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Pilibhit News: पौधरोपण का दिखावटी उत्सव, अनदेखी से सूख गए लाखों पौधे

Tue, 14 Jul 2026 01:12 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2026 01:12 AM IST
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A tokenistic tree-planting festival; lakhs of saplings withered due to neglect.
कलेक्ट्रेट परिसर में ट्री गार्ड में लगाए गए पेड़। संवाद
पीलीभीत। ''एक पेड़ मां के नाम'' अभियान के तहत प्रत्येक वर्ष पौधे तो लगाए जा रहे हैं, लेकिन लापरवाही के कारण इनका संरक्षण नहीं हो पा रहा है। पिछले साल जिलेभर में लगे कुल पौधों में से 40 फीसदी पौधे देखरेख के अभाव में नष्ट हो गए। इस संबंध में वन विभाग को छोड़कर अन्य विभाग पौधरोपण से संबंधित रिपोर्ट तक प्रस्तुत नहीं कर सके। संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में भी यह बात सामने आई। इसमें शहर व तमाम स्थानों पर बीते वर्ष लगाए गए पौधे सूख गए या फिर अपने स्थान पर नष्ट दिखाई दिए। ट्री गार्ड भी कई जगह टूटे पड़े देखे गए। लोगों का कहना है कि पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण के दावे सिर्फ हवा-हवाई है, जबकि पिछले वर्ष करीब 39.50 लाख पौधे लगाए गए थे।
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जिला अस्पताल मार्ग पर लगे पौधे गायब, गिरे पड़े ट्री गार्ड
पिछले वर्ष नगर पालिका की ओर से जिला अस्पताल के सार्वजनिक मार्ग पर पौधरोपण कार्यक्रम के तहत पौधे लगाए गए थे। ट्री गार्ड भी लगाए गए, लेकिन कुछ समय बाद देखरेख के अभाव में मार्ग पर लगाए गए पौधे तो दूर, ट्री गार्ड तक गिर गए। देखरेख न होने से पौधे भी गायब हो गए।
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हरियाली के श्लोगन के सामने बिना पानी के सूख रहे पौधे
ड्रमंड राजकीय इंटर कॉलेज परिसर में एक दीवार पर हरियाली का संदेश 'प्रकृति का न करें हरण, आओ बचायें पर्यावरण' लिखा देखा गया, जबकि उसके सामने ही बीते वर्ष पौधे लगाने के बाद उसके संरक्षण को ट्री गार्ड लगाया गया, लेकिन समय से देखरेख, पानी, खाद नहीं मिलने के अभाव में कई पौधे पूरी तरह से सूखते दिखाई दिए। कई पौधे उजड़ भी गए।
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कबाड़ हो गए वन विभाग के ट्री गार्ड, पौधों ने तोड़ा दम
ड्रमंड राजकीय इंटर कॉलेज में वन विभाग की ओर से एक शृंखला में पौधरोपण करते हुए सभी पर ट्री गार्ड लगाए गए व बैरिकेडिंग किया गया, लेकिन इनकी देखरेख के अभाव में पौधे तो नष्ट हुए ही बल्कि ट्री गार्ड भी कबाड़ हो गए। पड़ताल में ड्रमंड कॉलेज में लगे ट्री गार्ड कतार से गिरे हुए दिखाई दिए, जबकि उसमें से पौधे तक गायब दिखे।

तहसील परिसर में ट्री गार्ड, अंदर से पौधे ही गायब
तहसील परिसर में बीते वर्ष एक संस्था की ओर से पौधरोपण कार्यक्रम किया गया था, लेकिन परिसर में उसकी देखभाल ठीक से नहीं होने के ट्री गार्ड तो लगे हैं, लेकिन उसके अंदर के सारे पौधे सूख गए। पड़ताल में तहसील परिसर में लगा ट्री गार्ड एकदम ठीक स्थिति में दिखा, जबकि उसके अंदर के लगे पौधे गायब हो गए।

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सूखे पौधों पर नहीं पड़ती नजर
जिला कलक्ट्रेट परिसर के गांधी सभागार से एनआईसी के रास्ते से आए दिन प्रशासनिक अधिकारी गांधी सभागार बैठकों में इसी रास्ते से पैदल गुजरते हैं, लेकिन उनके द्वारा लगाए पेड़ व सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड पर उनकी नजर ही नहीं जाती।

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कटान पर अंकुश नहीं, घट रहा हरित क्षेत्र
हरियाली बढ़ाने के दावों के बीच जिले में पेड़ों की कटाई का सिलसिला थम नहीं रहा है। फ्री प्रजाति के पेड़ों की खरीद-फरोख्त और अवैध कटान का खेल लगातार जारी है। कम कीमतों पर पेड़ खरीदकर रातों-रात काट दिए जाते हैं। कार्रवाई के नाम पर विभागीय स्तर पर औपचारिकताएं पूरी होने के आरोप भी लगते रहे हैं। पूर्व वर्षों में जारी आकड़ों में जिले में 21 वर्ग किमी में हरियाली कम होने की बात सामने आई थी।
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सामाजिक वानिकी को छोड़, शेष विभाग संरक्षण में लापरवाह
विभाग के अनुसार, पौधरोपण के बाद उनके संरक्षण पर भी जोर दिया जाता है। डीएफओ भरत कुमार डीके का कहना है कि हर साल पौधरोपण कर विभागों को पत्राचार कर रिपोर्ट मांगी जाती है, लेकिन समय पर कई विभागों से रिपोर्ट न मिलने से स्थिति का आंकलन नहीं हो पाता है। उन्होंने बताया कि अधिकांश विभाग किसानों को पौधे देकर उनकी देखरेख कराते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पौध लगाने से लेकर उनकी देखरेख तक के लिए प्रति पौध 60 रुपये तक खर्च आता है।
सामाजिक वानिकी के डीएफओ भरत कुमार डीके के अनुसार, ऐसे स्थान जहां पशुओं की अधिक सक्रियता रहती है, वहां ट्री गार्ड लगवाए गए। पिछले साल की बात करें तो विभाग की ओर से तीन हजार ट्री गार्ड लगवाए गए थे। एक ट्री गार्ड की कीमत करीब एक हजार रुपये होती है। इस बार ट्री गार्ड लगवाने को लेकर योजना बनाई जा रही है।
पिछले वर्ष लगाए गए पौधे सूखे
बीसलपुर। पिछले वर्ष मंडी समिति, राजकीय महाविद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय, चीनी मिल, रोडवेज बस स्टैंड, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चुरा सकतपुर , प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शिवपुरी नवदिया, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खांडेपुर और जिला शिक्षा एवम प्रशिक्षण संस्थान आदि संस्थाओं में बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया था। उसमें से अधिकांश पौधे नष्ट हो गए। इन संस्थानों में पिछले वर्ष का लगाए गए पौधे केवल न के बराबर रह गए।
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पर्यावरण संरक्षण के लिए शासन की ओर से हर साल पौधरोपण का लक्ष्य दिया जाता है, उसमें नियमानुसार अमल करने के साथ संरक्षण पर भी जोर दिया जाता है। इस बार विभाग ने स्वयं 2.40 लाख पौधे लगाए, शेष 27 विभागों को वितरित किए गए। नियमित देखरेख के लिए भी विभागों को पत्राचार किए जाते हैं। विभाग की तरफ से लगाए गए सभी पौधे सुरक्षित हैं।

- भरत कुमार डीके, डीएफओ, सामाजिक वानिकी प्रभाग
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इन वर्षों का पौधरोपण लक्ष्य
वर्ष 2024 : करीब 30 लाख पौधे रोपे गए
वर्ष 2025 : 39.50 लाख पौधे रोपे गए
वर्ष 2026 : 40 लाख पौधे रोपे गए

कलेक्ट्रेट परिसर में ट्री गार्ड में लगाए गए पेड़। संवाद

कलेक्ट्रेट परिसर में ट्री गार्ड में लगाए गए पेड़। संवाद

कलेक्ट्रेट परिसर में ट्री गार्ड में लगाए गए पेड़। संवाद

कलेक्ट्रेट परिसर में ट्री गार्ड में लगाए गए पेड़। संवाद

कलेक्ट्रेट परिसर में ट्री गार्ड में लगाए गए पेड़। संवाद

कलेक्ट्रेट परिसर में ट्री गार्ड में लगाए गए पेड़। संवाद

कलेक्ट्रेट परिसर में ट्री गार्ड में लगाए गए पेड़। संवाद

कलेक्ट्रेट परिसर में ट्री गार्ड में लगाए गए पेड़। संवाद

कलेक्ट्रेट परिसर में ट्री गार्ड में लगाए गए पेड़। संवाद

कलेक्ट्रेट परिसर में ट्री गार्ड में लगाए गए पेड़। संवाद

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