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Pilibhit News: स्कूलोंं ने बढ़ाई फीस, महंगी ड्रेस-कोर्स के तले दबे अभिभावक
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शहर के एक स्टेशनरी दुकान पर कोर्स लेने के लिए अभिभावको की भीड़। संवाद
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पीलीभीत। शैक्षिक सत्र में बच्चों पर बस्ते व अभिभावकों पर स्कूल की फीस, ड्रेस और महंगे कोर्स का बोझ बढ़ गया है। कक्षा एक से आठ तक का कोर्स 3500 से लेकर सात-आठ हजार रुपये में मिल रहा है। कुछ स्कूल संचालकों ने अलग-अलग मद दिखाकर मासिक शुल्क में दो से तीन सौ रुपये बढ़ा दिए हैं। ड्रेस के नाम पर भी अभिभावकों की जेब ढीली की जा रही है। बाजार में करीब दो सौ रुपये का मिलने वाला शर्ट स्कूल का लोगो लगने के बाद तीन सौ रुपये से ऊपर का मिल रहा है।
एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र 2026-27 शुरू हो गया है। प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा आठ और नौ से 12 कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावक इस समय कापी-किताब की दुकानों पर नजर आ रहे हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अभिभावकों पर बच्चों की पढ़ाई का बोझ बढ़ गया है। हिंदी व अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के संचालकों ने कोर्स में एनसीईआरटी के अतिरिक्त निजी प्रकाशकों की पुस्तकें भी शामिल कर रखी हैं। निजी प्रकाशकों की पुस्तकें काफी महंगी दर पर खरीदनी पड़ रही हैं।
शहर में कक्षा एक से लेकर आठ तक का कोर्स 3500 से लेकर 8000 रुपये तक में मिल रहा है। कक्षा 12 की पुस्तकें अधिक महंगी होने के चलते कोर्स 9000 तक पहुंच रहा है। अभिभावक स्कूलों की मनमानी की बात तो कह रहे, लेकिन विरोध जताने में हिचकिचा भी रहे हैं। हालांकि मनमाने तरीके से एनसीईआरटी की पुस्तकों के अलावा निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें शामिल करने पर विरोध हो रहा है।
स्कूल की ड्रेस चिह्नित दुकानों पर ही उपलब्ध
शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों की ड्रेस सिर्फ चिह्नित दुकानों पर ही मिल रही है। दुकान पर पहुंचकर अभिभावक सिर्फ स्कूल का नाम बता रहे हैं। वहीं पर स्कूल का लोगो लगी ड्रेस मिल जा रही है। बाजार में सामान्य दुकानों पर इसी ड्रेस का शर्ट दो सौ रुपये में आसानी से मिल जाता है। लोगो लगने के बाद इसकी कीमत 300 से रुपये हो जाती है। शहर के एक पुराने स्कूल ड्रेस व्यापारी ने बताया कि स्कूलों से अनुबंध के चलते कई दुकानों पर ही स्कूलों की ड्रेस मिल रही है, जो कि दोगुने दामों पर हैं। इसके अलावा कुछ स्कूलों ने सप्ताह में दो से तीन प्रकार की ड्रेस तय कर रखी है।
अंग्रेजी से सस्ता है हिंदी माध्यम का कोर्स
हिंदी माध्यम स्कूलों का कोर्स अंग्रेजी माध्यम की तुलना में सस्ता है। कक्षा आठ अंग्रेजी माध्यम का कोर्स जहां आठ हजार रुपये में मिल रहा है। वहीं, हिंदी का 4500 रुपये तक में मिल जा रहा है। संवाद
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महंगाई ने बिगाड़ा बजट
कोर्स की महंगाई ने बजट बिगाड़ दिया है। आम व्यक्ति के लिए अब बच्चों का पढ़ाना काफी महंगा हो गया है। ड्रेस, किताबें काफी महंगी हैं। स्कूलों ने दुकान भी तय कर रखी है। - दिनेश बाथम
स्कूल की सूची अनुसार खरीदनी पड़ रहीं किताबें
बाजार में एनसीईआरटी के अलावा किताबें स्कूल की सूची के अनुसार खरीदनी पड़ रही है। किताबें काफी महंगी है। - करन सिंह गंगवार
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मासिक फीस में बढ़ोतरी
अभिभावक कलीम उर रहमान शम्सी ने बताया कि उनका बेटा एक निजी स्कूल में कक्षा सात में है। स्कूल का कक्षा छह से आठ तक का शुल्क इस बार करीब 200 रुपये बढ़ गया है। पिछले वर्ष मासिक शुल्क 3600 था, जो अब 3800 हो गया है। पिछले वर्ष अलग-अलग मदों को मिलाकर 45,450 रुपये थे। नई रसीद में यह धनराशि 47,850 रुपये दिखाई गई है।
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एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र 2026-27 शुरू हो गया है। प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा आठ और नौ से 12 कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावक इस समय कापी-किताब की दुकानों पर नजर आ रहे हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अभिभावकों पर बच्चों की पढ़ाई का बोझ बढ़ गया है। हिंदी व अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के संचालकों ने कोर्स में एनसीईआरटी के अतिरिक्त निजी प्रकाशकों की पुस्तकें भी शामिल कर रखी हैं। निजी प्रकाशकों की पुस्तकें काफी महंगी दर पर खरीदनी पड़ रही हैं।
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शहर में कक्षा एक से लेकर आठ तक का कोर्स 3500 से लेकर 8000 रुपये तक में मिल रहा है। कक्षा 12 की पुस्तकें अधिक महंगी होने के चलते कोर्स 9000 तक पहुंच रहा है। अभिभावक स्कूलों की मनमानी की बात तो कह रहे, लेकिन विरोध जताने में हिचकिचा भी रहे हैं। हालांकि मनमाने तरीके से एनसीईआरटी की पुस्तकों के अलावा निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें शामिल करने पर विरोध हो रहा है।
स्कूल की ड्रेस चिह्नित दुकानों पर ही उपलब्ध
शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों की ड्रेस सिर्फ चिह्नित दुकानों पर ही मिल रही है। दुकान पर पहुंचकर अभिभावक सिर्फ स्कूल का नाम बता रहे हैं। वहीं पर स्कूल का लोगो लगी ड्रेस मिल जा रही है। बाजार में सामान्य दुकानों पर इसी ड्रेस का शर्ट दो सौ रुपये में आसानी से मिल जाता है। लोगो लगने के बाद इसकी कीमत 300 से रुपये हो जाती है। शहर के एक पुराने स्कूल ड्रेस व्यापारी ने बताया कि स्कूलों से अनुबंध के चलते कई दुकानों पर ही स्कूलों की ड्रेस मिल रही है, जो कि दोगुने दामों पर हैं। इसके अलावा कुछ स्कूलों ने सप्ताह में दो से तीन प्रकार की ड्रेस तय कर रखी है।
अंग्रेजी से सस्ता है हिंदी माध्यम का कोर्स
हिंदी माध्यम स्कूलों का कोर्स अंग्रेजी माध्यम की तुलना में सस्ता है। कक्षा आठ अंग्रेजी माध्यम का कोर्स जहां आठ हजार रुपये में मिल रहा है। वहीं, हिंदी का 4500 रुपये तक में मिल जा रहा है। संवाद
महंगाई ने बिगाड़ा बजट
कोर्स की महंगाई ने बजट बिगाड़ दिया है। आम व्यक्ति के लिए अब बच्चों का पढ़ाना काफी महंगा हो गया है। ड्रेस, किताबें काफी महंगी हैं। स्कूलों ने दुकान भी तय कर रखी है। - दिनेश बाथम
स्कूल की सूची अनुसार खरीदनी पड़ रहीं किताबें
बाजार में एनसीईआरटी के अलावा किताबें स्कूल की सूची के अनुसार खरीदनी पड़ रही है। किताबें काफी महंगी है। - करन सिंह गंगवार
मासिक फीस में बढ़ोतरी
अभिभावक कलीम उर रहमान शम्सी ने बताया कि उनका बेटा एक निजी स्कूल में कक्षा सात में है। स्कूल का कक्षा छह से आठ तक का शुल्क इस बार करीब 200 रुपये बढ़ गया है। पिछले वर्ष मासिक शुल्क 3600 था, जो अब 3800 हो गया है। पिछले वर्ष अलग-अलग मदों को मिलाकर 45,450 रुपये थे। नई रसीद में यह धनराशि 47,850 रुपये दिखाई गई है।

शहर के एक स्टेशनरी दुकान पर कोर्स लेने के लिए अभिभावको की भीड़। संवाद

शहर के एक स्टेशनरी दुकान पर कोर्स लेने के लिए अभिभावको की भीड़। संवाद