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गुरु कृपा से जागृत होती है चेतना : चेतना गिरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना। माता पूर्णागिरी आदि शक्तिपीठ शुकतीर्थ आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी गुरु हनुमान महाराज की 12वीं पुण्यतिथि मनाई गई। महामंडलेश्वर गोपालदास महाराज व दूर-दराज से आए संत महात्माओं व अनुयायियों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।
मुख्य अतिथि दशनाम अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता महंत चेतना गिरी महाराज ने कहा महापुरुष और संत संस्कृति और राष्ट्र का चिंतन करते हैं। कृपा का स्वरूप परंपराओं का निर्वाह करना होता है। गुरु में इतना साहस होना चाहिए, जो शिष्य के हृदय पर चोट पहुंचा सकें।
हापुड़ से पधारे स्वामी रामदास महाराज ने ने कहा उच्च कोटि के विद्वान सहज होते हैं। कथाएं लीलाएं हो रही हैं लेकिन हम मुख्य विषय से भटक रहे हैं। सत्संग मिलता तो युवा आत्महत्या नहीं करता। छोटे-छोटे बच्चों को मोबाइल न दें। माताएं अपनी संतानों को भारतीय संस्कृति का ज्ञान दें।
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स्वामी मनजीतनाथ झज्जर, योगी प्रकाश नगली माई, महामंडलेश्वर रामगिरी महाराज, भगवानदास धर्माचार्य, रमेशानन्द महाराज, आनंद महात्मा नगरी तीर्थ, कनक प्रभानंद महाराज, मारुति मुनि, आनंद स्वरूप हनुमान धाम, इंद्रपाल शास्त्री ने विचार रखे। संचालन अजय कृष्ण शास्त्री ने किया। जाहिद हुसैन, अमित राठी, विनोद शर्मा, पुष्पेंद्र प्रधान, शिक्षक कंवरपाल मौजूद रहे।
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मोरना। माता पूर्णागिरी आदि शक्तिपीठ शुकतीर्थ आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी गुरु हनुमान महाराज की 12वीं पुण्यतिथि मनाई गई। महामंडलेश्वर गोपालदास महाराज व दूर-दराज से आए संत महात्माओं व अनुयायियों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।
मुख्य अतिथि दशनाम अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता महंत चेतना गिरी महाराज ने कहा महापुरुष और संत संस्कृति और राष्ट्र का चिंतन करते हैं। कृपा का स्वरूप परंपराओं का निर्वाह करना होता है। गुरु में इतना साहस होना चाहिए, जो शिष्य के हृदय पर चोट पहुंचा सकें।
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हापुड़ से पधारे स्वामी रामदास महाराज ने ने कहा उच्च कोटि के विद्वान सहज होते हैं। कथाएं लीलाएं हो रही हैं लेकिन हम मुख्य विषय से भटक रहे हैं। सत्संग मिलता तो युवा आत्महत्या नहीं करता। छोटे-छोटे बच्चों को मोबाइल न दें। माताएं अपनी संतानों को भारतीय संस्कृति का ज्ञान दें।
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स्वामी मनजीतनाथ झज्जर, योगी प्रकाश नगली माई, महामंडलेश्वर रामगिरी महाराज, भगवानदास धर्माचार्य, रमेशानन्द महाराज, आनंद महात्मा नगरी तीर्थ, कनक प्रभानंद महाराज, मारुति मुनि, आनंद स्वरूप हनुमान धाम, इंद्रपाल शास्त्री ने विचार रखे। संचालन अजय कृष्ण शास्त्री ने किया। जाहिद हुसैन, अमित राठी, विनोद शर्मा, पुष्पेंद्र प्रधान, शिक्षक कंवरपाल मौजूद रहे।