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Muzaffarnagar News: भावुक हुए अभ्यर्थी...13 साल के संघर्ष के बाद मिलेगी नियुक्ति
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बीएसए कार्यालय में शिक्षक भर्ती परीक्षा 2013 की नियुक्ति के लिए काउंसलिंग में पहुंचे अभ्यर्थी
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मुजफ्फरनगर। 13 साल से अटकी बेसिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया सु्प्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आगे बढ़ी। नियुक्ति के आदेश के बाद बृहस्पतिवार को डायट परिसर में पहुंची जिले की पूनम शर्मा, सतेंद्र कटारिया और संजीव के चेहरे पर खुशी के साथ संघर्ष के समय का दर्द दिखा। उन्होंने कहा कि पिछले 13 साल लौटकर नहीं आएगे। अगर उस समय नियुक्ति मिल जाती तो अब प्रमोशन की बारी आती।
वर्ष 2013 में परिषदीय विद्यालयों में गणित और विज्ञान शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई थी। 29 हजार से अधिक पदों के लिए शुरू हुई प्रक्रिया में शासन की ओर से रोक लगा दी गई थी। मामले को लेकर अभ्यर्थी कोर्ट चले गए।
उच्च न्यायालय से न्याय मिलने के बाद भी जब प्रकिया शुरू नहीं की गई तो सुप्रीम कोर्ट में अपनी अर्जी दाखिल की।अभ्यर्थियों के हक में फैसला आया। इसके बाद प्रदेश सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आदेश दिया। इस आदेश के अनुपालन में जिले में तीन शिक्षकों को नियुक्त किया जाएगा।
बीएसए संदीप कुमार ने बताया कि बृहस्पतिवार को दस्तावेजों की जांच की गई। सभी पहलुओं की जांच के बाद सोमवार को विद्यालय आवंटन की सूची चस्पा की जाएगी।
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अभ्यर्थियों का दर्द
पूनम शर्मा ने बताया कि 2013 में उनको कांउसलिंग के लिए बुलाया गया था। सभी प्रक्रिया पूरी कराई गई थी लेकिन नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया था। अचानक ही नियुक्ति प्रकिया पर रोक लगा दी गई। यह समय जीतकर भी हार जाने जैसा था। कोर्ट में याचिका दाखिल की। फिर से तैयारी में जुटी और प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2015 में फिर से परीक्षा को पास किया और नियुक्ति मुरादाबाद में मिली। इस दौरान लीव लेकर और गोद में बेटी को लेकर कोर्ट के चक्कर भी काटे ताकि मेरे साथ न्याय हो।
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पचैंडा खुर्द के रहने वाले संजीव ने बताया कि नियुक्ति नहीं मिलने पर परिवार का गुजारा चलाने के लिए मार्केटिंग रिप्रंजेटिव की नौकरी शुरू की। इस दौरान न्याय पाने के लिए कोर्ट की हर तारीख पर प्रस्तुत हुए कि इस बार न्याय मिले। 13 साल बहुत कष्ट और संघर्ष के रहे। मनमाफिक काम न कर पाने और सामान्य नौकरी से परिवार का गुजारा सही से न कर पाने की टीस हर पल रही। आज खुशी है लेकिन 13 साल की कोई भरपाई नहीं है।
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सतेंद्र कटारिया ने कहा कि उन्होंने शिक्षक भर्ती परीक्षा को 2013 में उत्तीर्ण किया था तब वह 22 साल के थे। उसके बाद भर्ती पर रोक लग गई। कोर्ट में याचिका दाखिल कर फिर से तैयारी में जुटे। कोर्ट के चक्कर और तैयारी पर फोकस करने में समस्या तो आई। उम्र बढ़ने के साथ तनाव भी बढ़ता रहा। 2018 में 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की परीक्षा को उत्तीर्ण किया। नियुक्ति मिली। अगर 2013 शिक्षक भर्ती पर रोक न लगती थी तो प्रोन्नति की ओर होते।
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वर्ष 2013 में परिषदीय विद्यालयों में गणित और विज्ञान शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई थी। 29 हजार से अधिक पदों के लिए शुरू हुई प्रक्रिया में शासन की ओर से रोक लगा दी गई थी। मामले को लेकर अभ्यर्थी कोर्ट चले गए।
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उच्च न्यायालय से न्याय मिलने के बाद भी जब प्रकिया शुरू नहीं की गई तो सुप्रीम कोर्ट में अपनी अर्जी दाखिल की।अभ्यर्थियों के हक में फैसला आया। इसके बाद प्रदेश सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आदेश दिया। इस आदेश के अनुपालन में जिले में तीन शिक्षकों को नियुक्त किया जाएगा।
बीएसए संदीप कुमार ने बताया कि बृहस्पतिवार को दस्तावेजों की जांच की गई। सभी पहलुओं की जांच के बाद सोमवार को विद्यालय आवंटन की सूची चस्पा की जाएगी।
अभ्यर्थियों का दर्द
पूनम शर्मा ने बताया कि 2013 में उनको कांउसलिंग के लिए बुलाया गया था। सभी प्रक्रिया पूरी कराई गई थी लेकिन नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया था। अचानक ही नियुक्ति प्रकिया पर रोक लगा दी गई। यह समय जीतकर भी हार जाने जैसा था। कोर्ट में याचिका दाखिल की। फिर से तैयारी में जुटी और प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2015 में फिर से परीक्षा को पास किया और नियुक्ति मुरादाबाद में मिली। इस दौरान लीव लेकर और गोद में बेटी को लेकर कोर्ट के चक्कर भी काटे ताकि मेरे साथ न्याय हो।
पचैंडा खुर्द के रहने वाले संजीव ने बताया कि नियुक्ति नहीं मिलने पर परिवार का गुजारा चलाने के लिए मार्केटिंग रिप्रंजेटिव की नौकरी शुरू की। इस दौरान न्याय पाने के लिए कोर्ट की हर तारीख पर प्रस्तुत हुए कि इस बार न्याय मिले। 13 साल बहुत कष्ट और संघर्ष के रहे। मनमाफिक काम न कर पाने और सामान्य नौकरी से परिवार का गुजारा सही से न कर पाने की टीस हर पल रही। आज खुशी है लेकिन 13 साल की कोई भरपाई नहीं है।
सतेंद्र कटारिया ने कहा कि उन्होंने शिक्षक भर्ती परीक्षा को 2013 में उत्तीर्ण किया था तब वह 22 साल के थे। उसके बाद भर्ती पर रोक लग गई। कोर्ट में याचिका दाखिल कर फिर से तैयारी में जुटे। कोर्ट के चक्कर और तैयारी पर फोकस करने में समस्या तो आई। उम्र बढ़ने के साथ तनाव भी बढ़ता रहा। 2018 में 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की परीक्षा को उत्तीर्ण किया। नियुक्ति मिली। अगर 2013 शिक्षक भर्ती पर रोक न लगती थी तो प्रोन्नति की ओर होते।