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Pilibhit News: अपर मुख्य अधिकारी पर लगे आरोपों की जांच करेंगे मंडलायुक्त
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Tue, 24 Mar 2026 11:45 PM IST
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पीलीभीत। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी धर्मेंद्र कुमार पर लगे आरोपों की जांच मंडलायुक्त करेंगे। इस संबंध में राज्यपाल के विशेष सचिव की ओर से पत्र जारी किया गया है। अपर मुख्य अधिकारी पर जिला पंचायत के पंजीकृत ठेकेदारों ने शासनादेश की अनदेखी कर अवकाश के दिन निविदा खोलने का आरोप लगाया था। जिलाधिकारी ने भी शासन को पत्र भेजकर एएमए पर कार्रवाई की संस्तुति की थी।
जिला पंचायत से जुड़े विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब जिला पंचायत के एएमए (अपर मुख्य अधिकारी) का नाम एक बार फिर चर्चा में है। नवंबर 2025 में जिला पंचायत ने 95 कार्यों का टेंडर निकाला था। इसमें नियमों का बदलाव भी मन मुताबिक किया गया। जिला पंचायत के पंजीकृत ठेकेदारों ने निविदा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए डीएम से शिकायत की।
इसमें कहा गया कि 25 नवंबर को निविदा मनमाने तरीके से अवकाश के दिन ही खोल दी। तकनीकी और वित्तीय निविदा खोलने में भी शासनादेश के नियमों का ध्यान नहीं रखा गया। साथ ही श्रमिकों के पंजीकरण की शर्त का उल्लंघन करने का आरोप भी लगा था। ई-निविदा की ऑनलाइन प्रक्रिया में समिति के सभी सदस्यों के बजाए सिर्फ अपर मुख्य अधिकारी के हस्ताक्षर होने का आरोप भी लगा था।
शिकायत पर डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने सीडीओ आरके श्रीवास की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम गठित कर जांच कराई। इसमें अपर मुख्य अधिकारी की भूमिका संदिग्ध मिली थी। ठेकेदारों ने मामले की शिकायत मंडलायुक्त से भी की। इसके बाद निविदा निरस्त कर दी गई।
जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने शासन को पत्र भेजकर जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी धर्मेंद्र कुमार पर कार्रवाई की संस्तुति की थी। इसमें उनके जन सामान्य से व्यवहार अच्छा न होने की बात भी कही गई थी। अब इस मामले की जांच के लिए मंडलायुक्त बरेली को जांच अधिकारी नामित किया गया है।
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जिला पंचायत से जुड़े विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब जिला पंचायत के एएमए (अपर मुख्य अधिकारी) का नाम एक बार फिर चर्चा में है। नवंबर 2025 में जिला पंचायत ने 95 कार्यों का टेंडर निकाला था। इसमें नियमों का बदलाव भी मन मुताबिक किया गया। जिला पंचायत के पंजीकृत ठेकेदारों ने निविदा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए डीएम से शिकायत की।
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इसमें कहा गया कि 25 नवंबर को निविदा मनमाने तरीके से अवकाश के दिन ही खोल दी। तकनीकी और वित्तीय निविदा खोलने में भी शासनादेश के नियमों का ध्यान नहीं रखा गया। साथ ही श्रमिकों के पंजीकरण की शर्त का उल्लंघन करने का आरोप भी लगा था। ई-निविदा की ऑनलाइन प्रक्रिया में समिति के सभी सदस्यों के बजाए सिर्फ अपर मुख्य अधिकारी के हस्ताक्षर होने का आरोप भी लगा था।
शिकायत पर डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने सीडीओ आरके श्रीवास की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम गठित कर जांच कराई। इसमें अपर मुख्य अधिकारी की भूमिका संदिग्ध मिली थी। ठेकेदारों ने मामले की शिकायत मंडलायुक्त से भी की। इसके बाद निविदा निरस्त कर दी गई।
जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने शासन को पत्र भेजकर जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी धर्मेंद्र कुमार पर कार्रवाई की संस्तुति की थी। इसमें उनके जन सामान्य से व्यवहार अच्छा न होने की बात भी कही गई थी। अब इस मामले की जांच के लिए मंडलायुक्त बरेली को जांच अधिकारी नामित किया गया है।