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Pilibhit News: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से क्षेत्र में जरदोजी की चमक पड़ी फीकी

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 07 Apr 2026 01:53 AM IST
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The ongoing war in West Asia has dimmed the sheen of Zardozi in the region.
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विदेशों से आने वाले ऑर्डर में आई कमी, शिल्प कला से जुड़े परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित
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न्यूरिया। पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव और युद्ध का असर अब स्थानीय उद्योगों पर भी दिखाई देने लगा है। खासकर न्यूरिया क्षेत्र की पारंपरिक जरदोजी कारीगरी, जो अपनी बारीकी और शिल्पकला के लिए दूर-दूर तक पहचान रखती है। इन दिनों क्षेत्र में जरदोजी की चमक फीकी पड़ रही है। इससे जुड़ी महिलाओं के परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है।

कस्बा निवासी जरदोजी कारोबार से जुड़ीं शाहीन जहां, नूरी, शाहीन आदि ने बताया कि कस्बे और आसपास के गांवों में सैकड़ों परिवारों की महिलाएं इस काम से जुड़ी हैं। यहां तैयार होने वाले लहंगे, सूट, दुपट्टे और अन्य कढ़ाईदार परिधान देश के बड़े बाजारों दिल्ली, जयपुर और गुड़गांव भेजे जाते हैं। इन बाजारों से यह उत्पाद विभिन्न देशों में निर्यात होते थे। यहां इनकी अच्छी मांग बनी रहती है। इस समय युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विदेशी ऑर्डरों में लगातार गिरावट आ रही है। इससे स्थानीय व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पहले जहां हर महीने बड़े स्तर पर ऑर्डर मिलते थे, अब उनमें काफी कमी देखी जा रही है। इसका सीधा असर कारीगरों की आजीविका पर पड़ रहा है।
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कारीगरों के सामने चुनौती

कारीगरों का कहना है कि काम कम होने से तैयार माल का स्टॉक बढ़ता जा रहा है, जबकि बाजार में उसकी खपत घट गई है। नतीजतन, कीमतों में गिरावट आई है। महिलाओं का कहना है कि उन्हें मेहनत के अनुरूप पारिश्रमिक नहीं मिल पा रहा है। कई छोटे कारीगरों को मजबूरी में दूसरे रोजगार की तलाश करनी पड़ रही है, जिससे पारंपरिक कला के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है।
25 फीसद कम हुआ काम, दाम भी गिरे

महिलाओं की ओर से तैयार जरदोजी व कढ़ाई के कपड़े लेकर दिल्ली, गुडगांव और अन्य बाजारों में ले जाने वाले व्यापारी नदीम ने बताया कि युद्ध की वजह से 20 से 25 प्रतिशत काम कम हो गया है। उधर, तैयार कपड़े की कीमत पर भी असर पड़ा है। दूसरे देशों में न जा पाने के कारण 1000 रुपये में बना सूट अब 800 रुपये में ही मांगा जा रहा है। इसी तरह महंगे परिधानों के दामों पर भी 15 प्रतिशत तक गिरावट आई है। संवाद
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