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Pilibhit News: लटक रहे बिजली के तार, खुले में रखे ट्रांसफाॅर्मरों से खतरा... सुरक्षा नदारद
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पीलीभीत। बिजली आपूर्ति बेहतर करने के लिए भले ही सरकार ने करोड़ों खर्च कर दिए हो, लेकिन धरातल पर स्थिति अलग है। जर्जर लटकते मौत रूपी तार और खुले में रखे ट्रांसफाॅर्मर लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। जिम्मेदार जानते हुए भी अनजान बने हैं। जिले में लगातार हो रहे हादसों के बाद भी विभागीय अफसर इसको लेकर गंभीर नहीं हैं।
हैरान करने वाली बात है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ट्रांसफाॅर्मर बिना किसी सुरक्षा जाली या बैरिकेडिंग के खुले में रखे हुए हैं। इनके आसपास न तो चेतावनी संकेत हैं और न ही कोई सुरक्षा इंतजाम। कई स्थानों पर लोग और बेजुबान मवेशी करंट की चपेट में आ चुके हैं, इसके बावजूद विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
बरसात के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है। नमी और जलभराव के कारण करंट फैलने की संभावना अधिक रहती है, जबकि शासन स्तर से स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं कि सभी ट्रांसफाॅर्मरों को सुरक्षित किया जाए। इसके बावजूद शहर से लेकर गांवों तक इन निर्देशों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने मंगलवार को जब इस मामले को लेकर पड़ताल की तो कई समस्याएं सामने आईं।
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अस्पताल के बाहर लगाया ट्रांसफाॅर्मर, सुरक्षा का पता नहीं
शहर के स्टेडियम मार्ग पर काफी संख्या में निजी अस्पतालों का संचालन हो रहा है। अशोक कॉलोनी के आगे संचालित एक अस्पताल के बाहर ट्रांसफाॅर्मर को लगाया गया है। इस ट्रांसफार्मर पर सुरक्षा के लिहाज से कोई इंतजाम नहीं है, जबकि लोग यहां पर अपने वाहनों को भी खड़ा करते हैं। बारिश के दौरान हर समय अर्थिंग का खतरा बना रहता है।
लापरवाही : आसपास लगा दिए तीन ट्रांसफाॅर्मर
शहर के मोहल्ला मस्जिद पठानी में युवक संघ पुस्तकालय के नजदीक विद्युत निगम की ओर से तीन ट्रांसफाॅर्मर लगाए गए हैं। यहां पर दिन भर लोगों की आवाजाही रहती है। इसके बाद भी विभाग ने सुरक्षा को लेकर यहां पर कोई भी कार्य नहीं कराए हैं। ऐसे में कभी भी कोई बड़ा हादसा होने का खतरा बना हुआ है।
नींबू मंडी के पास लगे खंभे पर तारों का मकड़जाल
शहर के नींबू मंडी के पास रोजाना हजारों-हजारों की भीड़ उमड़ती है। इस मंडी में एक खंभे पर तारों का मकड़जाल फैला हुआ है। व्यापारियों की मानें, तो आए दिन इसकी वजह से फॉल्ट की समस्या होती रहती है। इसके साथ ही कई स्पार्किंग के साथ आपूर्ति भी बाधित होती है।
दुकानों से सटाकर लगाया गया ट्रांसफाॅर्मर, खतरा बरकरार
बरखेड़ा कस्बे के ब्लॉक के निकट विद्युत निगम के अफसरों की ओर से ट्रांसफाॅर्मरों को लगाया गया है। इस पर सुरक्षा को लेकर कोई भी इंतजाम नहीं है। ट्रांसफाॅर्मर में लगाया गया एक बक्सा तारों के सहारे हवा में झूल रहा है। खराबी के दौरान मरम्मत कर विभागीय कर्मचारी चले जाते हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं करते हैं।
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रिवैंप योजना के अंतर्गत हो रहा काम, बावजूद अव्यवस्थाएं हावी
जिले में वर्ष 2022 में करीब 480 करोड़ की लागत से रिवैंप का काम शुरू कराया गया। इसके तहत तार को बंच केबल में बदलना, टूटे व झुके खंभे दुरुस्त करना, ट्रांसफाॅर्मरों की क्षमता को बढ़ाना, नए फीडर स्थापित करने सहित अन्य कार्य कराए जाने थे। कार्य को वर्ष 2024 दिसंबर तक पूरा कराया जाना था। करीब चार वर्ष बीतने के बाद भी रिवैंप का कार्य अधूरा है। शहर में कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति व्यवस्था अभी भी पुराने ढर्रे पर है।
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ट्रांसफाॅर्मरों पर सुरक्षा कार्य लगातार कराए जा रहे हैं। जिन स्थानों पर ट्रांसफाॅर्मर गलत तरह से रखे गए हैं। उन जगहों पर सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही उन स्थानों पर सुरक्षा के इंतजाम करा लिए जाएंगे। इसके साथ ही जहां पर बिजली के तार लटक रहे हैं। उनको भी ठीक कराने के लिए जल्द ही अभियान चलाया जाएगा। - मनोज कुमार, अधीक्षण अभियंता, पॉवर कॉरपोरेशन
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लोग बोले- बिल पर ध्यान, सुविधाओं से कोई मतलब नहीं
विद्युत निगम के अफसर बिल बढ़ाने पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं से उन्हें कोई मतलब नहीं है। काम के दौरान भी सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। - वैभव गुप्ता।
विभागीय अफसरों की ओर से सही से काम कराया जाए, तो आए दिन होने वाले हादसों में कमी आएगी। साथ ही लोगों को आपूर्ति भी ठीक तरह से मिल सकेगी।- संजय वर्मा
लापरवाही के कारण इधर-उधर झूलते हुए बिजली के तारों में करंट आने से निर्दोष नागरिकों की जनहानि हो जाती है। इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। -धीरेंद्र मिश्रा, एडवोकेट
जगह-जगह बिजली के तार लटक रहे हैं। ट्रांसफाॅर्मर भी खुले में रखे हैं। बरसात में बिजली करंट फैलने का खतरा बना रहता है। ऐसे में इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान कराने की जरूरत है। - आनंद मिश्रा
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हैरान करने वाली बात है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ट्रांसफाॅर्मर बिना किसी सुरक्षा जाली या बैरिकेडिंग के खुले में रखे हुए हैं। इनके आसपास न तो चेतावनी संकेत हैं और न ही कोई सुरक्षा इंतजाम। कई स्थानों पर लोग और बेजुबान मवेशी करंट की चपेट में आ चुके हैं, इसके बावजूद विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
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बरसात के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है। नमी और जलभराव के कारण करंट फैलने की संभावना अधिक रहती है, जबकि शासन स्तर से स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं कि सभी ट्रांसफाॅर्मरों को सुरक्षित किया जाए। इसके बावजूद शहर से लेकर गांवों तक इन निर्देशों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने मंगलवार को जब इस मामले को लेकर पड़ताल की तो कई समस्याएं सामने आईं।
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अस्पताल के बाहर लगाया ट्रांसफाॅर्मर, सुरक्षा का पता नहीं
शहर के स्टेडियम मार्ग पर काफी संख्या में निजी अस्पतालों का संचालन हो रहा है। अशोक कॉलोनी के आगे संचालित एक अस्पताल के बाहर ट्रांसफाॅर्मर को लगाया गया है। इस ट्रांसफार्मर पर सुरक्षा के लिहाज से कोई इंतजाम नहीं है, जबकि लोग यहां पर अपने वाहनों को भी खड़ा करते हैं। बारिश के दौरान हर समय अर्थिंग का खतरा बना रहता है।
लापरवाही : आसपास लगा दिए तीन ट्रांसफाॅर्मर
शहर के मोहल्ला मस्जिद पठानी में युवक संघ पुस्तकालय के नजदीक विद्युत निगम की ओर से तीन ट्रांसफाॅर्मर लगाए गए हैं। यहां पर दिन भर लोगों की आवाजाही रहती है। इसके बाद भी विभाग ने सुरक्षा को लेकर यहां पर कोई भी कार्य नहीं कराए हैं। ऐसे में कभी भी कोई बड़ा हादसा होने का खतरा बना हुआ है।
नींबू मंडी के पास लगे खंभे पर तारों का मकड़जाल
शहर के नींबू मंडी के पास रोजाना हजारों-हजारों की भीड़ उमड़ती है। इस मंडी में एक खंभे पर तारों का मकड़जाल फैला हुआ है। व्यापारियों की मानें, तो आए दिन इसकी वजह से फॉल्ट की समस्या होती रहती है। इसके साथ ही कई स्पार्किंग के साथ आपूर्ति भी बाधित होती है।
दुकानों से सटाकर लगाया गया ट्रांसफाॅर्मर, खतरा बरकरार
बरखेड़ा कस्बे के ब्लॉक के निकट विद्युत निगम के अफसरों की ओर से ट्रांसफाॅर्मरों को लगाया गया है। इस पर सुरक्षा को लेकर कोई भी इंतजाम नहीं है। ट्रांसफाॅर्मर में लगाया गया एक बक्सा तारों के सहारे हवा में झूल रहा है। खराबी के दौरान मरम्मत कर विभागीय कर्मचारी चले जाते हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं करते हैं।
रिवैंप योजना के अंतर्गत हो रहा काम, बावजूद अव्यवस्थाएं हावी
जिले में वर्ष 2022 में करीब 480 करोड़ की लागत से रिवैंप का काम शुरू कराया गया। इसके तहत तार को बंच केबल में बदलना, टूटे व झुके खंभे दुरुस्त करना, ट्रांसफाॅर्मरों की क्षमता को बढ़ाना, नए फीडर स्थापित करने सहित अन्य कार्य कराए जाने थे। कार्य को वर्ष 2024 दिसंबर तक पूरा कराया जाना था। करीब चार वर्ष बीतने के बाद भी रिवैंप का कार्य अधूरा है। शहर में कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति व्यवस्था अभी भी पुराने ढर्रे पर है।
ट्रांसफाॅर्मरों पर सुरक्षा कार्य लगातार कराए जा रहे हैं। जिन स्थानों पर ट्रांसफाॅर्मर गलत तरह से रखे गए हैं। उन जगहों पर सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही उन स्थानों पर सुरक्षा के इंतजाम करा लिए जाएंगे। इसके साथ ही जहां पर बिजली के तार लटक रहे हैं। उनको भी ठीक कराने के लिए जल्द ही अभियान चलाया जाएगा। - मनोज कुमार, अधीक्षण अभियंता, पॉवर कॉरपोरेशन
लोग बोले- बिल पर ध्यान, सुविधाओं से कोई मतलब नहीं
विद्युत निगम के अफसर बिल बढ़ाने पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं से उन्हें कोई मतलब नहीं है। काम के दौरान भी सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। - वैभव गुप्ता।
विभागीय अफसरों की ओर से सही से काम कराया जाए, तो आए दिन होने वाले हादसों में कमी आएगी। साथ ही लोगों को आपूर्ति भी ठीक तरह से मिल सकेगी।- संजय वर्मा
लापरवाही के कारण इधर-उधर झूलते हुए बिजली के तारों में करंट आने से निर्दोष नागरिकों की जनहानि हो जाती है। इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। -धीरेंद्र मिश्रा, एडवोकेट
जगह-जगह बिजली के तार लटक रहे हैं। ट्रांसफाॅर्मर भी खुले में रखे हैं। बरसात में बिजली करंट फैलने का खतरा बना रहता है। ऐसे में इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान कराने की जरूरत है। - आनंद मिश्रा