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Pilibhit News: प्रतिकूल प्रभाव की घटनाओं को देखते हुए फार्माकोविजिलेंस जरूरी
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पीलीभीत। औषधियों की सुरक्षा व प्रमाणिकता को मजबूत बनाने की दिशा में आयुर्वेदिक कॉलेज के शैक्षिक ब्लॉक में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें ‘फार्माकोविजिलेंस फॉर आयुर्वेदिक ड्रग्स रीसेंट एडवांसेज एंड फ्यूचर पर्सपेक्टिव्स विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से आए विशेषज्ञों ने शोधपरक विचार साझा किए।
संगोष्ठी का शुभारंभ अतिथियों ने भगवान धन्वंतरि के समक्ष दीप जलाकर किया। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सुदीप सहाय बेदार ने कहा कि आयुर्वेदिक दवाओं को सुरक्षित मानने की परंपरा के बावजूद वर्तमान में प्रतिकूल प्रभावों की घटनाओं को देखते हुए फार्माकोविजिलेंस अत्यंत आवश्यक हो गया है। यह आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक रूप से स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रो. नम्रता जोशी ने औषधि निर्माण में गुणवत्ता नियंत्रण पर जोर दिया, जबकि प्रो.अंजू सक्सेना ने आयुर्वेदिक व आधुनिक दवाओं के परस्पर प्रभाव और तर्कसंगत उपयोग पर प्रकाश डाला। प्रो. गालिब ने आयुष दवाओं के लिए फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम की उपयोगिता पर चर्चा की। कार्यक्रम में चिकित्सक डॉ. शैलेंद्र, डॉ. हरिशंकर मिश्रा, डॉ. अखिलेश आदि मौजूद रहे।
प्रो. केके ठकराल को किया सम्मानित
आयुर्वेदिक कॉलेज में 1980-1986 तक शल्य चिकित्सा तंत्र विभाग में सेवाएं दे चुके व आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में 90 वर्ष की आयु के बावजूद सेवाएं दे रहे प्रो. केके ठकराल को आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य की ओर से सम्मानित किया गया। 13 मई को प्रो.केके ठकराल को पदमश्री पुरस्कार से नवाजा जाएगा। संवाद
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संगोष्ठी का शुभारंभ अतिथियों ने भगवान धन्वंतरि के समक्ष दीप जलाकर किया। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सुदीप सहाय बेदार ने कहा कि आयुर्वेदिक दवाओं को सुरक्षित मानने की परंपरा के बावजूद वर्तमान में प्रतिकूल प्रभावों की घटनाओं को देखते हुए फार्माकोविजिलेंस अत्यंत आवश्यक हो गया है। यह आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक रूप से स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रो. नम्रता जोशी ने औषधि निर्माण में गुणवत्ता नियंत्रण पर जोर दिया, जबकि प्रो.अंजू सक्सेना ने आयुर्वेदिक व आधुनिक दवाओं के परस्पर प्रभाव और तर्कसंगत उपयोग पर प्रकाश डाला। प्रो. गालिब ने आयुष दवाओं के लिए फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम की उपयोगिता पर चर्चा की। कार्यक्रम में चिकित्सक डॉ. शैलेंद्र, डॉ. हरिशंकर मिश्रा, डॉ. अखिलेश आदि मौजूद रहे।
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प्रो. केके ठकराल को किया सम्मानित
आयुर्वेदिक कॉलेज में 1980-1986 तक शल्य चिकित्सा तंत्र विभाग में सेवाएं दे चुके व आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में 90 वर्ष की आयु के बावजूद सेवाएं दे रहे प्रो. केके ठकराल को आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य की ओर से सम्मानित किया गया। 13 मई को प्रो.केके ठकराल को पदमश्री पुरस्कार से नवाजा जाएगा। संवाद
