{"_id":"69d2ba4142d8db421d0667ca","slug":"sensitive-areas-will-be-equipped-with-ai-and-thermal-surveillance-pilibhit-news-c-121-1-pbt1005-156832-2026-04-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pilibhit News: एआई और थर्मल सर्विलांस से लैस होंगे संवेदनशील क्षेत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pilibhit News: एआई और थर्मल सर्विलांस से लैस होंगे संवेदनशील क्षेत्र
विज्ञापन
विज्ञापन
बाघों के प्रबंधन को नई तकनीक से मिलेगी मदद, प्रोजेक्ट टीओटीआर के तहत पहली किस्त जारी
पीलीभीत। जंगल से बाहर आबादी क्षेत्रों में पहुंचने वाले बाघों के प्रबंधन के लिए बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट टीओटीआर (टाइगर आउटसाइड टाइगर रिजर्व) अब धरातल पर उतरने जा रहा है। सरकार ने इसके लिए 90 लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर दी है, जिससे नए वित्तीय वर्ष में परियोजना को गति मिलेगी। इससे बाघों के प्रबंधन के नई तकनीक को धार मिलेगी।
तराई क्षेत्र में अक्सर बाघ जंगल से निकलकर गन्ने के खेतों और रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बनती है। इसी समस्या के समाधान के लिए वन विभाग ने प्रोजेक्ट टीओटीआर तैयार किया है। इस योजना के तहत टाइगर रिजर्व की सीमा से सटे संवेदनशील क्षेत्रों को आधुनिक एआई और थर्मल सर्विलांस तकनीक से लैस किया जाएगा।
प्रोजेक्ट के अंतर्गत थर्मल कैमरे, सेंसर आधारित उपकरण और एआई बेस्ड कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे, जो 24 घंटे वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। यह तकनीक बाघों और तेंदुओं की मूवमेंट, उनके पैटर्न और फैलाव का विश्लेषण कर वन विभाग को सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगी। वन एवं वन्यजीव प्रभाग द्वारा इस परियोजना का क्रियान्वयन किया जाएगा।
तीन वर्षों तक 90-90 लाख रुपये की किश्तों में बजट आवंटित किया जाएगा, जिसमें पहली किश्त जारी हो चुकी है। इसके साथ ही रेस्क्यू ऑपरेशन को मजबूत करने के लिए थर्मल ड्रोन, आधुनिक पिंजरे, जाल और रेस्क्यू व्हीकल भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस परियोजना से मिलेगी मदद : डीएफओ
डीएफओ भरत कुमार डीके का कहना है कि इस परियोजना से न केवल संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि बाघों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी बड़ी मदद मिलेगी। संवाद
Trending Videos
पीलीभीत। जंगल से बाहर आबादी क्षेत्रों में पहुंचने वाले बाघों के प्रबंधन के लिए बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट टीओटीआर (टाइगर आउटसाइड टाइगर रिजर्व) अब धरातल पर उतरने जा रहा है। सरकार ने इसके लिए 90 लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर दी है, जिससे नए वित्तीय वर्ष में परियोजना को गति मिलेगी। इससे बाघों के प्रबंधन के नई तकनीक को धार मिलेगी।
तराई क्षेत्र में अक्सर बाघ जंगल से निकलकर गन्ने के खेतों और रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बनती है। इसी समस्या के समाधान के लिए वन विभाग ने प्रोजेक्ट टीओटीआर तैयार किया है। इस योजना के तहत टाइगर रिजर्व की सीमा से सटे संवेदनशील क्षेत्रों को आधुनिक एआई और थर्मल सर्विलांस तकनीक से लैस किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रोजेक्ट के अंतर्गत थर्मल कैमरे, सेंसर आधारित उपकरण और एआई बेस्ड कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे, जो 24 घंटे वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। यह तकनीक बाघों और तेंदुओं की मूवमेंट, उनके पैटर्न और फैलाव का विश्लेषण कर वन विभाग को सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगी। वन एवं वन्यजीव प्रभाग द्वारा इस परियोजना का क्रियान्वयन किया जाएगा।
तीन वर्षों तक 90-90 लाख रुपये की किश्तों में बजट आवंटित किया जाएगा, जिसमें पहली किश्त जारी हो चुकी है। इसके साथ ही रेस्क्यू ऑपरेशन को मजबूत करने के लिए थर्मल ड्रोन, आधुनिक पिंजरे, जाल और रेस्क्यू व्हीकल भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस परियोजना से मिलेगी मदद : डीएफओ
डीएफओ भरत कुमार डीके का कहना है कि इस परियोजना से न केवल संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि बाघों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी बड़ी मदद मिलेगी। संवाद