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अधिवक्ता समीर हत्याकांड: फांसी की सजा का फैसला सुन फीके पड़े चेहरे, 52 पेज में जज ने लिखी ये बात; कब क्या हुआ

अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 07 Apr 2026 11:13 AM IST
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सार

मुजफ्फरनगर के अधिवक्ता समीर सैफी की हत्या में अदालत ने तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। इसके साथ ही चौथे दोषी दिनेश को सबूत खुदबुर्द करने में सात साल की कैद की सजा सुनाई है। सभी पर 15 लाख 30 हजार का अर्थदंड रखा गया है। मुर्गी फार्म के 40 लाख के लेनदेन के विवाद में 15 अक्तूबर 2019 को अपहरण के बाद वकील की गला घोंटकर हत्या की गई थी।

Advocate Sameer Saifi Murder Case Convicts Faces Turn Pale Upon Hearing the Verdict Muzaffarnagar
muzaffarnagar murder - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

मुजफ्फरनगर शहर कोतवाली इलाके के मोहल्ला लद्दावाला निवासी अधिवक्ता समीर सैफी (28) की सात साल पहले अपहरण के बाद हुई हत्या के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान, शालू उर्फ अरबाज को फांसी की सजा सुनाई।
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वहीं, अदालत ने साक्ष्य खुदबुर्द करने में दिनेश को सात साल की कैद की सजा सुनाई। सभी पर कुल 15 लाख 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। अदालत ने फैसले में लिखा है कि हमला केवल अधिवक्ताओं पर ही नहीं, बल्कि एक संस्था पर हमले के समान है। एडवोकेट बार को सीधे चुनौती देने जैसा है। अधिवक्ता की हत्या न हो, इसलिए मृत्युदंड देना चाहिए।
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अधिवक्ता समीर सैफी ने 15 अक्तूबर 2019 को अपने चैंबर का उद्घाटन किया था। इसके बाद शाम को संदिग्ध हालात में लापता हो गए थे। पिता अजहर ने गुमशुदगी दर्ज कराई। 19 अक्तूबर को भोपा थाना क्षेत्र के सीकरी से उनका शव बरामद हुआ।

सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने अधिवक्ता के दोस्त सिंगोल अल्वी से पूछताछ की तो हत्या की वारदात का खुलासा हुआ। पुलिस ने अल्वी, उसके ड्राइवर सोनू उर्फ रिजवान, नौकर शालू उर्फ अरबाज एवं दिनेश को गिरफ्तार किया था।

 

अपहरण कर की थी हत्या
पूछताछ में आरोपियों ने बताया था कि अपहरण के बाद अधिवक्ता को भोपा रोड पर स्थित पेट्रोल पंप के पास ले गए। रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी। दोनों मोबाइल कूकड़ा रोड स्थित नाले में फेंक दिए। इसके बाद शव को बोरे में बंद कर सीकरी फार्म हाउस में गड्ढा खोदकर मिट्टी में दबा किया था।

 

मुर्गी फार्म के 40 लाख रुपये के लेनदेन के विवाद में इस वारदात को अंजाम दिया गया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। वादी के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने बताया कि छह गवाह पेश किए गए। चार अप्रैल को आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ था।

 

इन्हें सुनाई गई फांसी की सजा
शहर के बकरा मार्केट निवासी सोनू उर्फ रिजवान, सिंगोल अल्वी, शालू उर्फ अरबाज को फांसी की सजा सुनाई गई। भोपा के सीकरी गांव निवासी दिनेश को सात साल कारावास की सजा हुई।

 

फैसले में इस तरह दी गई रुलिंग
समीर सैफी हत्याकांड में अदालत ने शैलेंद्र जसवंत भाई बनाम स्टेट ऑफ गुजरात, माछी सिंह, बच्चन सिंह, निर्मल सिंह, धनंजय चटर्जी, शंकर लाल, त्रिवेणी बेन, मुकेश और पुरुषोत्तम केस की रुलिंग भी लिखी गई है। इनके हवाले से पूरे प्रकरण को स्पष्ट करने की कोशिश की गई।
 

फैसला सुनते ही फीके पड़ गए चेहरे
अदालत का फैसला आते ही दोषियों के चेहरे फीके पड़ गए। पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच दोषियों को हवालात ले जाया गया। इस दौरान रास्ते में जगह-जगह परिजन भी खड़े हुए नजर आए। दोषियों के परिवार की महिलाएं भी यहां पर काफी संख्या में पहुंची थी।
 

फैसले के 52 पेज, जज ने लिखा... मरकर भी वकील की आवाज इंसाफ ही रचती है... सुनाई मृत्युदंड की सजा
मुजफ्फरनगर के लद्दावाला के समीर सैफी (28) की हत्या के मामले में अदालत ने करीब सात साल बाद फांसी की सजा का फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने अपने 52 पेजों के फैसले में रिश्तों में हत्या, मानवीय पहलू, अधिवक्ताओं के अधिकार और विवेचना की स्थिति पर टिप्पणी की है। 

 

एक कविता भी लिखी जिसमें लिखा है कि और मरकर भी वकील की आवाज इंसाफ ही रचती है...। अदालत ने अपने फैसले में लिखा कि अधिवक्ता बंधुओं पर हमला केवल अधिवक्ताओं पर ही हमला नहीं है, बल्कि यह एक संस्था पर हमले के समान है। उस संस्था अर्थात् एडवोकेट बार को सीधे चुनौती देने जैसा है। 

 

अधिवक्ता समाज में न्याय, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं, इसलिए अधिवक्ताओं को न्याय का प्रहरी भी कहा जाता है। अधिवक्ता समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। वास्तव में शांति-व्यवस्था की समाप्ति पर समाज का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।
 

दोस्त की हत्या... खत्म करती है भरोसे की नींव
सिंगोल अल्वी (मुख्य अभियुक्त) को गवाह नंबर एक ने मृतक एडवोकेट समीर का दोस्त, विश्वासपात्र एवं व्यवसायिक साथी बताया है। प्रकरण में एक दोस्त की सुनियोजित साजिश के तहत लालच में निर्मम हत्या की गई है। दोस्त की हत्या करना सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह मानवीय संबंधों के टूटने का सबसे निचला स्तर है। दोस्ती को सबसे पवित्र और चुने हुए रिश्ते के रूप में देखा जाता है। जब कोई दोस्त अपने दोस्त को मारता है, तो वह केवल शरीर को नष्ट नहीं करता है बल्कि भरोसे की नींव को खत्म कर देता है। दोस्त की हत्या यह सिद्ध करती है कि मानव स्वभाव में प्रेम व विश्वास के साथ-साथ अत्यंत अंधेरा और हिंसक पक्ष भी हो सकता है।

 

अभियोजन पक्ष की ओर से दिया गया तर्क
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) कुलदीप कुमार की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया है कि सिद्धदोष सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान व शालू उर्फ अरबाज ने मृतक समीर की हत्या षड्यंत्र के तहत एक राय होकर की। निर्मम तरीके से रस्सी से गला घोंटा गया। सिद्धदोष दिनेश की सहायता से साक्ष्य मिटाए जाने के आशय से शव को मिट्टी में दबा दिया। दोषियों को मृत्युदंड से दंडित किया जाए, जिससे समाज में सही संदेश जाए। 
 

सगाई के बाद चल रही थी शादी की तैयारी
एडवोकेट समीर के भाई दानिश सैफी ने बताया कि वारदात से कुछ दिन पहले ही सगाई हुई थी। घर में समीर की शादी की तैयारी चल रही थी। वह मुर्गी फार्म से हिस्सेदारी खत्म कर पूरा ध्यान वकालत पर लगाना चाहता था। युवा अधिवक्ता सपनों के साथ आगे बढ़ रहा था और अचानक सब कुछ खत्म हो गया। फैसले में माता-पिता के दुख का हवाला भी दिया गया।

इस तरह अंजाम दी थी वारदात
अपहरण के बाद आरोपी अधिवक्ता को भोपा रोड पर पेट्रोल पंप के पास ले गए। रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी। दोनों मोबाइल कूकड़ा रोड स्थित नाले में फेंक दिए थे। इसके बाद शव को बोरे में बंद कर सीकरी फार्म हाउस में गड्ढा खोदकर मिट्टी में दबा दिया था।
 

समीर हत्याकांड में कब क्या हुआ
  • 15 अक्तूबर 2019: अधिवक्ता समीर सैफी संदिग्ध हालात में लापता।
  • 16 अक्तूबर 2019: वादी अजहर ने बेटे की गुमशुदगी दर्ज कराई।
  • 16 अक्तूबर 2019: मुकदमा अपहरण में तरमीम।
  • 19 अक्तूबर 2019: भोपा क्षेत्र से शव बरामद।
  • 20 नवंबर 2019: वादी ने बैंक के प्रकरण का प्रार्थनापत्र दिया।
  • 30 जनवरी 2020 आरोपपत्र पर संज्ञान लिया गया।
  • 04 अप्रैल 2026: आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ।
  • 06 अप्रैल 2026: चारों दोषियों को सजा सुनाई गई।
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