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Muzaffarnagar News: प्लॉट हड़पने के मामले में अंतिम आख्या खारिज कर परिवाद दायर करने के आदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। छह साल पुराने मामले में प्लॉट की धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने नई मंडी पुलिस की अंतिम रिपोर्ट निरस्त करते हुए परिवाद में दायर करने के आदेश पारित किए। भूमि घोटाले के मामले आरोपियों के खिलाफ परिवाद में सुनवाई सुनिश्चित की गई है।
वर्ष 2020 में नई मंडी के भरतिया कॉलोनी निवासी मनोज गौड़ ने पटेलनगर निवासी सुरेंद्र शर्मा सहित पांच आरोपियों के खिलाफ षड्यंत्र के तहत जालसाजी से भू-खंड हड़पने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है बैनामे से लिए गए प्लॉट को कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी तरीके दूसरे लोगों के नाम बेच दिया गया।
बताया कि वादी की माता दयावती शर्मा ने वर्ष 1991 में अलमासपुर में प्लॉट खरीदा था लेकिन जब वह वर्ष 2020 में उक्त प्लॉट पर निर्माण कराने पहुंचे तो महिला सरोज देवी ने विरोध जताते हुए अपने प्लॉट पर अपना हक जताया।
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इस घटना के बाद पीड़ित ने तहसील में उक्त भू-खंड के अभिलेखों का मुआयना कराया। यहां से पूरे मामले में घोटाले की जानकारी हासिल हुई। पुलिस ने विवेचना के बाद दो आरोपियों ने गैर जमानती वारंट जारी किए। अभियुक्तों ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। बेंच ने उन्हें पंजीकृत वसीयत दाखिल करने के आदेश दिए।
इसके बाद पुलिस ने विवेचना के बाद पुलिस ने भू-खंड के स्वामित्व का अधिकार दीवानी न्यायालय को होने का हवाला देते हुए 2021 में अंतिम आख्या दाखिल की थी। वादी ने इसके विरुद्ध अदालत में प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल किया।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या-1 डॉ. देवेंद्र सिंह फौजदार ने पत्रावली का अवलोकन किया। उन्होंने विवेचक ने आरोपियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की नीयत से साक्ष्यों को अनदेखा करके पक्षपातपूर्ण तरीके से अंतिम आख्या को निरस्त करते हुए प्रकरण को परिवाद में दर्ज करने का आदेश पारित किया। मामले में अगली सुनवाई के लिए 21 अगस्त मुकर्रर की है।
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मुजफ्फरनगर। छह साल पुराने मामले में प्लॉट की धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने नई मंडी पुलिस की अंतिम रिपोर्ट निरस्त करते हुए परिवाद में दायर करने के आदेश पारित किए। भूमि घोटाले के मामले आरोपियों के खिलाफ परिवाद में सुनवाई सुनिश्चित की गई है।
वर्ष 2020 में नई मंडी के भरतिया कॉलोनी निवासी मनोज गौड़ ने पटेलनगर निवासी सुरेंद्र शर्मा सहित पांच आरोपियों के खिलाफ षड्यंत्र के तहत जालसाजी से भू-खंड हड़पने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है बैनामे से लिए गए प्लॉट को कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी तरीके दूसरे लोगों के नाम बेच दिया गया।
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बताया कि वादी की माता दयावती शर्मा ने वर्ष 1991 में अलमासपुर में प्लॉट खरीदा था लेकिन जब वह वर्ष 2020 में उक्त प्लॉट पर निर्माण कराने पहुंचे तो महिला सरोज देवी ने विरोध जताते हुए अपने प्लॉट पर अपना हक जताया।
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इस घटना के बाद पीड़ित ने तहसील में उक्त भू-खंड के अभिलेखों का मुआयना कराया। यहां से पूरे मामले में घोटाले की जानकारी हासिल हुई। पुलिस ने विवेचना के बाद दो आरोपियों ने गैर जमानती वारंट जारी किए। अभियुक्तों ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। बेंच ने उन्हें पंजीकृत वसीयत दाखिल करने के आदेश दिए।
इसके बाद पुलिस ने विवेचना के बाद पुलिस ने भू-खंड के स्वामित्व का अधिकार दीवानी न्यायालय को होने का हवाला देते हुए 2021 में अंतिम आख्या दाखिल की थी। वादी ने इसके विरुद्ध अदालत में प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल किया।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या-1 डॉ. देवेंद्र सिंह फौजदार ने पत्रावली का अवलोकन किया। उन्होंने विवेचक ने आरोपियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की नीयत से साक्ष्यों को अनदेखा करके पक्षपातपूर्ण तरीके से अंतिम आख्या को निरस्त करते हुए प्रकरण को परिवाद में दर्ज करने का आदेश पारित किया। मामले में अगली सुनवाई के लिए 21 अगस्त मुकर्रर की है।