धर्मांतरण-यौन शोषण केस: आरोपी डॉक्टर का निकाह करने वाले मौलवी ने किया बड़ा दावा, लखनऊ पुलिस ने की पूछताछ
धर्मांतरण और यौन शोषण के आरोपी डॉक्टर रमीजुद्दीन नाइक के तार पीलीभीत जिले से जुड़े हैं। इस मामले में लखनऊ पुलिस ने पीलीभीत के मौलवी से पूछताछ की है। मौलवी ने कई चौंकाने वाले दावे किए हैं।
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धर्मांतरण और यौन शोषण के आरोपी डॉ. रमीजुद्दीन नाइक के मामले में लखनऊ पुलिस की जांच का दायरा पीलीभीत तक फैल गया है। पुलिस ने जांच के सिलसिले में पीलीभीत के एक मुस्लिम मौलवी से पूछताछ की है। इससे पूर्व लखनऊ पुलिस की एक टीम न्यूरिया कस्बे पहुंचकर आरोपी डॉक्टर के पैतृक घर पर कुर्की का नोटिस चस्पा कर चुकी है। उधर, लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) ने आरोपी डॉक्टर को निकालने का फैसला किया है।
पीलीभीत में शहर काजी के तौर पर काम करने वाले मौलवी जाहिद हसन राणा से लखनऊ पुलिस ने पूछताछ की है। डॉ. रमीजुद्दीन से जुड़े मामले में उनका नाम सामने आया है। पूछताछ के बाद राणा ने बताया कि उन्होंने पुलिस के साथ पूरा सहयोग किया और शादी से जुड़ी सभी जानकारी दी। उन्होंने किसी भी गलत काम से इनकार किया और कहा कि लखनऊ में शिकायत दर्ज कराने वाली महिला वह नहीं थी, जिसकी शादी उन्होंने करवाई थी।
मौलवी जाहिद हसन ने दावा किया कि उन्होंने पिछले साल मार्च में अपने घर पर डॉ. रमीजुद्दीन और एक हिंदू युवती का निकाह युवती के माता-पिता और भाई की मौजूदगी में उनकी सहमति लेने के बाद ही करवाया था। राणा ने कहा कि कोई धर्म परिवर्तन नहीं हुआ और निकाहनामा में युवती का मूल हिंदू नाम दर्ज था। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिस युवती की शादी उन्होंने करवाई थी, वह अभी भी नाइक के साथ रहती है और उसने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है।
न्यूरिया का रहने वाला है डॉ. रमीज
डॉ. रमीज का पीलीभीत के न्यूरिया हुसैनपुर कस्बे में मूल निवास है, हालांकि उसके परिजन लंबे समय से उत्तराखंड के खटीमा में रह रहे हैं। पूर्व में लखनऊ पुलिस ने न्यूरिया पहुंचकर जांच की थी। इस दौरान एक रिश्तेदार को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। इसमें घर को दान में दिए जाने की बात भी सामने आई थी। इसके साथ ही जांच में निकाह करने वाले काजी जाहिद हसन और उसमें गवाह बने युवक शारिक के भी शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला फीलखाना के होने की बात सामने आई थी।
केजीएमयू प्रबंधन ने आरोपी डॉक्टर को बाहर निकालने का किया फैसला
उधर, केजीएमयू के प्रवक्ता के.के. सिंह ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि कुलपति ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मामले और यूनिवर्सिटी द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी दी थी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि केजीएमयू की कुलपति सोनिया नित्यानंद ने लखनऊ में मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उन्हें यूनिवर्सिटी की आंतरिक जांच के नतीजों के बारे में बताया, जिसमें विशाखा समिति की रिपोर्ट भी शामिल है, जिसमें पहली नजर में आरोपी डॉक्टर के खिलाफ आरोप सही पाए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि नित्यानंद ने आदित्यनाथ को यह भी बताया कि केजीएमयू ने आरोपी को एमडी कोर्स से निकालने का फैसला किया है।
यह है मामला
डॉ. रमीजुद्दीन नाइक को 10 जनवरी को एक महिला डॉक्टर की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया गया था, जिसने उस पर अपनी शादीशुदा स्थिति छिपाने, शादी का वादा करके उसका यौन शोषण करने, उसे गर्भपात कराने के लिए मजबूर करने, उसे धमकी देने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया था। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश पुलिस इस मामले को एक संभावित संगठित धार्मिक धर्मांतरण रैकेट के तौर पर भी देख रही है और यह जांच कर रही है कि क्या यह किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा है।