Pilibhit News: दहेज हत्या के आरोप में उमेश ने 31 महीने काटी जेल, अब कोर्ट से हुआ दोषमुक्त
पीलीभीत में पत्नी की मौत के बाद दहेज हत्या के आरोप में घिरे उमेश और उसके माता-पिता को संदेह के लाभ में दोषमुक्त कर दिया गया। कोर्ट का आदेश मिलने पर उसे जेल से रिहा कर दिया गया। उमेश को 31 माह तक इस आरोप में जेल में बंद रहना पड़ा था।
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पीलीभीत के बरखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव जिरौनियां में जून 2023 में संदिग्ध हालात में जहर खाने से पुष्पा देवी की मौत के बाद दहेज हत्या के आरोप में घिरे पति, सास और ससुर को संदेह के लाभ में दोषमुक्त कर दिया गया। पति उमेश को 31 माह तक इस आरोप में जेल में बंद रहना पड़ा। एडीजे (पंचम) के न्यायालय से दोषमुक्ति का आदेश जारी होने के बाद उमेश अब जेल से बाहर आ सका। इस मामले में ससुर भीमसेन उर्फ अनोखेलाल और सास फूलवती भी तीन माह जेल में बंद रहे थे।
बरेली जिले के थाना क्योलड़िया के गांव माधोपुर निवासी सुनील कुमार ने 16 जून 2023 को बरखेड़ा थाने में तहरीर दी थी। बताया था कि उसकी बहन पुष्पा देवी की उसके पति उमेश, ससुर भीमसेन उर्फ अनोखेलाल व सास फलवती आदि ने दहेज की मांग को लेकर जहर देकर हत्या कर दी है।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की और आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पंचम) छांगुर राम ने पिछले सप्ताह पत्रावलियों का अवलोकन और दोनों पक्षों की बहस व दलीलें सुनने के बाद आरोपी पति व सास-ससुर को संदेह के लाभ में बरी कर दिया। साथ ही जेल में निरुद्ध पति की जल्द रिहाई का आदेश भी दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय का हवाला देते हुए एडीजे छांगुर राम ने कहा कि अभियुक्तों के विरुद्ध समग्रता में सत्य का कुछ अंश हो सकता है। वही सत्य है, इन दोनों तथ्यों के मध्य एक लंबा अंतराल होता है। अभियोजन पक्ष इस अंतराल को पूरा करने का दायित्व होता है। इस मामले अभियोजन पक्ष की ओर से यह साबित नहीं हो सका कि अभियुक्तों ने दहेज की मांग की थी या उसके लिए प्रताड़ित किया था।
साथ ही जहर देकर हत्या करने की बात साबित करने में अभियोजन पक्ष पूरी तरह से असफल रहा। आदेश में बचाव पक्ष के उस तर्क का भी हवाला दिया गया है, जिसमें पिता ओमप्रकाश ने कहा था कि मई 2022 में शादी होने के काफी समय बाद भी उनकी बेटी के बच्चा नहीं हुआ था, जिससे वह परेशान रहती थी। बचाव पक्ष का कहना था कि इससे इस संभावना को बल मिलता है कि इसी अवसाद की स्थिति पुष्पा ने जहर खा लिया हो।
काटी जेल, गिरवी रखे खेत, बहन की शादी रुकी
जेल से बाहर आए उमेश ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद वह और उसके माता-पिता को जेल भेज दिया गया। पिता भीमसेन और मां फूलवती तीन-तीन महीने जेल में बंद रहे। उमेश की रिहाई मुकदमे में फैसला आने पर करीब 31 माह बाद हुई है।
उमेश ने बताया कि इन तीन वर्षों में उसने जो खोया है, उसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता। उसके जेल जाने के बाद एक नाबालिग भाई व बहन ने जैसे-तैसे गुजारा किया। बहन की शादी और भाई की पढ़ाई रुक गई। उमेश ने बताया कि चार बीघा खेत और जेवर गिरवी रखे हैं। उसके पास हार्निया के इलाज के पैसे नहीं है। उमेश ने बताया कि सात अप्रैल को मुकदमे में निर्णय आया है। अगले दिन वह जेल से छूटकर घर पहुंचे।