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Pilibhit News: पीटीआर बाघ के साथ ही पक्षियों का भी बन रहा गढ़
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पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) अब सिर्फ बाघों का नहीं, पक्षियों का भी गढ़ बन रहा है।
साल के घने जंगल, विशाल घास के मैदान, नदियां, जलाशय, दलदली क्षेत्र और शारदा सागर की वादियां पक्षियों के लिए अनुकूल आवास उपलब्ध करा रही हैं। यही वजह है कि पीटीआर में 350 से अधिक पक्षी प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें करीब 100 प्रजातियां ऐसी हैं, जो अलग-अलग मौसम में यहां प्रवास करती हैं। पीटीआर में मिलने वाले दुर्लभ पक्षियों में बंगाल फ्लोरिकन प्रमुख है। महोफ और बराही रेंज के घास के मैदानों में फरवरी से मई के बीच इसकी मौजूदगी अधिक देखी जाती है। घासभूमि में इस दुर्लभ पक्षी का मिलना पीटीआर में मौजूद बेहतर प्राकृतिक आवास का संकेत माना जाता है। इसका मूल आवास गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी घाटियों से जुड़ा माना जाता है।
जार्डन बुशचैट और हॉगसन बुशचैट भी खास पीटीआर की पक्षी विविधता में जार्डन बुशचैट की मौजूदगी इसे विशेष बनाती है। यह पक्षी भारत में सीमित क्षेत्रों में ही दिखाई देता है और असम के अलावा पीलीभीत टाइगर रिजर्व में भी इसके दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। दुर्लभ हॉगसन बुशचैट की मौजूदगी भी पीटीआर के पक्षी संसार को खास बनाती है। इसके अलावा स्वैम्प फ्रैंकोलिन, वेस्ट हिमालयन बुश वार्बलर, स्टॉटी बुशचैट समेत कई अन्य दुर्लभ प्रजातियां भी यहां दर्ज की गई हैं।
हर मौसम में बदलता रहता है पक्षियों का संसार : पीटीआर में करीब 200 प्रजातियों के स्थानीय पक्षियों के साथ विभिन्न मौसमों में प्रवासी पक्षियों की बड़ी संख्या पहुंचती है। सर्दियों में दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले पक्षी जलाशयों और घास के मैदानों में डेरा डालते हैं। बारिश के बाद जंगल में बढ़ने वाली हरियाली भी पक्षियों के लिए भोजन और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराती है। इस कारण वर्षभर पीटीआर का जंगल पक्षियों के कलरव से गुलजार रहता है।
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सारस और लेसर एडजुटेंट भी खींचते हैं ध्यान : जलाशयों, दलदली क्षेत्रों और आसपास के कृषि परिदृश्य के कारण पीटीआर में बड़े पक्षियों के लिए भी अनुकूल वातावरण है। सारस क्रेन यहां की आर्द्रभूमियों और कृषि क्षेत्रों में नजर आता है। वहीं लेसर एडजुटेंट स्टॉर्क जैसी दुर्लभ प्रजाति की मौजूदगी क्षेत्र की पारिस्थितिक महत्ता को और बढ़ाती है। संवाद
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साल के घने जंगल, विशाल घास के मैदान, नदियां, जलाशय, दलदली क्षेत्र और शारदा सागर की वादियां पक्षियों के लिए अनुकूल आवास उपलब्ध करा रही हैं। यही वजह है कि पीटीआर में 350 से अधिक पक्षी प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें करीब 100 प्रजातियां ऐसी हैं, जो अलग-अलग मौसम में यहां प्रवास करती हैं। पीटीआर में मिलने वाले दुर्लभ पक्षियों में बंगाल फ्लोरिकन प्रमुख है। महोफ और बराही रेंज के घास के मैदानों में फरवरी से मई के बीच इसकी मौजूदगी अधिक देखी जाती है। घासभूमि में इस दुर्लभ पक्षी का मिलना पीटीआर में मौजूद बेहतर प्राकृतिक आवास का संकेत माना जाता है। इसका मूल आवास गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी घाटियों से जुड़ा माना जाता है।
जार्डन बुशचैट और हॉगसन बुशचैट भी खास पीटीआर की पक्षी विविधता में जार्डन बुशचैट की मौजूदगी इसे विशेष बनाती है। यह पक्षी भारत में सीमित क्षेत्रों में ही दिखाई देता है और असम के अलावा पीलीभीत टाइगर रिजर्व में भी इसके दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। दुर्लभ हॉगसन बुशचैट की मौजूदगी भी पीटीआर के पक्षी संसार को खास बनाती है। इसके अलावा स्वैम्प फ्रैंकोलिन, वेस्ट हिमालयन बुश वार्बलर, स्टॉटी बुशचैट समेत कई अन्य दुर्लभ प्रजातियां भी यहां दर्ज की गई हैं।
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हर मौसम में बदलता रहता है पक्षियों का संसार : पीटीआर में करीब 200 प्रजातियों के स्थानीय पक्षियों के साथ विभिन्न मौसमों में प्रवासी पक्षियों की बड़ी संख्या पहुंचती है। सर्दियों में दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले पक्षी जलाशयों और घास के मैदानों में डेरा डालते हैं। बारिश के बाद जंगल में बढ़ने वाली हरियाली भी पक्षियों के लिए भोजन और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराती है। इस कारण वर्षभर पीटीआर का जंगल पक्षियों के कलरव से गुलजार रहता है।
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सारस और लेसर एडजुटेंट भी खींचते हैं ध्यान : जलाशयों, दलदली क्षेत्रों और आसपास के कृषि परिदृश्य के कारण पीटीआर में बड़े पक्षियों के लिए भी अनुकूल वातावरण है। सारस क्रेन यहां की आर्द्रभूमियों और कृषि क्षेत्रों में नजर आता है। वहीं लेसर एडजुटेंट स्टॉर्क जैसी दुर्लभ प्रजाति की मौजूदगी क्षेत्र की पारिस्थितिक महत्ता को और बढ़ाती है। संवाद

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