणसी, भदोही, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर और मिर्जापुर के कुछ लोगों के खातों में गए हैं।

टीम इन खाता धारकों के बारे में जानकारी जुटा रही है। एसएसपी सतपाल अंतिल ने बताया कि जीएसटी चोरी के मामले में एसआईटी जांच कर रही है। अब तक छह आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं अन्य की तलाश में साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

बोगस फर्म मामले में जिले के एक ग्रुप की कुंडली खंगाली जा रही
राज्य कर विभाग के अधिकारी स्क्रैप के कारोबार से जुड़े जिले के एक ग्रुप की बोगस फर्मों की कुंडली खंगालने में जुट गए हैं। इस मामले में दिल्ली के अधिकारियों से रिकार्ड मांगे गए हैं। पता चला है कि यह ग्रुप फर्जी कागजात के सहारे पंजाब में  स्क्रैप की सप्लाई कराता है। राज्य कर विभाग के मोबाइल दस्ते की टीम ने 29 जनवरी को  हाईवे पर चेकिंग अभियान के तहत मूंढापांडे में आयरन स्क्रैप की चार, रामपुर में एक और बिजनौर में दो गाड़ियों को रोक लिया था।

जांच के दौरान ई वे बिल संदिग्ध पाए गए। पूछताछ के दौरान चालकों ने बताया कि आयरन स्क्रैप की गाड़ियां पंजाब के गोविंदगढ़ में जा रही हैं। राज्य कर अधिकारियों को आशंका है कि स्क्रैप का माल बोगस फर्मों के गिरोह से जुड़ा है। इसी प्रकार 30 जनवरी को भी एक स्क्रैप लदी गाड़ी पकड़ी गई थी।

राज्य कर अधिकारियों ने स्क्रैप की गाड़ियों के ई वे बिल के साथ पंजीकरण के मोबाइल नंबर को चेक किया। जांच के दौरान पता चला जिले का एक ग्रुप सबसे अधिक स्क्रैप लदे वाहनों को पंजाब भेज रहा है। इस ग्रुप ने दिल्ली में पांच से अधिक फर्मों का पंजीयन कराया है।

राज्य कर अधिकारियों ने दिल्ली के अधिकारियों से बातचीत कर दो ग्रुपों का रिकार्ड मांगा है। रिकार्ड से मिलान से पता चल सकेगा कि इस ग्रुप ने दिल्ली और यूपी के अलावा किन राज्यों से पंजीयन कराया है। इस बारे में पूछने पर अपर आयुक्त ग्रेड -2 आरए सेठ ने बताया कि स्क्रैप गिरोह की जांच चल रही है।

जांच में 335 बोगस फर्मों में पकड़ी गई थी जीएसटी चोरी
 राज्य कर विभाग की जांच के दौरान एके इंटरप्राइजेज से जुड़ी 335 बोगस फर्मों से जीएसटी चोरी का मामला सामने आया था। इस मामले में एसआईटी आधा दर्जन से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है लेकिन मास्टर माइंड शाहिद अभी पकड़ा नहीं गया है। एसआईटी ने मेरठ जिले के शास्त्री नगर निवासी इखलाक मलिक और उसके साथी शाहजहांपुर जिले के चमकनी गरिपुरा निवासी इत्तेफात आलम उर्फ दानिश को गिरफ्तार कर  जीएसटी चोरी का खुलासा किया था।

गिरफ्तार आरोपी इखलाक की डायरी से स्क्रैप से जुड़ी  535 फर्मों के नाम और नंबर मिले थे। राज्य कर के अपर आयुक्त ग्रेड -1 अशोक कुमार सिंह के नेतृत्व में अधिकारियों ने फर्मों की जांच कराई तो एके इंटरप्राइजेज से जुड़ी सिर्फ 335 फर्में पाई गईं। इन फर्मों के माध्यम से आरोपियों ने 5478.35 करोड़ का टर्नओवर करना प्रकाश में आया था। साथ ही 989.13 करोड़ की जीएसटी चोरी पकड़ी गई।

जीएसटी चोरी का दायरा बढ़ने पर शासन ने जांच एसआईटी को सौंप दी थी। अपर आयुक्त ग्रेड -2 आरए सेठ ने बताया था कि  एके ग्रुप ने देश के कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक 22 राज्यों में बोगस फर्मों का पंजीयन कराया था। इसमें सबसे अधिक दिल्ली और गुजरात की बोगस फर्में शामिल हैं। जांच के बाद राज्य कर विभाग ने एसआईटी को मोबाइल नंबर, ई मेल आईडी सबूत भी दिए थे। एसआईटी को  गिरफ्तार आरोपी इखलाक मलिक ने बताया था कि उसका गुरु मेरठ का रहने वाला शाहिद है। 

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