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Pilibhit News: पांच दशक से इंतजार में पथराईं आंखें, विस्थापित परिवारों को अधिकार मिला तो खुशी से बरस पड़ीं

Tue, 30 Jun 2026 03:05 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Published by: Mukesh Kumar Updated Tue, 30 Jun 2026 03:05 PM IST
सार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को पीलीभीत के बरखेड़ा में आयोजित कार्यक्रम में विस्थापित परिवारों को जमीन के मालिकाना हक के प्रमाणपत्र सौंपे। इसके साथ ही सीएम ने 106 लोगों को नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत नागरिकता प्रमाणपत्र दिए। प्रमाणपत्र पाकर लाभार्थी के चेहरे खुशी से खिल उठे। 

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Faces lit up with joy when displaced families received Citizenship and land ownership certificates
सीएम योगी ने लाभार्थियों को बांटे प्रमाणपत्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पीढ़ियों से जिस पहचान और अधिकार का इंतजार था, वह आखिरकार पूरा हो गया। पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से विस्थापित होकर पीलीभीत में बसे करीब ढाई हजार परिवारों का संघर्ष सोमवार को निर्णायक मोड़ पर पहुंचा। बरखेड़ा में मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों कई लोगों को भूमि अधिकार और नागरिकता प्रमाणपत्र मिले तो उनकी आंखें खुशी से बरस पड़ीं।

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पूर्वी पाकिस्तान से वर्ष 1959 से 1971 के बीच आए परिवारों को अमरिया, न्यूरिया, शारदा डैम की तलहटी सहित जिले के कई क्षेत्रों में बसाया गया था। सरकार ने उन्हें खेती और आवास के लिए जमीन तो दी, लेकिन उसका मालिकाना हक नहीं मिल सका। दशकों से इसकी जद्दोजहद चलती रही। प्रदेश सरकार की पहल पर जिले में ऐसे परिवारों को सूचीबद्ध कर नागरिकता और मालिकाना हक देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया था। 
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जिला प्रशासन के सर्वे में 2,100 से अधिक विस्थापित परिवार चिह्नित हुए थे। इधर बरखेड़ा के पतरासा कुंवरपुर में आयोजित जनसभा में नागरिकता प्रमाणपत्र मिलने के बाद उनमें उत्साह का माहौल रहा। 
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लोग बोले- अब बच्चों का भविष्य सुरक्षित 
लोगों ने इसे केवल एक सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, पहचान और सम्मान की जीत बताया। सभा स्थल पर मौजूद विस्थापित परिवारों ने कहा कि दशकों से चली आ रही उनकी सबसे बड़ी चिंता आज दूर हो गई। अब उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा और वे सम्मान के साथ अपनी जमीन के मालिक कहलाएंगे।

Faces lit up with joy when displaced families received Citizenship and land ownership certificates
सीएम के कार्यक्रम में लाभार्थी - फोटो : अमर उजाला
जिलेभर से सभा में पहुंचे विस्थापित परिवार
विस्थापित परिवारों के लोग मालिकाना हक पाने और मुख्यमंत्री को सुनने के लिए उत्सुक थे। यही वजह रही कि सभा में कलीनगर के तराई, हजारा, अमरिया और न्यूरिया क्षेत्र से बड़ी संख्या में ऐसे लोग पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान पूरा जोश दिखाया। कई बार पारंपरिक ध्वनि निकालकर खुशी का इजहार किया। पारंपरिक लिबास में पहुंचीं बंगाली समाज की महिलाएं आकर्षण का केंद्र रहीं। 

इंतजार में बीती आधी सदी, अब पूरा हुआ सपना
विमल गोलदार ने बताया कि पूर्वी पाकिस्तान में सुरक्षा का संकट खड़ा हुआ तो वर्ष 1967 में वहां से विस्थापित हुए। यहां शारदा डैम की तलहटी में लाकर बसाया गया। तब से कई बार नागरिकता और मालिकाना हक पाने के लिए प्रयास कर रहे थे। अब हमारी उम्मीद पूरी हुई।

खितीश मजूमदार ने कहा कि वर्ष 1964 में शारदा डैम की तलहटी में आकर बसे थे। सरकार ने हमारी दशकों पुरानी समस्या को दूर किया। अब हम भी भारतीय कहलाने के हकदार हैं। 

महेंद्र दास ने कहा कि पांच दशक से मालिकाना हक पाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे थे। कई बार प्रयास हुए, सर्वे भी हुए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी थी। अब भाजपा सरकार ने नागरिकता प्रमाणपत्र देकर हमारी मांग को पूरा कर दिया। हमें इसका लाभ भी मिलेगा। 

नौजल्हा नकटहा के प्रधान राम जीवन सरकार ने कहा कि शारदा डैम की तलहटी में करीब 57 साल से विस्थापित परिवार बसे हैं, लेकिन उन्हें मालिकाना हक नहीं दिया जा रहा था। अब उनकी वर्षों पुरानी तमन्ना पूरी हो गई। वर्तमान सरकार ने उनकी मांग को पूरा किया है। 

कमला हलदर ने कहा कि हम कई दशकों से भारत में रहते आ रहे हैं, लेकिन नागरिकता का हक न मिलने से परेशान थे। बच्चों को भी परेशानी हो रही थी। अब उम्मीद पूरी हो गई।

सुमंतू पाली ने कहा कि कई वर्षों के बाद नागरिकता और जमीन का मालिकाना हक मिला है। इससे हमें केंद्र और प्रदेश सरकार पर गर्व महसूस हो रहा है। हमारी पीढि़यों की समस्या को दशकों बाद दूर किया। हम सरकार का आभार व्यक्त करते हैं। 

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