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अमेरिका में किसानों को सब्सिडी, हमारे यहां दाम की लड़ाई : पालेकर
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सिसौली के किसान भवन पर आयोजित सेमिनार में पहुंचे किसान : संवाद
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सिसौली(मुजफ्फरनगर)। पद्मश्री डॉ. सुभाष पालेकर ने किसानों की उपज के उचित दाम नहीं मिलने और आर्थिक व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के लिए कानून नहीं बनाती, जबकि अमेरिका जैसी सरकारें सब्सिडी देती हैं। समाजवाद और पूंजीवाद दोनों किसानों की समस्या हल करने में विफल रहे। रासायनिक खाद पौधों का भोजन नहीं है। किसानों से आह्वान किया कि वह दिमाग से खाद निकाल दें।
भाकियू टिकैत की ओर से किसान भवन पर जीरो बजट खेती कार्यशाला के पहले दिन डॉ. पालेकर ने कहा कि 25 करोड़ छोटे किसान खेती छोड़ रहे हैं। वैश्विक व्यवस्था के कारण गरीब-अमीर की खाई लगातार बढ़ रही है। राजनीति किसानों की समस्या हल नहीं कर सकती।
दिल्ली के आंदोलन में 700 किसान शहीद हुए । आंदोलन ने अनाज के दाम लागत से अधिक करने के लिए संघर्ष किया, पर कोई शाश्वत समाधान नहीं निकला।
मुक्त व्यापार व्यवस्था का अर्थ है कि कोई सरकार बाजार पर हस्तक्षेप नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि किसानों की सही समस्या उपज खरीदने की है, जिस पर चर्चा होनी चाहिए।
भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों को खेत बचाने का संकल्प लेना पड़ेगा। अध्यक्षता बाबा मेजर सिंह ने की। गोल्डन बेल्स एकेडमी ढिंढावली की छात्रा ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। भाकियू जिलाध्यक्ष नवीन राठी, ओमपाल मलिक, गौरव टिकैत, ओमपाल सिंह मौजूद रहे।
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लागत घटाने और रासायनिक खाद छोड़ने का आह्वान
सिसौली। पदमश्री पालेकर ने कार्यशाला के दौरान किसानों पर बढ़ते कर्ज के बोझ को कम करने के लिए लागत मूल्य घटाने और पारंपरिक खेती अपनाने पर जोर दिया गया है। रासायनिक खाद का उपयोग किसानों को गुमराह कर रहा है। सिंचाई के लिए बनाए गए बांधों से भूमि कठोर हो रही है, जिससे ट्रैक्टर के बिना हल चलाना मुश्किल हो गया है। किसानों को बीज, दवाई और ट्रैक्टर खरीदने के लिए बैंकों व सोसायटियों से कर्ज लेने को विवश होना पड़ रहा है। हर साल कर्ज माफी स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि लागत मूल्य घटाना ही एकमात्र उपाय है। पारंपरिक खेती में देसी खाद के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही गई है। हरित क्रांति पर कहा कि इसका उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का था लेकिन सफलता नहीं मिली।
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असम, पंजाब और उत्तराखंड से आए किसान
सिसौली। प्रशिक्षण में यूपी के विभिन्न जिलों के अलावा असम, पंजाब और उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों के किसान पहुंचे। देर रात तक प्रशिक्षण चलता रहा। भाकियू टिकैत की ओर से किसान भवन पर किसानों के ठहरने का इंतजाम किया गया है। संवाद
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महिला किसानों ने भी खूब की भागीदारी, सीख रहीं खेती
फोटो
सिसौली। कार्यशाला में दूर-दराज से पहुंची महिला किसानों ने भी भागेदारी की। महिला किसान जौनपुर की वैशाली तिवारी ने बताया कि बीटेक किया है। अब जीरो बजट खेती पर काम कर रही हैं। बिजनौर से पहुंची सुनीता ने कहा कि परिवार के साथ अब खेती के तौर-तरीके सीख रही हैं। बीएड कर चुकी मधु प्रिया ने कहा कि जीरो बजट खेती से ही किसान की आय बढ़ सकती है।
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भाकियू टिकैत की ओर से किसान भवन पर जीरो बजट खेती कार्यशाला के पहले दिन डॉ. पालेकर ने कहा कि 25 करोड़ छोटे किसान खेती छोड़ रहे हैं। वैश्विक व्यवस्था के कारण गरीब-अमीर की खाई लगातार बढ़ रही है। राजनीति किसानों की समस्या हल नहीं कर सकती।
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दिल्ली के आंदोलन में 700 किसान शहीद हुए । आंदोलन ने अनाज के दाम लागत से अधिक करने के लिए संघर्ष किया, पर कोई शाश्वत समाधान नहीं निकला।
मुक्त व्यापार व्यवस्था का अर्थ है कि कोई सरकार बाजार पर हस्तक्षेप नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि किसानों की सही समस्या उपज खरीदने की है, जिस पर चर्चा होनी चाहिए।
भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों को खेत बचाने का संकल्प लेना पड़ेगा। अध्यक्षता बाबा मेजर सिंह ने की। गोल्डन बेल्स एकेडमी ढिंढावली की छात्रा ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। भाकियू जिलाध्यक्ष नवीन राठी, ओमपाल मलिक, गौरव टिकैत, ओमपाल सिंह मौजूद रहे।
लागत घटाने और रासायनिक खाद छोड़ने का आह्वान
सिसौली। पदमश्री पालेकर ने कार्यशाला के दौरान किसानों पर बढ़ते कर्ज के बोझ को कम करने के लिए लागत मूल्य घटाने और पारंपरिक खेती अपनाने पर जोर दिया गया है। रासायनिक खाद का उपयोग किसानों को गुमराह कर रहा है। सिंचाई के लिए बनाए गए बांधों से भूमि कठोर हो रही है, जिससे ट्रैक्टर के बिना हल चलाना मुश्किल हो गया है। किसानों को बीज, दवाई और ट्रैक्टर खरीदने के लिए बैंकों व सोसायटियों से कर्ज लेने को विवश होना पड़ रहा है। हर साल कर्ज माफी स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि लागत मूल्य घटाना ही एकमात्र उपाय है। पारंपरिक खेती में देसी खाद के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही गई है। हरित क्रांति पर कहा कि इसका उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का था लेकिन सफलता नहीं मिली।
असम, पंजाब और उत्तराखंड से आए किसान
सिसौली। प्रशिक्षण में यूपी के विभिन्न जिलों के अलावा असम, पंजाब और उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों के किसान पहुंचे। देर रात तक प्रशिक्षण चलता रहा। भाकियू टिकैत की ओर से किसान भवन पर किसानों के ठहरने का इंतजाम किया गया है। संवाद
महिला किसानों ने भी खूब की भागीदारी, सीख रहीं खेती
फोटो
सिसौली। कार्यशाला में दूर-दराज से पहुंची महिला किसानों ने भी भागेदारी की। महिला किसान जौनपुर की वैशाली तिवारी ने बताया कि बीटेक किया है। अब जीरो बजट खेती पर काम कर रही हैं। बिजनौर से पहुंची सुनीता ने कहा कि परिवार के साथ अब खेती के तौर-तरीके सीख रही हैं। बीएड कर चुकी मधु प्रिया ने कहा कि जीरो बजट खेती से ही किसान की आय बढ़ सकती है।

सिसौली के किसान भवन पर आयोजित सेमिनार में पहुंचे किसान : संवाद