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Muzaffarnagar News: अधिवक्ता समीर की हत्या में तीन दोषियों को फांसी की सजा
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अधिवक्ता समीर सैफी
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मुजफ्फरनगर। शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला लद्दावाला निवासी अधिवक्ता समीर सैफी (28) की सात साल पहले अपहरण के बाद रस्सी से गला घोंटकर हत्या के मामले में अदालत ने दोषी सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान, शालू उर्फ अरबाज को फांसी की सजा सुनाई। साक्ष्य खुद-बुर्द करने के दोषी दिनेश को सात साल कारावास की सजा हुई। सभी दोषियों पर कुल 15 लाख 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने फैसला सुनाया। मुर्गी फार्म के 40 लाख रुपये के लेन-देन को लेकर विवाद हुआ था। अदालत ने लिखा कि हमला केवल अधिवक्ताओं पर ही नहीं, बल्कि एक संस्था पर हमले के समान है। एडवोकेट बार को सीधे चुनौती देने जैसा है।
अधिवक्ता समीर सैफी ने 15 अक्तूबर 2019 को अपने चैंबर का उद्घाटन किया था। इसके बाद शाम को संदिग्ध हालत में वह लापता हो गए। पिता अजहर ने गुमशुदगी दर्ज कराई। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने अधिवक्ता के दोस्त सिंगोल अल्वी से पूछताछ की तो हत्या की वारदात का खुलासा हुआ।
19 अक्तूबर को भोपा थाना क्षेत्र के सीकरी से शव बरामद कराया गया। पुलिस ने अल्वी, उसका ड्राइवर सोनू उर्फ रिजवान, नौकर शालू उर्फ अरबाज एवं दिनेश को गिरफ्तार कर खुलासा किया था।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। वादी के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने बताया कि छह गवाह पेश किए गए। चार अप्रैल को आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ था।
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इन्हें सुनाई गई फांसी की सजा
शहर के बकरा मार्केट निवासी सोनू उर्फ रिजवान, सिंगोल अल्वी, शालू उर्फ अरबाज को फांसी की सजा सुनाई गई। भोपा के सीकरी गांव निवासी दिनेश को सात साल कारावास की सजा हुई।
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अधिवक्ता बंधु की हत्या न हो...देना चाहिए मृत्युदंड
अधिवक्ता की हत्या न हो, इसलिए मृत्युदंड देना चाहिए प्रश्नगत प्रकरण में सिद्धदोषों ने अत्यंत पाश्विक ढंग से मृतक मोहम्मद समीर की गला घोंटकर निर्मम हत्या की। न्यायालय के मतानुसार यह उचित है कि न कोई मारा जाए और न ही किसी के प्राण लिए जाएं और न ही किसी को फांसी पर लटकाया जाए, किंतु क्या यह व्यावहारिक दृष्टि से संभव है? शायद नहीं। हत्याएं होती हैं, कुछ हत्याएं तो अत्यंत पाश्विक ढंग से होती हैं, जैसा कि प्रश्नगत प्रकरण में हुआ है। समाज में किसी अधिवक्ता बंधु की हत्या न हो, इसलिए भी न्यायालय को ऐसे मामलों में मृत्युदंड अवश्य ही देना चाहिए।
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इस तरह अंजाम दी थी वारदात
अपहरण के बाद आरोपी अधिवक्ता को भोपा रोड पर पेट्रोल पंप के पास ले गए। रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी। दोनों मोबाइल कूकड़ा रोड स्थित नाले में फेंक दिए थे। इसके बाद शव को बोरे में बंद कर सीकरी फार्म हाउस में गड्ढा खोदकर मिट्टी में दबा किया था।
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52 पेज पर लिखा गया न्याय
समीर सैफी एडवोकेट हत्याकांड का पूरा मामला 52 पेज पर लिखा गया। आखिरी 16 पेज पर फैसले में अधिवक्ताओं की सुरक्षा, सुविधा और न्याय का जिक्र किया गया है। इसके अलावा पुलिस की भूमिका का भी जिक्र किया।
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अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने फैसला सुनाया। मुर्गी फार्म के 40 लाख रुपये के लेन-देन को लेकर विवाद हुआ था। अदालत ने लिखा कि हमला केवल अधिवक्ताओं पर ही नहीं, बल्कि एक संस्था पर हमले के समान है। एडवोकेट बार को सीधे चुनौती देने जैसा है।
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अधिवक्ता समीर सैफी ने 15 अक्तूबर 2019 को अपने चैंबर का उद्घाटन किया था। इसके बाद शाम को संदिग्ध हालत में वह लापता हो गए। पिता अजहर ने गुमशुदगी दर्ज कराई। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने अधिवक्ता के दोस्त सिंगोल अल्वी से पूछताछ की तो हत्या की वारदात का खुलासा हुआ।
19 अक्तूबर को भोपा थाना क्षेत्र के सीकरी से शव बरामद कराया गया। पुलिस ने अल्वी, उसका ड्राइवर सोनू उर्फ रिजवान, नौकर शालू उर्फ अरबाज एवं दिनेश को गिरफ्तार कर खुलासा किया था।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। वादी के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने बताया कि छह गवाह पेश किए गए। चार अप्रैल को आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ था।
इन्हें सुनाई गई फांसी की सजा
शहर के बकरा मार्केट निवासी सोनू उर्फ रिजवान, सिंगोल अल्वी, शालू उर्फ अरबाज को फांसी की सजा सुनाई गई। भोपा के सीकरी गांव निवासी दिनेश को सात साल कारावास की सजा हुई।
अधिवक्ता बंधु की हत्या न हो...देना चाहिए मृत्युदंड
अधिवक्ता की हत्या न हो, इसलिए मृत्युदंड देना चाहिए प्रश्नगत प्रकरण में सिद्धदोषों ने अत्यंत पाश्विक ढंग से मृतक मोहम्मद समीर की गला घोंटकर निर्मम हत्या की। न्यायालय के मतानुसार यह उचित है कि न कोई मारा जाए और न ही किसी के प्राण लिए जाएं और न ही किसी को फांसी पर लटकाया जाए, किंतु क्या यह व्यावहारिक दृष्टि से संभव है? शायद नहीं। हत्याएं होती हैं, कुछ हत्याएं तो अत्यंत पाश्विक ढंग से होती हैं, जैसा कि प्रश्नगत प्रकरण में हुआ है। समाज में किसी अधिवक्ता बंधु की हत्या न हो, इसलिए भी न्यायालय को ऐसे मामलों में मृत्युदंड अवश्य ही देना चाहिए।
इस तरह अंजाम दी थी वारदात
अपहरण के बाद आरोपी अधिवक्ता को भोपा रोड पर पेट्रोल पंप के पास ले गए। रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी। दोनों मोबाइल कूकड़ा रोड स्थित नाले में फेंक दिए थे। इसके बाद शव को बोरे में बंद कर सीकरी फार्म हाउस में गड्ढा खोदकर मिट्टी में दबा किया था।
52 पेज पर लिखा गया न्याय
समीर सैफी एडवोकेट हत्याकांड का पूरा मामला 52 पेज पर लिखा गया। आखिरी 16 पेज पर फैसले में अधिवक्ताओं की सुरक्षा, सुविधा और न्याय का जिक्र किया गया है। इसके अलावा पुलिस की भूमिका का भी जिक्र किया।

अधिवक्ता समीर सैफी