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Muzaffarnagar News: आश्वासन के भंवर में 23 गांव, विकास तो दूर सर्वे के लिए भी मजबूर
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प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में चयनित पुरकाजी क्षेत्र के गांव झबरपुर की जर्जर सड़क। संवाद
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मुजफ्फरनगर। अनुसूचित जाति के व्यक्तियों को सामान्य के समकक्ष लाने के लिए सात वर्ष पूर्व शुरू की गई प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना तीसरे और अंतिम चरण में आकर लड़खड़ा रही है। जनपद के अनुसूचित जाति बाहुल्य 23 गांव का चयन होने के चार वर्ष बाद भी इन गांव में विकास का पैमाना तय करने के लिए सर्वे नहीं हो पाया। इससे विकास के लिए आवंटित होने वाले 4.6 करोड़ रुपये भी अटके हुए हैं।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार की ओर से अनुसूचित जाति सब प्लान योजना का शुभारंभ सात वर्ष पहले हुआ था। इसके अंतर्गत विशेषकर अनुसूचित जाति के लोगों के लिए आय व अन्य असमानताओं को कम करते हुए उनकी सामाजिक, आर्थिक एवं न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति करना था।
इस उद्देश्य से वर्ष 2011 की जनगणना एवं क्षेत्र दृष्टिकोण के आधार पर 40 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित आबादी वाले गांवों में निवासरत इस वर्ग के व्यक्तियों को सामान्य आबादी के समकक्ष लाने के लिए 48 गांव का चयन किया गया था। जनपद में भारत सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2019-20, 2020-21 के लिए 25 गांव तथा 2022-23 के लिए 23 गांव का चयन किया गया है। इनमें से 25 गांव में योजना के तहत विकास कार्य पूर्ण कराए जा चुके हैं।
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इन 23 गांव को विकास के लिए किया गया चिन्हित
योजना के तहत विकास के लिए चिन्हित गांव में जानसठ क्षेत्र के नगला मुबारिक और सिखरेड़ा, सदर के रामपुर, परेई, मेदपुर, बहादरपुर और सिलाजुड्डी, पुरकाजी के ताजपुर, मांडला, हरेंटी, झबरपुर, महरायपुर, बधिवाला, रंडावली शामिल है। जबकि चरथावल क्षेत्र के घिस्सुखेड़ा, महमूदपुर लकड़संधा,महमूदपुर लकड़सधा, जटनगला, देहचंद और खतौली के भलवा, रायपुर एवं मोरना के नन्हेड़ी, अथाई एवं निरगाजनी शामिल हैं।
इन बिंदुओं पर होना है चिह्नित गांव का विकास
- पेयजल एवं स्वच्छता से संबंधित आधारभूत संरचना।
- गांव में ठोस व द्रव अपशिष्ट निपटान जैसी सुविधा।
- विद्यालय, आंगनबाड़ी में शौचालय निर्माण, मरम्मत।
- बाल विकास विभाग से संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र निर्माण।
- चयनित गांव में सोलर एवं स्ट्रीट लाईट की स्थापना।
बजट जारी नहीं होने के कारण अटका सर्वे : प्रिंस गहलोत
अनुसूृचित जाति वित्त एवं विकास निगम के सहायक प्रबंधक प्रिंस गहलोत का कहना है कि विशेष रूप से चिन्हित 23 गांव में विकासात्मक आवश्यकताओं की पूर्ति से पहले सर्वे कराया जाना था। लेकिन सरकार की ओर से सर्वे का बजट जारी नहीं किया गया। सर्वे उपरांत ही विकास की कार्ययोजना बन पाएगी।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार की ओर से अनुसूचित जाति सब प्लान योजना का शुभारंभ सात वर्ष पहले हुआ था। इसके अंतर्गत विशेषकर अनुसूचित जाति के लोगों के लिए आय व अन्य असमानताओं को कम करते हुए उनकी सामाजिक, आर्थिक एवं न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति करना था।
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इस उद्देश्य से वर्ष 2011 की जनगणना एवं क्षेत्र दृष्टिकोण के आधार पर 40 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित आबादी वाले गांवों में निवासरत इस वर्ग के व्यक्तियों को सामान्य आबादी के समकक्ष लाने के लिए 48 गांव का चयन किया गया था। जनपद में भारत सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2019-20, 2020-21 के लिए 25 गांव तथा 2022-23 के लिए 23 गांव का चयन किया गया है। इनमें से 25 गांव में योजना के तहत विकास कार्य पूर्ण कराए जा चुके हैं।
इन 23 गांव को विकास के लिए किया गया चिन्हित
योजना के तहत विकास के लिए चिन्हित गांव में जानसठ क्षेत्र के नगला मुबारिक और सिखरेड़ा, सदर के रामपुर, परेई, मेदपुर, बहादरपुर और सिलाजुड्डी, पुरकाजी के ताजपुर, मांडला, हरेंटी, झबरपुर, महरायपुर, बधिवाला, रंडावली शामिल है। जबकि चरथावल क्षेत्र के घिस्सुखेड़ा, महमूदपुर लकड़संधा,महमूदपुर लकड़सधा, जटनगला, देहचंद और खतौली के भलवा, रायपुर एवं मोरना के नन्हेड़ी, अथाई एवं निरगाजनी शामिल हैं।
इन बिंदुओं पर होना है चिह्नित गांव का विकास
- पेयजल एवं स्वच्छता से संबंधित आधारभूत संरचना।
- गांव में ठोस व द्रव अपशिष्ट निपटान जैसी सुविधा।
- विद्यालय, आंगनबाड़ी में शौचालय निर्माण, मरम्मत।
- बाल विकास विभाग से संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र निर्माण।
- चयनित गांव में सोलर एवं स्ट्रीट लाईट की स्थापना।
बजट जारी नहीं होने के कारण अटका सर्वे : प्रिंस गहलोत
अनुसूृचित जाति वित्त एवं विकास निगम के सहायक प्रबंधक प्रिंस गहलोत का कहना है कि विशेष रूप से चिन्हित 23 गांव में विकासात्मक आवश्यकताओं की पूर्ति से पहले सर्वे कराया जाना था। लेकिन सरकार की ओर से सर्वे का बजट जारी नहीं किया गया। सर्वे उपरांत ही विकास की कार्ययोजना बन पाएगी।