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Pilibhit News: उठ रही लापरवाही की चिंगारी, अनदेखी के धुएं में सुरक्षा इंतजाम गायब
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संकरी गली के इस भवन में संचालित कोचिंग सेंटर। संवाद
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पीलीभीत। लखनऊ में कोचिंग सेंटर में आग लगने की घटना के बाद जहां पूरे प्रदेश में फायर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, शहर के अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों, होटलों और अन्य व्यावसायिक इमारतों में भी हालात चिंताजनक मिले। संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में सामने आया कि अधिकांश प्रतिष्ठानों में आग से बचाव के इंतजाम अधूरे हैं। संकरी इमारतों, एकमात्र निकासी मार्ग और ज्वलनशील वस्तुओं के बीच रखे विद्युत उपकरण किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग अब तक केवल औपचारिक जांच तक सीमित नजर आ रहे हैं।
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अस्पताल में हाइडेंट से जुड़ा घरेलू पाइप, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
गांधी स्टेडियम मार्ग स्थित एक प्रतिष्ठित अस्पताल में आग से सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी मिले। अस्पताल की पहली मंजिल पर लगे वाटर हाइडेंट में उच्च दबाव वाली पाइप के स्थान पर सामान्य घरेलू पाइप लगा मिला। वहीं, रैंप के रास्ते में रखे विद्युत उपकरणों के आसपास प्लास्टिक और अन्य ज्वलनशील सामग्री रखी मिली। विशेषज्ञों के अनुसार, आग लगने की स्थिति में यह व्यवस्था प्रभावी साबित नहीं होगी।
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संकरी गली में संचालित कोचिंग सेंटर, निकासी का एकमात्र रास्ता
मोहल्ला सुनगढ़ी में संचालित एक प्रतिष्ठित कोचिंग सेंटर में भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी मिली। आवासीय नक्शे पर बने भवन में संचालित इस संस्थान में विद्यार्थियों के प्रवेश और निकास के लिए केवल एक गेट है। आग जैसी आपात स्थिति में बड़ी संख्या में छात्रों की सुरक्षित निकासी चुनौती बन सकती है। वहीं, फायर ब्रिगेड के उपकरणों और वाटर हाइडेंट की पहुंच भी यहां तक आसान नहीं दिखी।
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तीन मंजिला इमारत में सुरक्षा इंतजाम गायब
गांधी स्टेडियम मार्ग स्थित एक तीन मंजिला व्यावसायिक भवन में भूतल पर बैंक, प्रथम तल पर निजी कंपनी का कार्यालय और ऊपरी मंजिल पर जिम संचालित मिला। बैंक को छोड़कर अन्य प्रतिष्ठानों में फायर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखाई दिए। भवन में निकासी के लिए केवल एक सीढ़ी है, जबकि जनरेटर को मुख्य प्रवेश द्वार पर असुरक्षित तरीके से रखा गया था। इससे आग लगने की स्थिति में बाहर निकलना भी मुश्किल हो सकता है।
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होटल में भी अधूरी मिली फायर सेफ्टी व्यवस्था
स्टेशन रोड स्थित एक होटल में भी आग से बचाव की व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप नहीं मिलीं। भवन में वाटर हाइडेंट की व्यवस्था सीमित दिखाई दी और कमरों के बाहर फायर लाइन स्पष्ट रूप से नहीं दिखी। तीन मंजिला होटल में ऊपरी मंजिलों से बाहर निकलने के लिए केवल सीढ़ियों का सहारा है। आपात स्थिति में यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
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जिम्मेदारों की उदासीनता बढ़ा रही खतरा
शहर में बड़ी संख्या में अस्पताल, होटल, कोचिंग सेंटर और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान रोजाना सैकड़ों लोगों की आवाजाही का केंद्र हैं। बावजूद इसके फायर सुरक्षा मानकों की अनदेखी लगातार जारी है, जो बड़े हादसोंं को दावत दे सकता है। फिलहाल, जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई कागजी औपचारिकताओं से आगे बढ़ती नजर नहीं आ रही है।
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विकास भवन : तीन मंजिला इमारत में गिनती भर के फायर सिलिंडर
विकास भवन की तीन मंजिला इमारत में करीब 100 से अधिक कमरे हैं। इनमें करीब 300 से अधिक कर्मचारी रोजाना बैठते हैं। वहीं, शिकायत व अन्य योजना का लाभ लेने के लिए भी काफी संख्या में लोग यहां पर पहुंचते हैं। इसके बाद भी तीन मंजिला इमारत में आग से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है। छोटे फायर सिलिंडर के सहारे ही यहां की सुरक्षा व्यवस्था किए जाने के दावे किए जा रहे हैं, जबकि आए दिन विकास भवन में भी शॉर्ट-सर्किट की वजह से आग लगती रहती है। इसके बाद भी जिम्मेदार इसको लेकर कोई ठोस प्रबंधन नहीं करा पा रहे हैं।
सीडीओ सतीश प्रसाद मिश्रा ने बताया कि विकास भवन में फायर सिलिंडरों की संख्या काफी कम है। इसको बढ़वाने को लेकर अधीनस्थों को दिशा निर्देश दिए गए हैं।
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व्यावसायिक भवनों में आग से सुरक्षा के यह हैं मानक
- फायर सेफ्टी के लिए जरूरी इंतजाम
- भवन में मानक के अनुरूप फायर एनओसी होना चाहिए।
- प्रत्येक मंजिल पर पर्याप्त संख्या में अग्निशामक यंत्र लगाए जाएं।
- बहुमंजिला भवनों में वाटर हाइडेंट और फायर फाइटिंग पाइप लाइन की व्यवस्था हो।
- आग लगने की स्थिति में सुरक्षित निकासी के लिए कम से कम दो आपात मार्ग (इमरजेंसी एग्जिट) होने चाहिए।
- इमरजेंसी एग्जिट और सीढ़ियों पर किसी प्रकार का अतिक्रमण या सामान नहीं रखा जाना चाहिए।
- विद्युत वायरिंग मानक के अनुरूप हो और समय-समय पर उसकी जांच कराई जाए।
- जनरेटर, ट्रांसफाॅर्मर और अन्य विद्युत उपकरणों को ज्वलनशील पदार्थों से दूर रखा जाए।
- कर्मचारियों और संस्थान संचालकों को फायर सेफ्टी प्रशिक्षण दिया जाए और समय-समय पर मॉक ड्रिल कराई जाए।
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किन प्रतिष्ठानों के लिए फायर एनओसी जरूरी
अस्पताल और नर्सिंग होम, होटल, गेस्ट हाउस और लॉज, कोचिंग सेंटर एवं शिक्षण संस्थान, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मॉल, बैंक और कार्यालय भवन और बहुमंजिला व्यावसायिक इमारतें।
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आग लगने पर सबसे पहले क्या करें
- तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दें, सीढ़ियों का उपयोग करें, धुएं से बचने के लिए नाक और मुंह को कपड़े से ढकें, बिजली और गैस कनेक्शन बंद करें, घबराने के बजाय व्यवस्थित तरीके से निकासी करें।
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शहर में बहुमंजिला इमारत नहीं हैं। 15 मीटर से ऊंचे भवन या 500 स्क्वायर मीटर एरिया से अधिक पर किसी भी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य है। हालांकि निरीक्षण में सामने आया कि कोचिंग सेंटर प्रथम तल पर संचालित हैं, लेकिन विद्यार्थियों की क्षमता अधिक पाई गई है। कुछ लाइब्रेरी बिना पंजीकरण भी मिले। इसको लेकर डीआईओएस के माध्यम से नोटिस जारी किए जाएंगे। अन्य व्यवसायिक इमारतों की जांच भी की जा रही है। कमियां मिलने पर उन्हें दुरुस्त कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
- अनुराग सिंह, सीएफओ
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फायर विभाग की जांच में 12 लाइब्रेरियां अवैध, जारी होगा नोटिस
पीलीभीत। लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड के बाद अग्निशमन विभाग ने जिले में लाइब्रेरियों और शिक्षण संस्थानों की जांच शुरू कर दी है। मंगलवार को सीएफओ अनुराग सिंह के निर्देशन में पीलीभीत और बीसलपुर क्षेत्र में चलाए गए अभियान के दौरान 12 लाइब्रेरियां बिना वैध पंजीकरण के संचालित मिलीं। इनमें से छह संस्थानों में आग से बचाव के लिए आवश्यक अग्निशमन उपकरण भी नहीं पाए गए।
सीएफओ ने बताया कि जांच के दौरान शहर के नई बस्ती मार्ग, गांधी स्टेडियम रोड और आवास विकास कॉलोनी समेत कई क्षेत्रों में संचालित लाइब्रेरियों का निरीक्षण किया गया। अधिकांश संस्थान संकरी गलियों में संचालित मिले। हालांकि अधिकांश भू-तल पर ही चल रहे थे, जहां सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा था। लाइब्रेरियों में बड़ी संख्या में छात्र मौजूद मिले, जिससे किसी आपात स्थिति में हादसे का खतरा बना हुआ है।
जिले में कोचिंग सेंटर व लाइब्रेरियों का होगा आंकलन
डीआईओएस विजय सिंह ने बताया कि शहर और जिले में कितने कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी है। इसका आंकलन नहीं किया गया है। टीम को लगाकर इसकी पड़ताल की जाएगी। सूचीबद्ध करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। संवाद
अस्पताल में हाइडेंट से जुड़ा घरेलू पाइप, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
गांधी स्टेडियम मार्ग स्थित एक प्रतिष्ठित अस्पताल में आग से सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी मिले। अस्पताल की पहली मंजिल पर लगे वाटर हाइडेंट में उच्च दबाव वाली पाइप के स्थान पर सामान्य घरेलू पाइप लगा मिला। वहीं, रैंप के रास्ते में रखे विद्युत उपकरणों के आसपास प्लास्टिक और अन्य ज्वलनशील सामग्री रखी मिली। विशेषज्ञों के अनुसार, आग लगने की स्थिति में यह व्यवस्था प्रभावी साबित नहीं होगी।
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मोहल्ला सुनगढ़ी में संचालित एक प्रतिष्ठित कोचिंग सेंटर में भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी मिली। आवासीय नक्शे पर बने भवन में संचालित इस संस्थान में विद्यार्थियों के प्रवेश और निकास के लिए केवल एक गेट है। आग जैसी आपात स्थिति में बड़ी संख्या में छात्रों की सुरक्षित निकासी चुनौती बन सकती है। वहीं, फायर ब्रिगेड के उपकरणों और वाटर हाइडेंट की पहुंच भी यहां तक आसान नहीं दिखी।
तीन मंजिला इमारत में सुरक्षा इंतजाम गायब
गांधी स्टेडियम मार्ग स्थित एक तीन मंजिला व्यावसायिक भवन में भूतल पर बैंक, प्रथम तल पर निजी कंपनी का कार्यालय और ऊपरी मंजिल पर जिम संचालित मिला। बैंक को छोड़कर अन्य प्रतिष्ठानों में फायर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखाई दिए। भवन में निकासी के लिए केवल एक सीढ़ी है, जबकि जनरेटर को मुख्य प्रवेश द्वार पर असुरक्षित तरीके से रखा गया था। इससे आग लगने की स्थिति में बाहर निकलना भी मुश्किल हो सकता है।
होटल में भी अधूरी मिली फायर सेफ्टी व्यवस्था
स्टेशन रोड स्थित एक होटल में भी आग से बचाव की व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप नहीं मिलीं। भवन में वाटर हाइडेंट की व्यवस्था सीमित दिखाई दी और कमरों के बाहर फायर लाइन स्पष्ट रूप से नहीं दिखी। तीन मंजिला होटल में ऊपरी मंजिलों से बाहर निकलने के लिए केवल सीढ़ियों का सहारा है। आपात स्थिति में यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
जिम्मेदारों की उदासीनता बढ़ा रही खतरा
शहर में बड़ी संख्या में अस्पताल, होटल, कोचिंग सेंटर और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान रोजाना सैकड़ों लोगों की आवाजाही का केंद्र हैं। बावजूद इसके फायर सुरक्षा मानकों की अनदेखी लगातार जारी है, जो बड़े हादसोंं को दावत दे सकता है। फिलहाल, जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई कागजी औपचारिकताओं से आगे बढ़ती नजर नहीं आ रही है।
विकास भवन : तीन मंजिला इमारत में गिनती भर के फायर सिलिंडर
विकास भवन की तीन मंजिला इमारत में करीब 100 से अधिक कमरे हैं। इनमें करीब 300 से अधिक कर्मचारी रोजाना बैठते हैं। वहीं, शिकायत व अन्य योजना का लाभ लेने के लिए भी काफी संख्या में लोग यहां पर पहुंचते हैं। इसके बाद भी तीन मंजिला इमारत में आग से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है। छोटे फायर सिलिंडर के सहारे ही यहां की सुरक्षा व्यवस्था किए जाने के दावे किए जा रहे हैं, जबकि आए दिन विकास भवन में भी शॉर्ट-सर्किट की वजह से आग लगती रहती है। इसके बाद भी जिम्मेदार इसको लेकर कोई ठोस प्रबंधन नहीं करा पा रहे हैं।
सीडीओ सतीश प्रसाद मिश्रा ने बताया कि विकास भवन में फायर सिलिंडरों की संख्या काफी कम है। इसको बढ़वाने को लेकर अधीनस्थों को दिशा निर्देश दिए गए हैं।
व्यावसायिक भवनों में आग से सुरक्षा के यह हैं मानक
- फायर सेफ्टी के लिए जरूरी इंतजाम
- भवन में मानक के अनुरूप फायर एनओसी होना चाहिए।
- प्रत्येक मंजिल पर पर्याप्त संख्या में अग्निशामक यंत्र लगाए जाएं।
- बहुमंजिला भवनों में वाटर हाइडेंट और फायर फाइटिंग पाइप लाइन की व्यवस्था हो।
- आग लगने की स्थिति में सुरक्षित निकासी के लिए कम से कम दो आपात मार्ग (इमरजेंसी एग्जिट) होने चाहिए।
- इमरजेंसी एग्जिट और सीढ़ियों पर किसी प्रकार का अतिक्रमण या सामान नहीं रखा जाना चाहिए।
- विद्युत वायरिंग मानक के अनुरूप हो और समय-समय पर उसकी जांच कराई जाए।
- जनरेटर, ट्रांसफाॅर्मर और अन्य विद्युत उपकरणों को ज्वलनशील पदार्थों से दूर रखा जाए।
- कर्मचारियों और संस्थान संचालकों को फायर सेफ्टी प्रशिक्षण दिया जाए और समय-समय पर मॉक ड्रिल कराई जाए।
किन प्रतिष्ठानों के लिए फायर एनओसी जरूरी
अस्पताल और नर्सिंग होम, होटल, गेस्ट हाउस और लॉज, कोचिंग सेंटर एवं शिक्षण संस्थान, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मॉल, बैंक और कार्यालय भवन और बहुमंजिला व्यावसायिक इमारतें।
आग लगने पर सबसे पहले क्या करें
- तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दें, सीढ़ियों का उपयोग करें, धुएं से बचने के लिए नाक और मुंह को कपड़े से ढकें, बिजली और गैस कनेक्शन बंद करें, घबराने के बजाय व्यवस्थित तरीके से निकासी करें।
शहर में बहुमंजिला इमारत नहीं हैं। 15 मीटर से ऊंचे भवन या 500 स्क्वायर मीटर एरिया से अधिक पर किसी भी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य है। हालांकि निरीक्षण में सामने आया कि कोचिंग सेंटर प्रथम तल पर संचालित हैं, लेकिन विद्यार्थियों की क्षमता अधिक पाई गई है। कुछ लाइब्रेरी बिना पंजीकरण भी मिले। इसको लेकर डीआईओएस के माध्यम से नोटिस जारी किए जाएंगे। अन्य व्यवसायिक इमारतों की जांच भी की जा रही है। कमियां मिलने पर उन्हें दुरुस्त कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
- अनुराग सिंह, सीएफओ
फायर विभाग की जांच में 12 लाइब्रेरियां अवैध, जारी होगा नोटिस
पीलीभीत। लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड के बाद अग्निशमन विभाग ने जिले में लाइब्रेरियों और शिक्षण संस्थानों की जांच शुरू कर दी है। मंगलवार को सीएफओ अनुराग सिंह के निर्देशन में पीलीभीत और बीसलपुर क्षेत्र में चलाए गए अभियान के दौरान 12 लाइब्रेरियां बिना वैध पंजीकरण के संचालित मिलीं। इनमें से छह संस्थानों में आग से बचाव के लिए आवश्यक अग्निशमन उपकरण भी नहीं पाए गए।
सीएफओ ने बताया कि जांच के दौरान शहर के नई बस्ती मार्ग, गांधी स्टेडियम रोड और आवास विकास कॉलोनी समेत कई क्षेत्रों में संचालित लाइब्रेरियों का निरीक्षण किया गया। अधिकांश संस्थान संकरी गलियों में संचालित मिले। हालांकि अधिकांश भू-तल पर ही चल रहे थे, जहां सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा था। लाइब्रेरियों में बड़ी संख्या में छात्र मौजूद मिले, जिससे किसी आपात स्थिति में हादसे का खतरा बना हुआ है।
जिले में कोचिंग सेंटर व लाइब्रेरियों का होगा आंकलन
डीआईओएस विजय सिंह ने बताया कि शहर और जिले में कितने कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी है। इसका आंकलन नहीं किया गया है। टीम को लगाकर इसकी पड़ताल की जाएगी। सूचीबद्ध करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। संवाद

संकरी गली के इस भवन में संचालित कोचिंग सेंटर। संवाद

संकरी गली के इस भवन में संचालित कोचिंग सेंटर। संवाद

संकरी गली के इस भवन में संचालित कोचिंग सेंटर। संवाद

संकरी गली के इस भवन में संचालित कोचिंग सेंटर। संवाद