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Muzaffarnagar News: फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा ककरौली का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
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ककरौली स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र। संवाद
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ककरौली। क्षेत्र के ग्रामीणों की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थापित ककरौली का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से गंभीर अव्यवस्थाओं का शिकार है। हालात इतने बदतर हैं कि केंद्र अब डॉक्टर के बिना ही संचालित हो रहा है। पिछले साल 15 अगस्त के बाद से यहां एक भी चिकित्सक ने नियमित रूप से ड्यूटी नहीं की है, जिससे पूरा स्वास्थ्य केंद्र मात्र एक फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है।
स्वास्थ्य केंद्र पर एक स्टाफ नर्स की तैनाती जरूर दर्ज है लेकिन वह भी मोरना पीएचसी पर ही रहती हैं। ऐसे में ककरौली स्वास्थ्य केंद्र पर आने वाले मरीजों को न तो चिकित्सकीय परामर्श मिल पा रहा है और न ही आवश्यक जांच व उपचार की सुविधा। स्थिति यह है कि मरीजों की पर्ची बनाना और उपलब्ध दवाइयां देना ही यहां की चिकित्सा सेवा बनकर रह गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र पर न तो एंबुलेंस की सुविधा है और न ही महिलाओं के लिए प्रसव संबंधी कोई व्यवस्था है। आपात स्थिति में मरीजों को निजी साधनों से दूर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है, जिससे कई बार जान जोखिम में पड़ जाती है।
कुछ समय पूर्व संविदा पर तैनात एक चिकित्सक आए थे, लेकिन किसी कारणवश उन्होंने त्यागपत्र देकर केंद्र छोड़ दिया। इसके बाद से हालात और भी खराब हो गए। स्वास्थ्य केंद्र में वार्ड बॉय तक की तैनाती नहीं है, जिससे सफाई और मरीजों की देखभाल भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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स्वास्थ्य केंद्र पर एक स्टाफ नर्स की तैनाती जरूर दर्ज है लेकिन वह भी मोरना पीएचसी पर ही रहती हैं। ऐसे में ककरौली स्वास्थ्य केंद्र पर आने वाले मरीजों को न तो चिकित्सकीय परामर्श मिल पा रहा है और न ही आवश्यक जांच व उपचार की सुविधा। स्थिति यह है कि मरीजों की पर्ची बनाना और उपलब्ध दवाइयां देना ही यहां की चिकित्सा सेवा बनकर रह गई है।
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ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र पर न तो एंबुलेंस की सुविधा है और न ही महिलाओं के लिए प्रसव संबंधी कोई व्यवस्था है। आपात स्थिति में मरीजों को निजी साधनों से दूर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है, जिससे कई बार जान जोखिम में पड़ जाती है।
कुछ समय पूर्व संविदा पर तैनात एक चिकित्सक आए थे, लेकिन किसी कारणवश उन्होंने त्यागपत्र देकर केंद्र छोड़ दिया। इसके बाद से हालात और भी खराब हो गए। स्वास्थ्य केंद्र में वार्ड बॉय तक की तैनाती नहीं है, जिससे सफाई और मरीजों की देखभाल भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।