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Pilibhit News: करोड़ों के घोटाले में सिस्टम पर सवालों की झड़ी, जिम्मेदार सिर्फ तमाशा देखते रहे
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sat, 02 May 2026 11:48 PM IST
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पीलीभीत। डीआईओएस कार्यालय में सामने आए करोड़ों रुपये के घोटाले में कई ऐसे सवाल उठ रहे हैं जो सिस्टम की कार्यशैली पर तीखा कटाक्ष बने हुए हैं। दो माह बीतने पर पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई चपरासी इल्हाम शम्सी के अलावा अन्य जिम्मेदारों तक नहीं पहुंच सकी। सबसे अहम सवाल यही उठ रहा है कि एक चपरासी वर्षों तक करोड़ों रुपये निकालता रहा और जिम्मेदार कुर्सियाें पर बैठे सिर्फ तमाशा देखते रहे। जबकि सरकारी धनराशि निकालने के लिए लंबी चौड़ी फाइल बनती है और उस पर छोटे से बड़ा अधिकारी हस्ताक्षर करता है। इस प्रकरण में एसपी का कहना है कि जांच विशेष टीम से करा रहे हैं, जांच में जिस किसी का नाम सामने आएगा, उस पर कार्रवाई होगी।
फरवरी में मामला तब खुला, जब चपरासी से बाबू का काम संभाल रहे इल्हाम शम्सी ने अपनी पत्नी अर्शी खातून के बैंक खाते में एक करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। सरकारी धन निजी खाते में पहुंचा तो बैंक को शक हुआ और उसने प्रशासन को सूचना दी। यानी जिस सिस्टम को निगरानी करनी थी, उसे बैंक ने आईना दिखाया। डीएम ज्ञानेंद्र सिंह के निर्देश पर जांच शुरू हुई तो मामला परत-दर-परत खुलता चला गया। शुरुआती एक करोड़ का आंकड़ा बढ़ते-बढ़ते करीब 30 करोड़ तक पहुंच गया। पुलिस जांच में अब तक 30 से अधिक खातों में करीब आठ करोड़ रुपये के लेनदेन का खुलासा हुआ है, इनमें से पांच करोड़ रुपये फ्रीज किए जा चुके हैं।
ये सवाल सुलग रहे
इस प्रकरण में कई सवाल सुलग रहे हैं, जैसे- क्या इतना बड़ा घोटाला अफसरों की जानकारी के बिना संभव हुआ? जिन बिलों पर भुगतान हुआ, जिन वाउचरों पर हस्ताक्षर कई अफसरों के हुए होंगे। जिन पासवर्ड से ट्रांजेक्शन हुए, वे क्या सिर्फ चपरासी के भरोसे थे? अगर ऐसा है, तो फिर विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। घोटाले में इल्हाम ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों के खातों का इस्तेमाल किया। पुलिस ने उसकी दो पत्नियों, साली और सास समेत सात महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। लेकिन अफसरों तक अभी तक जांच की आंच भी नहीं पहुंची है।
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डेढ़ माह बाद भी नहीं पहुंची शासन से गठित टीम
- सरकारी धन के बड़े घोटाले के मामले में डीएम के पत्राचार के बाद शासन भी गंभीर हुआ था। शासन ने जांच कमेटी गठित की थी, डेढ़ माह बीतने के बाद भी जांच टीम भी जिले में नहीं पहुंची है, इससे कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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वर्ष 2019 से अब तक तैनात रहे कई डीआईओएस और अन्य जिम्मेदार
जांच में सामने आया कि डीआईओएस कार्यालय में वर्ष 2019 में इस घोटाले की शुरुआत हुई थी। जबकि फरवरी 2026 में इस घोटाले का खुलासा हुआ था। ऐसे में इस समय अवधि में करीब पांच डीआईओएस तैनात रहे, इनके अलावा कई वित्त एवं लेखाधिकारी और कोषागार के जिम्मेदार भी तैनात रहे।
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वर्जन
पूरे मामले की गंभीरता से विवेचना कराई जा रही है। विशेष टीम को विवेचना में लगाया गया है। अबतक सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया है। इस मामले में जो भी संलिप्त होगा, उस पर जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - सुकीर्ति माधव, एसपी
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फरवरी में मामला तब खुला, जब चपरासी से बाबू का काम संभाल रहे इल्हाम शम्सी ने अपनी पत्नी अर्शी खातून के बैंक खाते में एक करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। सरकारी धन निजी खाते में पहुंचा तो बैंक को शक हुआ और उसने प्रशासन को सूचना दी। यानी जिस सिस्टम को निगरानी करनी थी, उसे बैंक ने आईना दिखाया। डीएम ज्ञानेंद्र सिंह के निर्देश पर जांच शुरू हुई तो मामला परत-दर-परत खुलता चला गया। शुरुआती एक करोड़ का आंकड़ा बढ़ते-बढ़ते करीब 30 करोड़ तक पहुंच गया। पुलिस जांच में अब तक 30 से अधिक खातों में करीब आठ करोड़ रुपये के लेनदेन का खुलासा हुआ है, इनमें से पांच करोड़ रुपये फ्रीज किए जा चुके हैं।
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ये सवाल सुलग रहे
इस प्रकरण में कई सवाल सुलग रहे हैं, जैसे- क्या इतना बड़ा घोटाला अफसरों की जानकारी के बिना संभव हुआ? जिन बिलों पर भुगतान हुआ, जिन वाउचरों पर हस्ताक्षर कई अफसरों के हुए होंगे। जिन पासवर्ड से ट्रांजेक्शन हुए, वे क्या सिर्फ चपरासी के भरोसे थे? अगर ऐसा है, तो फिर विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। घोटाले में इल्हाम ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों के खातों का इस्तेमाल किया। पुलिस ने उसकी दो पत्नियों, साली और सास समेत सात महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। लेकिन अफसरों तक अभी तक जांच की आंच भी नहीं पहुंची है।
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डेढ़ माह बाद भी नहीं पहुंची शासन से गठित टीम
- सरकारी धन के बड़े घोटाले के मामले में डीएम के पत्राचार के बाद शासन भी गंभीर हुआ था। शासन ने जांच कमेटी गठित की थी, डेढ़ माह बीतने के बाद भी जांच टीम भी जिले में नहीं पहुंची है, इससे कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वर्ष 2019 से अब तक तैनात रहे कई डीआईओएस और अन्य जिम्मेदार
जांच में सामने आया कि डीआईओएस कार्यालय में वर्ष 2019 में इस घोटाले की शुरुआत हुई थी। जबकि फरवरी 2026 में इस घोटाले का खुलासा हुआ था। ऐसे में इस समय अवधि में करीब पांच डीआईओएस तैनात रहे, इनके अलावा कई वित्त एवं लेखाधिकारी और कोषागार के जिम्मेदार भी तैनात रहे।
वर्जन
पूरे मामले की गंभीरता से विवेचना कराई जा रही है। विशेष टीम को विवेचना में लगाया गया है। अबतक सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया है। इस मामले में जो भी संलिप्त होगा, उस पर जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - सुकीर्ति माधव, एसपी
